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Panchkula News: 77 लाख की लागत से बनी अल्फा मास्टिक सड़क घोटाले की होगी जांच
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पंचकूला। सेक्टर-11/15 और 12/14 रैली चौक बनी मस्टिक एस्फाल्ट सड़क डेढ़ साल भी नहीं टिक पाई। ठेकेदार की तरफ से घटिया सामग्री के इस्तेमाल किए जाने के कारण ही यह सड़क समय से पहले टूट गई। करीब 77 लाख की लागत से दोनों राउंड अबाउटों पर बनी सड़क पहली बारिश में ही धुल गई थी। दूसरी बारिश में चौक के किनारों से लेकर बीच-बीच में 50 फीसदी उखड़ गई थी।
नगर निगम ने चंडीगढ़ की तर्ज पर पंचकूला में सड़क बनाया था। सामान्य सड़क की लाइफ तीन से चार साल होती है। बेतहर परिणाम के लिए निगम ने दोनों चौकों पर मस्टिक एस्फाल्ट का निर्माण करवाया था। सड़क टूटने के बाद मामले की शिकायत 27 फरवरी 2024 को पंचकूला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को पंचकूला विकास मंच की ओर से दी गई थी।
इसका संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने 12 सितंबर को जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी गगनदीप सिंह को जांच के आदेश दिए हैं। यह आदेश पत्र शुक्रवार को जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी के पास पहुंचा है। कार्यकारी अधिकारी ने उपायुक्त के आदेश के बाद मामले की जांच के लिए नगर नगर निगम से फाइलों की मांग की है।
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एक चौक 37 और दूसरे पर 40 लाख रुपये खर्च कर निगम ने मस्टिक एस्फाल्ट की सड़क बनाई.....
नगर निगम ने सेक्टर-11-12-12ए-14 और सेक्टर-10-11-14-15 के चौक के आसपास मस्टिक एस्फाल्ट की सड़क बनाई गई थी। इनमें एक चौक पर 37 लाख और दूसरे पर 40 लाख रुपये का काम करवाया गया था। अब दोनों चौक की मस्टिक एस्फाल्ट बीच से उखड़ गईं हैं। दो बार मूसलाधार बारिश हुई तो पूरी सड़क उखड़ जाएगी।
निगम के एक्सईएन, एसडीओ और जेई पर गिर सकती है गाज..
पंचकूला विकास मंच के शिकायत के बाद नगर निगम के महापौर ने कुलभूषण गोयल के निर्देश के बाद ठेकेदार की जमानत राशि जब्त कर ली गई है। वहीं कंपनी को ब्लैक लिस्ट भी कर दिया गया है। जांच में खामियां मिलने पर इस प्रोजेक्ट के निर्माण के बाद जांचकर हरी झंडी देने वाले नगर निगम के एक्सईएन, एसडीओ और जेई पर भी कार्रवाई हो सकती है।
शिकायत के बाद जांच अधिकारी बदला.......
पंचकूला विकास मंच के प्रधान देवराज शर्मा ने बताया कि पहली शिकायत फरवरी 2024 में पूर्व उपायुक्त सुसील सारवान को दी थी। उसके बाद उपायुक्त ने जांच की जिम्मेदारी मार्च में अतिरिक्त उपायुक्त सचिन गुप्ता को दी। जो नगर निगम कमिश्नर भी हैं। जिसपर मंच ने एतराज उठाया। कुछ दिन बाद सुशील सारवान का ट्रांसफर हो गया। उनकी जगह उपायुक्त का कार्यभार डॉ. यश गर्ग ने संभाला। अप्रैल में विकास मंच के पदाधिकारी डॉ. यश गर्ग से मिलकर जांच अधिकारी बदलने की मांग की। मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि जिसके खिलाफ शिकायत है, अगर वहीं जांच अधिकारी होगा तो उससे न्याय की क्या उम्मीद कर सकते हैं। जिसके बाद उपायुक्त ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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नगर निगम ने चंडीगढ़ की तर्ज पर पंचकूला में सड़क बनाया था। सामान्य सड़क की लाइफ तीन से चार साल होती है। बेतहर परिणाम के लिए निगम ने दोनों चौकों पर मस्टिक एस्फाल्ट का निर्माण करवाया था। सड़क टूटने के बाद मामले की शिकायत 27 फरवरी 2024 को पंचकूला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को पंचकूला विकास मंच की ओर से दी गई थी।
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इसका संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने 12 सितंबर को जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी गगनदीप सिंह को जांच के आदेश दिए हैं। यह आदेश पत्र शुक्रवार को जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी के पास पहुंचा है। कार्यकारी अधिकारी ने उपायुक्त के आदेश के बाद मामले की जांच के लिए नगर नगर निगम से फाइलों की मांग की है।
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एक चौक 37 और दूसरे पर 40 लाख रुपये खर्च कर निगम ने मस्टिक एस्फाल्ट की सड़क बनाई.....
नगर निगम ने सेक्टर-11-12-12ए-14 और सेक्टर-10-11-14-15 के चौक के आसपास मस्टिक एस्फाल्ट की सड़क बनाई गई थी। इनमें एक चौक पर 37 लाख और दूसरे पर 40 लाख रुपये का काम करवाया गया था। अब दोनों चौक की मस्टिक एस्फाल्ट बीच से उखड़ गईं हैं। दो बार मूसलाधार बारिश हुई तो पूरी सड़क उखड़ जाएगी।
निगम के एक्सईएन, एसडीओ और जेई पर गिर सकती है गाज..
पंचकूला विकास मंच के शिकायत के बाद नगर निगम के महापौर ने कुलभूषण गोयल के निर्देश के बाद ठेकेदार की जमानत राशि जब्त कर ली गई है। वहीं कंपनी को ब्लैक लिस्ट भी कर दिया गया है। जांच में खामियां मिलने पर इस प्रोजेक्ट के निर्माण के बाद जांचकर हरी झंडी देने वाले नगर निगम के एक्सईएन, एसडीओ और जेई पर भी कार्रवाई हो सकती है।
शिकायत के बाद जांच अधिकारी बदला.......
पंचकूला विकास मंच के प्रधान देवराज शर्मा ने बताया कि पहली शिकायत फरवरी 2024 में पूर्व उपायुक्त सुसील सारवान को दी थी। उसके बाद उपायुक्त ने जांच की जिम्मेदारी मार्च में अतिरिक्त उपायुक्त सचिन गुप्ता को दी। जो नगर निगम कमिश्नर भी हैं। जिसपर मंच ने एतराज उठाया। कुछ दिन बाद सुशील सारवान का ट्रांसफर हो गया। उनकी जगह उपायुक्त का कार्यभार डॉ. यश गर्ग ने संभाला। अप्रैल में विकास मंच के पदाधिकारी डॉ. यश गर्ग से मिलकर जांच अधिकारी बदलने की मांग की। मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि जिसके खिलाफ शिकायत है, अगर वहीं जांच अधिकारी होगा तो उससे न्याय की क्या उम्मीद कर सकते हैं। जिसके बाद उपायुक्त ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।