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Panchkula News: टापू पर फंसे ग्रामीणों को सेना ने बचाया, की जानमाल की सुरक्षा
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कौशल्या डैम में रिहर्सल करते सेना के जवान।
संवाद न्यूज एजेंसी
पिंजौर। कौशल्या डैम में स्थिति टापू पर बसे पिंजौर गांव में अचानक प्राकृतिक आपदा आ जाती है। जैसे ही इसकी सूचना प्रशासन को प्राप्त होती है तुरंत ड्रोन के माध्यम से मेडिकल सहायता पहुंचाई जाती है और एनडीआरएफ की टीम गांव पहुंचकर लोगों को सकुशल किनारे पर ले जाना शुरू करती है। दूसरी ओर आर्मी मोर्चा संभालती है और गांव वासियों के जानमाल की सुरक्षा करती है।
ये नजारा था कौशल्या डैम का जहां विनबेक्स 2024: भारत-वियतनाम संयुक्त फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास के पांचवें संस्करण का आयोजन किया जा रहा था। इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन शुक्रवार को कौशल्या बांध पर मानवीय सहायता और आपदा राहत, सत्यापन अभ्यास, और ‘एक्स-राहत’ (राहत अभ्यास) के साथ हुआ।
अपने समापन भाषण में लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, जीओसी खड्गा कोर ने भारत-वियतनाम द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर प्रकाश डाला। कहा कि भारत-वियतनाम द्विपक्षीय अभ्यास ने शांति, समृद्धि और लोगों के लिए संयुक्त दृष्टिकोण को और मजबूत किया है। चूंकि भारत और वियतनाम इंडो-पैसिफिक और आसियान क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए आने वाले वर्षों में उनके द्विपक्षीय संबंधों के और भी गहरे और व्यापक होने की उम्मीद है।
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इस अवसर पर, वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के तहत शांति अभियानों के उप निदेशक सीनियर कर्नल डॉ. गुयेन बा हंग ने द्विपक्षीय अभ्यास के सफल समापन पर भारतीय और वियतनामी दोनों सेनाओं को बधाई दी। कहा कि यह द्विपक्षीय अभ्यास भारत और वियतनाम के बीच संबंधों को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो आपदा प्रबंधन और राहत प्रयासों में सहयोग के लिए दोनों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इस अभ्यास ने कौशल और व्यावसायिकता के उच्च मानकों को प्रदर्शित किया, जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत संचालन के लिए चिकित्सा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में बलों की क्षमताओं में बढ़ोतरी हुई है।
वियतनाम पीपुल्स आर्मी और भारतीय सेना के सैनिक 04 नवंबर से शुरू विनबेक्स-2024 अभ्यास में भाग ले रहे थे। शुरुआती दौर में यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र मिशन की गतिशीलता के साथ सामान्य प्रशिक्षण प्रदान करने पर केंद्रित था। दोनों टुकड़ियों ने संयुक्त राष्ट्र के आदेश के तहत इंजीनियरिंग कार्यों और चिकित्सा कार्यों के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता और कौशल साझा किए।
मल्टी-एजेंसी एचएडीआर वैलिडेशन एक्सरसाइज ‘एक्स राहत’ का आयोजन कौशल्या डैम, पिंजौर में किया गया। इस अभ्यास में भारतीय सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्य बलों और नागरिक प्रशासन के बीच विभिन्न नई पीढ़ी के उपकरणों को शामिल करते हुए संयुक्त आपदा राहत अभियान चलाने में सहज समन्वय का प्रदर्शन किया गया।
मॉक ड्रिल के समापन दिवस पर वियतनाम इंडिया द्विपक्षीय अभ्यास किया गया, जिसमें प्राकृतिक व मानव निर्मित आपदाओं से निपटने का तरीका दिखाया गया।
इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य प्रमुख रूप से तीन तरह की प्राकृतिक व मानव निर्मित आपदाओं से निपटना था, जिसमें फैक्टरी परिसर में गैस रिसाव व अन्य कारणों से आगजनी से होने वाले नुकसान, भूकंप व बाढ़ आदि की स्थिति फंसे लोगों को बचाना और राहत पहुंचाना, चिकित्सीय सुविधा पहुंचाना तथा सभी विभागों को आपस में समन्वय बनाकर राहत एवं बचाव कार्य करना था।। राहत और बचाव कार्यों के लिए उपकरणों की उपलब्धता, रिसोर्स मैनेजमेंट, स्वास्थ्य, सेना, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा पैरामेडिकल टीमों की तैनाती तथा आपदा प्रबंधन पर विस्तार से बताया गया।
