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जल और वायु प्रदूषित करने वाले उद्योगों पर कसेगा शिकंजा
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चंडीगढ़। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने राज्य में उद्योगों द्वारा जल और वायु प्रदूषित किए जाने के मामलों को गंभीरता से निपटने और दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाने के लिए एक निगरानी कमेटी का गठन कर दिया है। पीपीसीबी के चेयरमैन की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में विभिन्न संबद्ध विभागों को सदस्य बनाया गया है।
जानकारी के अनुसार पीपीसीबी की हाल ही में हुई 186वीं बैठक में उक्त कमेटी के गठन को मंजूरी देने के साथ ही यह फैसला लिया गया कि नवगठित कमेटी प्रदूषण फैलाने के मामलों की जांच करेगी और संबंधित उद्योग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बोर्ड को सिफारिश करेगी। कमेटी की इस सिफारिश के आधार पर संबंधित उद्योग के खिलाफ पर्यावरण कानूनों के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस कमेटी में जिन विभागों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है वे साइंस, टेक्नोलॉजी एवं पर्यावरण विभाग, उद्योग एवं कामर्स विभाग, स्थानीय सरकार विभाग, हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग और श्रम विभाग हैं। इनके अलावा पीपीसीबी के सदस्य सचिव को कमेटी का समन्वयक सदस्य बनाया गया है। कमेटी में शामिल किए गए विभागों से संयुक्त सचिव स्तर से नीचे का कोई अधिकारी इस कमेटी की बैठक में हिस्सा नहीं लेगा।
पीपीसीबी की ओर से कहा गया है कि जिन उद्योगों में पर्यावरण उल्लंघन का मामला सामने आएगा, तो उसे बोर्ड द्वारा उक्त कमेटी को भेजा जाएगा, जो विचार के बाद मामले में अपनी सिफारिश देगी। इसके बाद बोर्ड की ओर से दोषी उद्योग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार पीपीसीबी की हाल ही में हुई 186वीं बैठक में उक्त कमेटी के गठन को मंजूरी देने के साथ ही यह फैसला लिया गया कि नवगठित कमेटी प्रदूषण फैलाने के मामलों की जांच करेगी और संबंधित उद्योग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बोर्ड को सिफारिश करेगी। कमेटी की इस सिफारिश के आधार पर संबंधित उद्योग के खिलाफ पर्यावरण कानूनों के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस कमेटी में जिन विभागों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है वे साइंस, टेक्नोलॉजी एवं पर्यावरण विभाग, उद्योग एवं कामर्स विभाग, स्थानीय सरकार विभाग, हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग और श्रम विभाग हैं। इनके अलावा पीपीसीबी के सदस्य सचिव को कमेटी का समन्वयक सदस्य बनाया गया है। कमेटी में शामिल किए गए विभागों से संयुक्त सचिव स्तर से नीचे का कोई अधिकारी इस कमेटी की बैठक में हिस्सा नहीं लेगा।
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पीपीसीबी की ओर से कहा गया है कि जिन उद्योगों में पर्यावरण उल्लंघन का मामला सामने आएगा, तो उसे बोर्ड द्वारा उक्त कमेटी को भेजा जाएगा, जो विचार के बाद मामले में अपनी सिफारिश देगी। इसके बाद बोर्ड की ओर से दोषी उद्योग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा।
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