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Panchkula News: फर्जी ऑस्ट्रेलियाई वीजा दिखाकर ठगी के मामले में मां-बेटे की अग्रिम जमानत खारिज
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वर्क वीजा दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेने का आरोप, कोर्ट ने हिरासत में पूछताछ को माना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। ऑस्ट्रेलिया का वर्क वीजा दिलाने के नाम पर ठगी करने के मामले में करनाल निवासी मां-बेटे को अदालत से राहत नहीं मिली है। पंचकूला कोर्ट ने फर्जी ऑस्ट्रेलियाई वीजा दिखाकर ठगी के आरोप में चैतन्य गेरा और उसकी मां अनु गेरा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही दोनों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।
रायपुररानी निवासी अमित कुमार की शिकायत पर दोनों के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार फरवरी 2024 में आरोपियों ने खुद को इमिग्रेशन एजेंट बताकर ऑस्ट्रेलिया का वर्क वीजा दिलाने का भरोसा दिया और इसके बदले 24 लाख रुपये मांगे। अग्रिम भुगतान के तौर पर 2.30 लाख रुपये उनके खातों में जमा कराए गए थे।
शिकायत में आरोप है कि तय समय के बाद भी वीजा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। बाद में आरोपियों ने पीडीएफ के माध्यम से वीजा दस्तावेज भेजा, जो जांच में फर्जी पाया गया। विरोध करने पर रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन पूरी राशि वापस नहीं की गई।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि शिकायतकर्ता की 2.30 लाख रुपये की राशि लौटाई जा चुकी है। वहीं सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि मामला केवल धनराशि के लेन-देन का नहीं, बल्कि फर्जी वीजा तैयार करने और अवैध इमिग्रेशन गतिविधियों से जुड़ा गंभीर मामला है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि निष्पक्ष जांच के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। ऑस्ट्रेलिया का वर्क वीजा दिलाने के नाम पर ठगी करने के मामले में करनाल निवासी मां-बेटे को अदालत से राहत नहीं मिली है। पंचकूला कोर्ट ने फर्जी ऑस्ट्रेलियाई वीजा दिखाकर ठगी के आरोप में चैतन्य गेरा और उसकी मां अनु गेरा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही दोनों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।
रायपुररानी निवासी अमित कुमार की शिकायत पर दोनों के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार फरवरी 2024 में आरोपियों ने खुद को इमिग्रेशन एजेंट बताकर ऑस्ट्रेलिया का वर्क वीजा दिलाने का भरोसा दिया और इसके बदले 24 लाख रुपये मांगे। अग्रिम भुगतान के तौर पर 2.30 लाख रुपये उनके खातों में जमा कराए गए थे।
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शिकायत में आरोप है कि तय समय के बाद भी वीजा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। बाद में आरोपियों ने पीडीएफ के माध्यम से वीजा दस्तावेज भेजा, जो जांच में फर्जी पाया गया। विरोध करने पर रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन पूरी राशि वापस नहीं की गई।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि शिकायतकर्ता की 2.30 लाख रुपये की राशि लौटाई जा चुकी है। वहीं सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि मामला केवल धनराशि के लेन-देन का नहीं, बल्कि फर्जी वीजा तैयार करने और अवैध इमिग्रेशन गतिविधियों से जुड़ा गंभीर मामला है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि निष्पक्ष जांच के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।