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पिंजौर। कौशल्या डैम में स्थिति टापू पर बसे पिंजौर गांव में अचानक प्राकृतिक आपदा आ जाती है। जैसे ही इसकी सूचना प्रशासन को प्राप्त होती है तुरंत ड्रोन के माध्यम से मेडिकल सहायता पहुंचाई जाती है और एनडीआरएफ की टीम गांव पहुंचकर लोगों को सकुशल किनारे पर ले जाना शुरू करती है। दूसरी ओर आर्मी मोर्चा संभालती है और गांव वासियों के जानमाल की सुरक्षा करती है।
ये नजारा था कौशल्या डैम का जहां विनबेक्स 2024: भारत-वियतनाम संयुक्त फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास के पांचवें संस्करण का आयोजन किया जा रहा था। इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन शुक्रवार को कौशल्या बांध पर मानवीय सहायता और आपदा राहत, सत्यापन अभ्यास, और ‘एक्स-राहत’ (राहत अभ्यास) के साथ हुआ।
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अपने समापन भाषण में लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, जीओसी खड्गा कोर ने भारत-वियतनाम द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर प्रकाश डाला। कहा कि भारत-वियतनाम द्विपक्षीय अभ्यास ने शांति, समृद्धि और लोगों के लिए संयुक्त दृष्टिकोण को और मजबूत किया है। चूंकि भारत और वियतनाम इंडो-पैसिफिक और आसियान क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए आने वाले वर्षों में उनके द्विपक्षीय संबंधों के और भी गहरे और व्यापक होने की उम्मीद है।
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इस अवसर पर, वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के तहत शांति अभियानों के उप निदेशक सीनियर कर्नल डॉ. गुयेन बा हंग ने द्विपक्षीय अभ्यास के सफल समापन पर भारतीय और वियतनामी दोनों सेनाओं को बधाई दी। कहा कि यह द्विपक्षीय अभ्यास भारत और वियतनाम के बीच संबंधों को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो आपदा प्रबंधन और राहत प्रयासों में सहयोग के लिए दोनों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इस अभ्यास ने कौशल और व्यावसायिकता के उच्च मानकों को प्रदर्शित किया, जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत संचालन के लिए चिकित्सा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में बलों की क्षमताओं में बढ़ोतरी हुई है।
वियतनाम पीपुल्स आर्मी और भारतीय सेना के सैनिक 04 नवंबर से शुरू विनबेक्स-2024 अभ्यास में भाग ले रहे थे। शुरुआती दौर में यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र मिशन की गतिशीलता के साथ सामान्य प्रशिक्षण प्रदान करने पर केंद्रित था। दोनों टुकड़ियों ने संयुक्त राष्ट्र के आदेश के तहत इंजीनियरिंग कार्यों और चिकित्सा कार्यों के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता और कौशल साझा किए।
मल्टी-एजेंसी एचएडीआर वैलिडेशन एक्सरसाइज ‘एक्स राहत’ का आयोजन कौशल्या डैम, पिंजौर में किया गया। इस अभ्यास में भारतीय सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्य बलों और नागरिक प्रशासन के बीच विभिन्न नई पीढ़ी के उपकरणों को शामिल करते हुए संयुक्त आपदा राहत अभियान चलाने में सहज समन्वय का प्रदर्शन किया गया।
मॉक ड्रिल के समापन दिवस पर वियतनाम इंडिया द्विपक्षीय अभ्यास किया गया, जिसमें प्राकृतिक व मानव निर्मित आपदाओं से निपटने का तरीका दिखाया गया।
इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य प्रमुख रूप से तीन तरह की प्राकृतिक व मानव निर्मित आपदाओं से निपटना था, जिसमें फैक्टरी परिसर में गैस रिसाव व अन्य कारणों से आगजनी से होने वाले नुकसान, भूकंप व बाढ़ आदि की स्थिति फंसे लोगों को बचाना और राहत पहुंचाना, चिकित्सीय सुविधा पहुंचाना तथा सभी विभागों को आपस में समन्वय बनाकर राहत एवं बचाव कार्य करना था।। राहत और बचाव कार्यों के लिए उपकरणों की उपलब्धता, रिसोर्स मैनेजमेंट, स्वास्थ्य, सेना, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा पैरामेडिकल टीमों की तैनाती तथा आपदा प्रबंधन पर विस्तार से बताया गया।