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नाना-नानी से मिलकर लिपट गईं गीतांजलि की बच्चियां
Panchkula
Updated Mon, 23 Sep 2013 05:38 AM IST
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पंचकूला। गीतांजलि के माता-पिता के लिए रविवार का दिन थोड़ा सुकून देने वाला रहा। कोर्ट के आदेश पर गीतांजलि की दोनों बेटियों को उनसे मिलवाया गया। दोनों बच्चियों से मिलने के लिए महीनों के इंतजार के बाद जब यह खास पल आया तो ये बच्चियां नाना-नानी से लिपट गईं और नाना-नानी ने भी उन्हें सीने से लगा लिया। यह मुलाकात करीब तीन घंटे तक चली। इस दौरान नाना ओमप्रकाश अग्रवाल और नानी शीलावती अग्रवाल भावुक भी हुईं और प्यार भी बांटा। उन्होंने बच्चियों को तोहफे भी दिए।
यह मुलाकात गीतांजलि के पिता ओमप्रकाश अग्रवाल के एडवोकेट एसके सूद के आवास पर कोर्ट कमिश्नर एडवोकेट अंजू सूरी की देखरेख में हुई। इस दौरान गुड़गांव के पूर्व सीजेएम एवं जगाधरी के लीगल सर्विस अथॉरिटी के सेक्रेटरी रवनीत गर्ग भी मौजूद थे। गत सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश जारी किए थे कि रवनीत गर्ग खुद इन बच्चियों को नाना-नानी से मिलवाएं।
गुड़गांव में मिला था गीतांजलि का शव
17 जुलाई को गीतांजलि का शव गुड़गांव स्थित उनके घर के नजदीक पार्क से बरामद हुआ था। इस मामले में उनके पति हत्या के आरोप से घिरे हैं। फिलहाल यह केस सीबीआई के पास है और गीतांजलि के परिजनों ने दोनों बच्चियों की कस्टडी के लिए कोर्ट में अर्जी डाल रखी है।
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45 मिनट देर से पहुंचीं बच्चियां
कोर्ट की तरफ से मुलाकात का समय दोपहर दो से शाम पांच बजे तक रखा गया था, लेकिन रवनीत गर्ग बच्चियों के साथ 45 मिनट देरी से पहुंचे। पहले तो वह रास्ते में जाम की वजह से लेट हुए। बाद में एडवोकेट एसके सूद के घर के बाहर खड़ी मीडिया से बचने के लिए काफी देर तक गाड़ी से बाहर नहीं आए।
अपने वकील की गाड़ी में आए
रवनीत गर्ग दोनों बेटियों के साथ अपने वकील विशाल गर्ग की कार में आए। विशाल गर्ग कार चला रहे थे, जबकि रवनीत गर्ग पीछे बैठे थे। जहां मुलाकात होनी थी, वहां घर पर पहले से ही गाड़ियां खड़ी थीं। लिहाजा, गर्ग की कार अंदर नहीं जा पा रही थी और वह बाहर सड़क पर उतरना नहीं चाहते थे। इसी कशमकश में करीब ढाई बज चुके थे। गाड़ी वहां से चली गई। इसके बाद घर के अंदर खड़ी गाड़ियों को बाहर निकाला गया। उसके बाद विशाल गर्ग दोबारा कार लेकर आए और सभी सीधे घर के अंदर चले गए। तब तक करीब पौने तीन बज चुके थे।
मीडिया को बरगलाने के लिए भेजी डमी कार
मुलाकात का समय पूरा होने के बाद घर के पिछले दरवाजे से एक कार तेजी से बाहर निकाली गई और एक व्यक्ति ने हाथ बाहर निकालकर बाय-बाय का इशारा किया। दरअसल, मीडिया को बरगलाने के लिए यह डमी कार भेजी गई थी। इसके पांच मिनट बाद रवनीत गर्ग दोनों बेटियों के साथ अपने वकील की गाड़ी में घर के सामने के रास्ते से निकले।
कोट
हमने गीतांजलि के बारे में कोई बात नहीं की। रवनीत गर्ग से न तो हमने कुछ पूछा और न ही कुछ कहा। हमलोग सिर्फ बच्चियों के साथ मशगूल रहे। हमने इन बच्चियों से भी उनकी मां के बारे में कुछ नहीं कहा। पूरा का पूरा समय मासूमों को प्यार देने में लगाया। एक बच्ची थोड़ी सुस्त थी और उसे हल्का बुखार था। दोनों बच्चियों को तोहफे दिए और उन्होंने ड्राइंग भी बनाई। उनसे मिलकर दिल को थोड़ी तसल्ली मिली है। बच्चियों का लालन-पालन हम बेहतर कर सकते हैं और कस्टडी के लिए केस लड़ेंगे।
- ओमप्रकाश अग्रवाल, गीतांजलि के पिता
कोट
मुलाकात के दौरान सब कुछ शांतिपूर्ण रहा। दोनों बच्चियां अपने नाना-नानी से मिलीं। उनके साथ बैठीं और खेली भी। इसके अलावा इस मुलाकात में कुछ नहीं हुआ।
- एडवोकेट अंजू सूरी, कोर्ट कमिश्नर
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यह मुलाकात गीतांजलि के पिता ओमप्रकाश अग्रवाल के एडवोकेट एसके सूद के आवास पर कोर्ट कमिश्नर एडवोकेट अंजू सूरी की देखरेख में हुई। इस दौरान गुड़गांव के पूर्व सीजेएम एवं जगाधरी के लीगल सर्विस अथॉरिटी के सेक्रेटरी रवनीत गर्ग भी मौजूद थे। गत सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश जारी किए थे कि रवनीत गर्ग खुद इन बच्चियों को नाना-नानी से मिलवाएं।
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गुड़गांव में मिला था गीतांजलि का शव
17 जुलाई को गीतांजलि का शव गुड़गांव स्थित उनके घर के नजदीक पार्क से बरामद हुआ था। इस मामले में उनके पति हत्या के आरोप से घिरे हैं। फिलहाल यह केस सीबीआई के पास है और गीतांजलि के परिजनों ने दोनों बच्चियों की कस्टडी के लिए कोर्ट में अर्जी डाल रखी है।
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45 मिनट देर से पहुंचीं बच्चियां
कोर्ट की तरफ से मुलाकात का समय दोपहर दो से शाम पांच बजे तक रखा गया था, लेकिन रवनीत गर्ग बच्चियों के साथ 45 मिनट देरी से पहुंचे। पहले तो वह रास्ते में जाम की वजह से लेट हुए। बाद में एडवोकेट एसके सूद के घर के बाहर खड़ी मीडिया से बचने के लिए काफी देर तक गाड़ी से बाहर नहीं आए।
अपने वकील की गाड़ी में आए
रवनीत गर्ग दोनों बेटियों के साथ अपने वकील विशाल गर्ग की कार में आए। विशाल गर्ग कार चला रहे थे, जबकि रवनीत गर्ग पीछे बैठे थे। जहां मुलाकात होनी थी, वहां घर पर पहले से ही गाड़ियां खड़ी थीं। लिहाजा, गर्ग की कार अंदर नहीं जा पा रही थी और वह बाहर सड़क पर उतरना नहीं चाहते थे। इसी कशमकश में करीब ढाई बज चुके थे। गाड़ी वहां से चली गई। इसके बाद घर के अंदर खड़ी गाड़ियों को बाहर निकाला गया। उसके बाद विशाल गर्ग दोबारा कार लेकर आए और सभी सीधे घर के अंदर चले गए। तब तक करीब पौने तीन बज चुके थे।
मीडिया को बरगलाने के लिए भेजी डमी कार
मुलाकात का समय पूरा होने के बाद घर के पिछले दरवाजे से एक कार तेजी से बाहर निकाली गई और एक व्यक्ति ने हाथ बाहर निकालकर बाय-बाय का इशारा किया। दरअसल, मीडिया को बरगलाने के लिए यह डमी कार भेजी गई थी। इसके पांच मिनट बाद रवनीत गर्ग दोनों बेटियों के साथ अपने वकील की गाड़ी में घर के सामने के रास्ते से निकले।
कोट
हमने गीतांजलि के बारे में कोई बात नहीं की। रवनीत गर्ग से न तो हमने कुछ पूछा और न ही कुछ कहा। हमलोग सिर्फ बच्चियों के साथ मशगूल रहे। हमने इन बच्चियों से भी उनकी मां के बारे में कुछ नहीं कहा। पूरा का पूरा समय मासूमों को प्यार देने में लगाया। एक बच्ची थोड़ी सुस्त थी और उसे हल्का बुखार था। दोनों बच्चियों को तोहफे दिए और उन्होंने ड्राइंग भी बनाई। उनसे मिलकर दिल को थोड़ी तसल्ली मिली है। बच्चियों का लालन-पालन हम बेहतर कर सकते हैं और कस्टडी के लिए केस लड़ेंगे।
- ओमप्रकाश अग्रवाल, गीतांजलि के पिता
कोट
मुलाकात के दौरान सब कुछ शांतिपूर्ण रहा। दोनों बच्चियां अपने नाना-नानी से मिलीं। उनके साथ बैठीं और खेली भी। इसके अलावा इस मुलाकात में कुछ नहीं हुआ।
- एडवोकेट अंजू सूरी, कोर्ट कमिश्नर