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आरटीआई के दायरे में आए प्रशासक और एडवाइजर
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और एडवाइजर मनोज परिदा के कामकाज को भी आरटीआई के दायरे में शामिल कर लिया है। प्रशासक ने आरटीआई में जानकारी हासिल करने के लिए केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) नियुक्त कर दिए हैं। काफी पहले से दोनों कार्यालय को आरटीआई के दायरे में शामिल किए जाने की मांग चली आ रही थी।
प्रशासक और एडवाइजर के कार्यालय को आरटीआई के दायरे में नहीं लाने के पीछे प्रशासन का तर्क था कि एडवाइजर और प्रशासक कोई अलग से महकमा नहीं देखते हैं। वह सिर्फ विभागों की फाइलों पर अंतिम स्वीकृति प्रदान करते हैं या पालिसी से संबंधी निर्णय लेते हैं। ऐसे में उनके दफ्तरों को आरटीआई के दायरे में नहीं लाया जा सकता। सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत गोस्वामी और आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने इन दोनों के कार्यालय आरटीआई के दायरे में शामिल कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है।
हेमंत गोस्वामी ने चीफ इनफॉर्मेशन ऑफिसर (सीआईसी) के पास इसे लेकर शिकायत की थी, जिसके बाद एडवाइजर और प्रशासक के कार्यालयों को आरटीआई में शामिल करने को कहा गया था। वहीं, बीते 7 अगस्त को इसे लेकर आरके गर्ग ने भी प्रशासन के उच्चाधिकारियों को लेटर लिखा, जिसमें सीआईसी के आर्डर का हवाला दिया गया था। इसमें यह भी कहा गया कि अगर इन दोनों कार्यालयों में सीपीआईओ नहीं लगाए जाते और आरटीआई के दायरे में इन्हें शामिल नहीं किया जाता तो दोबारा सीआईसी के पास इसकी शिकायत भेजी जाएगी।
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आरके गर्ग को प्रशासन की ओर से विजय दशमी के दिन जवाब आया, जिसमें कहा गया कि एडवाइजर और प्रशासक के दफ्तरों और कैंप आफिसों को भी आरटीआई के दायरे में शामिल कर लिया गया है। अगर इनके कार्यालयों से कोई जानकारी मांगता है तो प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी और फाइनेंस सेक्रेटरी के पास आवेदन करना होगा, जो इनसे संबंधित तमाम जानकारी आरटीआई में देंगे।
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प्रशासक और एडवाइजर के कार्यालय को आरटीआई के दायरे में नहीं लाने के पीछे प्रशासन का तर्क था कि एडवाइजर और प्रशासक कोई अलग से महकमा नहीं देखते हैं। वह सिर्फ विभागों की फाइलों पर अंतिम स्वीकृति प्रदान करते हैं या पालिसी से संबंधी निर्णय लेते हैं। ऐसे में उनके दफ्तरों को आरटीआई के दायरे में नहीं लाया जा सकता। सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत गोस्वामी और आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने इन दोनों के कार्यालय आरटीआई के दायरे में शामिल कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है।
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हेमंत गोस्वामी ने चीफ इनफॉर्मेशन ऑफिसर (सीआईसी) के पास इसे लेकर शिकायत की थी, जिसके बाद एडवाइजर और प्रशासक के कार्यालयों को आरटीआई में शामिल करने को कहा गया था। वहीं, बीते 7 अगस्त को इसे लेकर आरके गर्ग ने भी प्रशासन के उच्चाधिकारियों को लेटर लिखा, जिसमें सीआईसी के आर्डर का हवाला दिया गया था। इसमें यह भी कहा गया कि अगर इन दोनों कार्यालयों में सीपीआईओ नहीं लगाए जाते और आरटीआई के दायरे में इन्हें शामिल नहीं किया जाता तो दोबारा सीआईसी के पास इसकी शिकायत भेजी जाएगी।
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आरके गर्ग को प्रशासन की ओर से विजय दशमी के दिन जवाब आया, जिसमें कहा गया कि एडवाइजर और प्रशासक के दफ्तरों और कैंप आफिसों को भी आरटीआई के दायरे में शामिल कर लिया गया है। अगर इनके कार्यालयों से कोई जानकारी मांगता है तो प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी और फाइनेंस सेक्रेटरी के पास आवेदन करना होगा, जो इनसे संबंधित तमाम जानकारी आरटीआई में देंगे।