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पंचकूला: अगले पांच वर्ष में 5000 एकड़ होगा झींगापालन के अधीन क्षेत्रफल

Sat, 18 Feb 2023 09:36 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Feb 2023 09:36 PM IST
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Area under shrimp farming will be 5000 acres in next five years
लक्ष्य बढ़ाने को लेकर श्री मुक्तसर साहिब में राज्यस्तरीय सेमिनार आयोजित
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सेम वाली बेकार पड़ी जमीन से अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए किया प्रेरित
मौजूदा दौर में राज्य में 1212 एकड़ क्षेत्रफल में हो रहा 2400 टन झींगा पालन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में सेम वाली बेकार पड़ी जमीन में झींगा पालन के लिए उत्साहित किया जाएगा। पांच साल के दौरान झींगा पालन के अधीन क्षेत्रफल 5000 एकड़ करने के लक्ष्य को लेकर मछली पालन विभाग ने राज्यस्तरीय झींगा पालन सेमिनार श्री मुक्तसर साहिब के गांव ईनाखेड़ा स्थित डेमोस्ट्रेशन फार्म-कम-ट्रेनिंग सेंटर में करवाया गया। मछली पालन विभाग द्वारा कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर की अध्यक्षता में पंजाब राज्य मछली पालन विकास बोर्ड की सहायता से करवाए गए एक दिवसीय सेमिनार के दौरान मुख्य मेहमान के तौर पर लंबी से विधायक गुरमीत सिंह खुड्डियां और जिला योजना बोर्ड के चेयरमैन सुखजिंदर सिंह ने शिरकत की।
सेमिनार में पहुंचे किसानों और मछली पालकों को संबोधित करते हुए डायरेक्टर और वार्डन मछली पालन विभाग जसवीर सिंह ने बताया कि साल 2022-23 के दौरान राज्य में 366 किसानों द्वारा 1212 एकड़ क्षेत्रफल में झींगा पालन किया जा रहा है, जिससे लगभग 2400 टन झींगे का उत्पादन हुआ है। पंजाब के सेम और खारे पानी से प्रभावित और जीरो आय वाली जमीनों में झींगा पालन करवाया जा रहा है, जो किसानों की आय बढ़ाने में सफल सिद्ध हुआ है। झींगा पालन का पेशा अपनाकर किसान एक एकड़ क्षेत्रफल में से तीन लाख रुपये की आय प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झींगे की अधिक पैदावार होने के कारण इस साल झींगे का रेट किसानों को कम मिला है। उन्होंने कहा कि इसलिए झींगे की फसल की बिक्री के लिए लोकल मंडीकरण को विकसित करने की जरूरत है। सेम वाले इलाके में बेकार पड़ी जमीन को प्रयोग में लाकर इससे काफी लाभ कमाया जा सकता है। सरकार ने सरहदी जिलों में झींगा पालन को और प्रफुल्लित करने के उद्देश्य से अगले पांच साल के दौरान 5000 एकड़ क्षेत्रफल में झींगा पालन अपनाने की रणनीति बनाई है। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य राज्य में झींगा पालन को प्रफुल्लित करने में आ रही दिक्कतों को समझना और इसका हल निकालना है। सेमिनार में करीब 350 झींगा पालकों और व्यापारियों ने हिस्सा लिया।
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इस दौरान पशु पालन, मछली पालन, डेयरी विभाग, सोलर पावर प्लांट पीडा और झींगा पालन से संबंधित उत्पादों जैसे फीड, खादें, प्रोबायोटिक्स, एरीएटर्स, वैल्यू एडेड प्रोडक्ट जैसे झींगे का आचार आदि विभिन्न 17 प्रदर्शनियां किसानों की जानकारी में वृद्धि के लिए लगाई गईं। उपायुक्त विनीत कुमार ने किसानों की झींगा पालन के दौरान बिजली संबंधी आने वाली दिक्कतों के हल के तौर पर सोलर पावर प्लांट लगवाने के लिए प्रशासन द्वारा सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
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गुरु अंगद देव वेटरिनरी यूनिवर्सिटी लुधियाना और इस क्षेत्र में तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहीं अन्य संस्थाओं के माहिरों और वैज्ञानिकों ने झींगा पालन से जुड़ी नई खोजों संबंधी विचार साझा किए। इस मौके पर मुख्य मेहमानों ने झींगा पालन संबंधी विभागीय ट्रेनिंग मैनुअल जारी करने के अलावा जिले के प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। सेमिनार के दौरान डेयरी विभाग के निदेशक कुलदीप सिंह जस्सोवाल, एसडीएम कंवरजीत सिंह और सहायक निदेशक मछली पालन केवल कृष्ण मौजूद थे।
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