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मछलियां खत्म करेंगी मलेरिया के मच्छर

Mon, 17 Jun 2013 05:31 AM IST
Panchkula
Panchkula Updated Mon, 17 Jun 2013 05:31 AM IST
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पंचकूला। स्वास्थ्य विभाग का मलेरिया विंग सेक्टरों के साथ लगती कालोनियाें पर पैनी नजर रखे हुए है। शहर और आसपास बनी झुग्गी-झोपड़ियों, स्लम एरिया, घग्गर पार बनी बस्तियों और कालोनियों में पुख्ता प्रबंधों और मलेरिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच विंग का दावा है कि पिछले साल के मुकाबले मलेरिया मरीजों की संख्या कम से कम 50 फीसदी कम होगी। जनरल अस्पताल सेक्टर छह में पिछले साल के 139 मरीजों के मुकाबले 15 जून तक 30 मरीज पहुंचे हैं। मलेरिया विंग पानी में पनपने वाले मच्छरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लक्षण और बचाव की जानकारी देने में जुटा है। इसके लिए जागरूकता कैंप में सलाह और दवाइयां भी दी जा रही हैं।
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अति संवेदनशील इलाके
शहरी इलाके के साथ जुड़ी स्लम एरिया राजीव कालोनी, इंदिरा कालोनी, बुढ़नपुर, अभयपुर, रैली गांव, रैला गांव, हरिपुर, चंडीमंदिर, घग्गर पार बसे झुग्गी झोपड़ी अति संवेदनशील इलाके हैं। इन्हीं इलाकों से सबसे ज्यादा मलेरिया के मरीज आते हैं। दूसरी ओर रूरल इलाकों में सूरजपुर, रायपुरानी, हंगोला, नारायणगढ़ और बरवाला का पोल्ट्री फार्म एरिया अति संवेदनशील माना जाता है। इसके अलावा मोरनी का टिक्करताल भी अतिसंवेदनशील माना जाता है।
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सेक्टर 19 और 15 भी संवेदनशील
शहर के बीच बसे सेक्टर 15 से भी मलेरिया के मरीज जनरल अस्पताल में पहुंचते हैं। मलेरिया विंग सेक्टर 15 में जहां भी बारिश का गंदा पानी देख रहा है, वहां पर उसकी खास नजर है। सेक्टर 19 के आसपास बारिश में जलभराव और पानी निकासी का सही प्रबंध न होने से मलेरिया के लिए सेंसटिव जोन माना जाता है। दोनों सेक्टर पर मलेरिया विंग की टीम दौरा कर नजर रख रही है।
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गंबुजिया खत्म कर रही लारवा
मलेरिया विंग ने मच्छरों के लारवा को खत्म करने के लिए गंबुजिया प्रजाति की मछलियां मंगवाई है। यह मछली पानी में लारवा परजीवी को खा जाती है। यदि गंबुजिया मछली को पानी में डाल दिया जाए तो लारवा को खत्म कर देती है। पानी के अंदर 10 गंबुजिया मछली डाल दिया जाए तो वह खुद अपनी संख्या बढ़ाती रहती है। कुछ दिनों में उनकी संख्या दस गुना बढ़ जाती है।
पंचकूला सेक्टर-4 के कैकटस गार्डन और अंबर टेक स्थित हुडा ग्राउंड में गंबुजिया की मदर हेचरी बनी हुई है। पिंजौर स्थित प्राइमरी हेल्थ सेंटर में भी इनकी मदर हेचरी है, जहां पर इनके ब्रीड तैयार किए जा रहे हैं।



कोट
इस साल मलेरिया के मरीजों की संख्या 50 फीसदी कम हो जाएगी। जिले के संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों में एकत्रित पानी में गंबुजिया मछलियां डाली जा रही हैं। ये मछलियां मच्छरों के लारवा को खा जाती हैं। इन मछलियों की ब्रीडिंग शहर में ही की जा रही है।
-अनिल एलावादी, मलेरिया विंग इंजार्ज एवं डिप्टी सिविल सर्जन
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