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सेवाएं देने पलभर में पहुंचते हैं, वेतन के लिए एक माह से कर रहे इंतजार
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मोरनी। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों के प्राथमिक उपचार के लिए शुरू की गई आरोग्यम सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को करीब एक साल से वेतन नही मिला है। कोरोना काल में भी अपनी जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सुविधाएं और प्राथमिक उपचार पहुंचाने में जुटे आरोग्यम बाइक चालकों का 14 लाख रुपया वेतन का बकाया है। इसको प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्तर पर गुहार भी लगा चुके हैं लेकिन सालभर से मात्र बजट नही आया कहकर टरकाया जा रहा है। सभी ने मुख्यमंत्री हरियाणा और स्वास्थ्य मंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
वेतन के अभाव में कई वाहन चालकों और इनके परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही रोजाना के खर्चों के लिए लोगों से उधार मांगकर काम चलाने को मजबूर हैं। 11 माह का प्रत्येक कर्मचारी का कुल 2.31 लाख रुपया बकाया है। जिसे जल्दी दिलवाया जाना चाहिए। - दिव्यदीप कौशिक, आरोग्यम कर्मचारी
आरोग्यम की टीम कोरोना काल में निरंतर अपनी सेवाएं स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मिलकर देती रही है। जहां-जहां उनकी ड्यूटी लगाई गई वहां पर उन्होंने अपना शत प्रतिशत योगदान दिया है। पता नही निचले कर्मचारियों का वेतन देने में इतनी देरी क्यों की जा रही है। -जगपाल सिंह, आरोग्यम कर्मचारी
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संबंधित विभाग के अधिकारियों से लेकर जिला उपायुक्त से गुहार लगा चुके हैं। हर जगह से मात्र आश्वासन ही मिल रहा है। कई महीनों से एक माह इंतजार कर लो आ जाएगी, जैसे आश्वासन मिल रहा है। जल्द वेतन नही आया तो परेशानी बढ़ जाएंगी। नरेंद्र कुमार, आरोग्यम कर्मचारी
वर्ष-2017 में मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर इस सेवाओं को शुरू किया था। पहले दिन से लेकर आज तक उन्हें हर माह वेतन नही मिला है। इस बार 11 माह हो गए हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रशासन हमारी परेशानी को समझे और समाधान करवाए। बलजीत सिंह, आरोग्यम कर्मचारी।
वर्ष 2018 का भी सात माह का वेतन बकाया है, जोकि आज तक उन्हें नही दिया गया है। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई उचित जवाब नही मिल रहा है। आज तक यह नहीं बताया गया कि उन्हें वेतन मिलेगा या फिर नही। उन्होंने लगातार बिना रुके अपनी सेवाएं जारी रखी हैं। करणजीत सिंह, आरोग्यम कर्मचारी।
घर के जरूरी खर्च रुके हैं, इससे परिवार के लोगों में रोष है। इस माह वेतन नही दिया गया तो परिवार सहित विभाग के अधिकारियों के कार्यालय में प्रदर्शन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी। - भूपेंद्र सिंह, आरोग्यम कर्मचारी।
इस मामले में जिला रेडक्रास अधिकारी सविता अग्रवाल ने फिर पुराना जवाब सुनाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनके प्रयास जारी हैं। हर्ष फाउंडेशन के माध्यम से उन्हें यह फंड प्राप्त होता है। इसके लिए कई बार रिमाइंडर भेज चुके हैं। जैसे फंड मिलेगा रुका वेतन जारी कर दिया जाएगा।
मोरनी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. उज्ज्वलजीत सिंह ने बताया कि पीएचसी उन्हें केवल फ्यूल (पेट्रोल) का खर्च ही देती है, जो आज तक का अपडेट है। विभाग द्वारा भी रेडक्रास को वेतन देने के संदर्भ में लिखा गया है।
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वेतन के अभाव में कई वाहन चालकों और इनके परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही रोजाना के खर्चों के लिए लोगों से उधार मांगकर काम चलाने को मजबूर हैं। 11 माह का प्रत्येक कर्मचारी का कुल 2.31 लाख रुपया बकाया है। जिसे जल्दी दिलवाया जाना चाहिए। - दिव्यदीप कौशिक, आरोग्यम कर्मचारी
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आरोग्यम की टीम कोरोना काल में निरंतर अपनी सेवाएं स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मिलकर देती रही है। जहां-जहां उनकी ड्यूटी लगाई गई वहां पर उन्होंने अपना शत प्रतिशत योगदान दिया है। पता नही निचले कर्मचारियों का वेतन देने में इतनी देरी क्यों की जा रही है। -जगपाल सिंह, आरोग्यम कर्मचारी
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संबंधित विभाग के अधिकारियों से लेकर जिला उपायुक्त से गुहार लगा चुके हैं। हर जगह से मात्र आश्वासन ही मिल रहा है। कई महीनों से एक माह इंतजार कर लो आ जाएगी, जैसे आश्वासन मिल रहा है। जल्द वेतन नही आया तो परेशानी बढ़ जाएंगी। नरेंद्र कुमार, आरोग्यम कर्मचारी
वर्ष-2017 में मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर इस सेवाओं को शुरू किया था। पहले दिन से लेकर आज तक उन्हें हर माह वेतन नही मिला है। इस बार 11 माह हो गए हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रशासन हमारी परेशानी को समझे और समाधान करवाए। बलजीत सिंह, आरोग्यम कर्मचारी।
वर्ष 2018 का भी सात माह का वेतन बकाया है, जोकि आज तक उन्हें नही दिया गया है। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई उचित जवाब नही मिल रहा है। आज तक यह नहीं बताया गया कि उन्हें वेतन मिलेगा या फिर नही। उन्होंने लगातार बिना रुके अपनी सेवाएं जारी रखी हैं। करणजीत सिंह, आरोग्यम कर्मचारी।
घर के जरूरी खर्च रुके हैं, इससे परिवार के लोगों में रोष है। इस माह वेतन नही दिया गया तो परिवार सहित विभाग के अधिकारियों के कार्यालय में प्रदर्शन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी। - भूपेंद्र सिंह, आरोग्यम कर्मचारी।
इस मामले में जिला रेडक्रास अधिकारी सविता अग्रवाल ने फिर पुराना जवाब सुनाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनके प्रयास जारी हैं। हर्ष फाउंडेशन के माध्यम से उन्हें यह फंड प्राप्त होता है। इसके लिए कई बार रिमाइंडर भेज चुके हैं। जैसे फंड मिलेगा रुका वेतन जारी कर दिया जाएगा।
मोरनी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. उज्ज्वलजीत सिंह ने बताया कि पीएचसी उन्हें केवल फ्यूल (पेट्रोल) का खर्च ही देती है, जो आज तक का अपडेट है। विभाग द्वारा भी रेडक्रास को वेतन देने के संदर्भ में लिखा गया है।