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Panchkula News: मीडिया में सराहना के बाद दो दिन में दोबारा तबादला, हाईकोर्ट ने लगाई रोक
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एक सप्ताह के भीतर मांगपत्र देने का याचिकाकर्ताओं को आदेश
मांगपत्र पर निर्णय होने तक तबादला आदेश पर जारी रहेगी रोक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दो दिन के भीतर दोबारा तबादला करने के मामले में तीन पुलिस अधिकारियों को राहत देते हुए विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि तीनों अधिकारी एक सप्ताह के भीतर प्रतिनिधित्व देते हैं तो उन पर निर्णय होने तक तबादला आदेश लागू नहीं किया जाएगा।
जस्टिस जगमोहन बंसल ने प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि तीनों याचिकाकर्ता, जो सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) के पद पर तैनात हैं, को 25 अक्तूबर 2025 को बाघापुराना से मोगा स्थानांतरित किया गया था और उन्होंने इसे स्वीकार भी कर लिया था। हालांकि 27 अक्तूबर के एक अन्य आदेश से उन्हें अलग-अलग जिलों मालेरकोटला, मानसा और पठानकोट भेज दिया गया। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।
अदालत ने कहा कि मोगा जिले में स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग 60 प्रतिशत स्टाफ की कमी है। ऐसे में अधिकारियों को अन्य जिलों की प्रशासनिक आवश्यकताओं के नाम पर स्थानांतरित किया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों को मीडिया में उनकी सराहना और विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के कारण प्रताड़ित किया गया।
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सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने दलील दी कि याचिकाकर्ता सुखदेव सिंह सेवानिवृत्ति के निकट हैं, इसलिए उनका तबादला नहीं किया जाएगा। इस पर अदालत ने याचिका को सुखदेव सिंह के संबंध में स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दे दी। अदालत ने कहा कि पंजाब पुलिस एक्ट के प्रावधानों के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी की राज्य के किसी भी हिस्से में तैनाती की जा सकती है। संबंधित पद जिला-विशिष्ट नहीं हैं और अधिकारियों को राज्य के बाहर भी भेजा जा सकता है।
अंत में अदालत ने निर्देश दिया कि अन्य याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर तबादले पर पुनर्विचार के लिए प्रतिनिधित्व दाखिल कर सकते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो सक्षम प्राधिकारी उस पर विचार कर निर्णय लेगा और तब तक विवादित आदेश लागू नहीं किया जाएगा।
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मांगपत्र पर निर्णय होने तक तबादला आदेश पर जारी रहेगी रोक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दो दिन के भीतर दोबारा तबादला करने के मामले में तीन पुलिस अधिकारियों को राहत देते हुए विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि तीनों अधिकारी एक सप्ताह के भीतर प्रतिनिधित्व देते हैं तो उन पर निर्णय होने तक तबादला आदेश लागू नहीं किया जाएगा।
जस्टिस जगमोहन बंसल ने प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि तीनों याचिकाकर्ता, जो सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) के पद पर तैनात हैं, को 25 अक्तूबर 2025 को बाघापुराना से मोगा स्थानांतरित किया गया था और उन्होंने इसे स्वीकार भी कर लिया था। हालांकि 27 अक्तूबर के एक अन्य आदेश से उन्हें अलग-अलग जिलों मालेरकोटला, मानसा और पठानकोट भेज दिया गया। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।
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अदालत ने कहा कि मोगा जिले में स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग 60 प्रतिशत स्टाफ की कमी है। ऐसे में अधिकारियों को अन्य जिलों की प्रशासनिक आवश्यकताओं के नाम पर स्थानांतरित किया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों को मीडिया में उनकी सराहना और विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के कारण प्रताड़ित किया गया।
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सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने दलील दी कि याचिकाकर्ता सुखदेव सिंह सेवानिवृत्ति के निकट हैं, इसलिए उनका तबादला नहीं किया जाएगा। इस पर अदालत ने याचिका को सुखदेव सिंह के संबंध में स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दे दी। अदालत ने कहा कि पंजाब पुलिस एक्ट के प्रावधानों के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी की राज्य के किसी भी हिस्से में तैनाती की जा सकती है। संबंधित पद जिला-विशिष्ट नहीं हैं और अधिकारियों को राज्य के बाहर भी भेजा जा सकता है।
अंत में अदालत ने निर्देश दिया कि अन्य याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर तबादले पर पुनर्विचार के लिए प्रतिनिधित्व दाखिल कर सकते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो सक्षम प्राधिकारी उस पर विचार कर निर्णय लेगा और तब तक विवादित आदेश लागू नहीं किया जाएगा।