11 साल पुरानी जनसंख्या पर वार्ड बंदी का मुद्दा गरमाया

Panchkula Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। साल 2001 की जनसंख्या के आधार पर होने वाली वार्ड बंदी का मुद्दा गरमा गया है। लोगों का कहना है कि भविष्य की योजना बनाई जा रही है तो हम 11 साल पुरानी जनसंख्या की बुनियाद पर शहर के विकास की ईंट क्यों रखें। इससे न तो जनता का कोई भला होगा और न ही उनके जनप्रतिनिधियों का। पूर्व पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक ही स्वर में कहना है कि लेटेस्ट जनसंख्या के आधार पर ही वार्ड बंदी होनी चाहिए। चाहे तो इसके लिए निकाय विभाग इंतजार कर ले। नगर निगम की ओर से कराए गए सर्वे पर शहरवासियों का यकीन नहीं हो रहा। कई लोगों का तो कहना है कि उनके घर पर सर्वे के लिए कोई टीम आई ही नहीं। इस मुद्दे के बारे में अमर उजाला ने कुछ लोगों से बातचीत कर जानने की कोशिश आखिर वे क्या चाहते हैं?
कोट
जब सरकार नए सिरे से वार्ड बंदी कर रही है तो 11 साल पुरानी जनसंख्या को आधार क्यों बनाया जाए? यदि जनता के प्रतिनिधि कम होंगे तो शहर के काम कैसे होंगे। काम का बोझ भी उसके ऊपर ज्यादा होगा। ऐसे में मेरा तो यही मानना है कि नई जनगणना के आधार पर ही वार्ड बंदी होनी चाहिए।
सुभाष पपनेजा, महासचिव, पंचकूला रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन
------------------------------------------------
यह तो लोगों पर थोपने की बात हो रही है। भारत सरकार ने जब जनगणना पर रुपये फूंके हैं तो उसी को आधार मानकर नए वार्ड का गठन होना चाहिए। मुझे तो यह नहीं मालूम कि नगर निगम की ओर से हो रहे एक डोर टू डोर सर्वे का कोई प्रतिनिधि मेरे घर में आया हो। यदि सर्वे तैयार है तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए।
सीबी गोयल, पूर्व पार्षद वार्ड-4
-------------------------------------------
सरकार की नियत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खुद ही हरियाणा नगर निगम अधिनियम तैयार किया और अब उसी को तोड़-मरोड़ रही है। यदि ज्यादा वार्ड होंगे तो लोगों को ही फायदा होगा। सरकार जनता के हित को नहीं सोच रही, बल्कि अपने हित के लिए जल्दबाजी करने में जुटी है।
विजय कपूर, पूर्व पार्षद वार्ड-6
-----------------------------------------------
वार्ड बंदी तो लेटेस्ट जनसंख्या के आधार पर होनी चाहिए। पंचायती राज का उद्देश्य ही यही था कि छोटे यूनिट को पावर दी जाए। जब 20 हजार लोगों पर एक प्रतिनिधि होगा तो काम तो प्रभावित होगा। इसका सबसे ज्यादा नुकसान लोगों का ही होगा।
मनबीर राठी, एडवोकेट एवं सामाजिक कार्यकर्ता
---------------------------------------
पंजाब और राजस्थान के नगर निगम में ऐसा नियम नहीं है। वहां पर न्यूनतम वार्ड की संख्या 60 है जबकि अधिकतम 100। जब पड़ोसी राज्यों में ऐसा प्रावधान उपलब्ध है तो यहां भी ऐसा होना चाहिए।
-पवन मित्तल, पूर्व पार्षद वार्ड-25
-------------------------------------

Spotlight

Most Read

Delhi NCR

दिल्ली-एनसीआर में दोपहर में हुआ अंधेरा, हल्की बार‌िश से गिरा पारा

पहले धुंध, उसके बाद उमस भरे मौसम और फिर हुई हल्की बारिश ने दिल्ली में हो रहे गणतंत्र दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल में विलेन की भूमिका निभाई।

23 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: हरियाणा में प्यार करने की सजा देख रूह कांप उठेगी

हरियाणा के मेवात से एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक युवक को भरी पंचायत में जूतों से पीटा जा रहा है। युवक का जुर्म दूसरे गांव की लड़की से प्यार करना बताया जा रहा है। पंचायत ने युवक पर 80 हजार रुपये का दंड और पांच जूतों का फरमान सुना था।

18 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper