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गाड़ी की पासिंग में धांधली
Panchkula
Updated Wed, 25 Jul 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। डीसी आफिस स्थित ई दिशा केंद्र में धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है। एजेंट और एक महिला कर्मचारी ने मिलीभगत कर वाहन की कीमत कम दिखाई, जिससे सरकार को टैक्स का नुकसान उठाना पड़ा। इस मामले का खुलासा खुद उसी व्यक्ति ने किया, जिनकी गाड़ी की कम वैल्यू दिखाई गई। उन्हें इस बात का डर था कि यदि कभी मामले का खुलासा हुआ तो जांच की गाज उन पर भी गिरेगी। इसलिए उन्होंने पहले ही एसडीएम दफ्तर जाकर अपनी बात रख दी। एसडीएम ने भी इस मामले की तह तक जाने की कोशिश की और जांच में पता चला कि एजेंट व एक महिला कर्मचारी की मदद से इस धांधली को अंजाम दिया गया है। एजेंट की तलाश तो जारी है, लेकिन महिला कर्मचारी पर भी फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सेक्टर सात निवासी विकास चौधरी ने एसडीएम दफ्तर में दी शिकायत में बताया कि उनकी गाड़ी की कीमत करीब साढ़े नौ लाख थी, लेकिन कर्मचारी और एजेंट ने गाड़ी की कीमत करीब दो लाख रुपये दिखाई। गाड़ी की एक्चुअल कीमत के हिसाब से करीब 36 हजार रुपये टैक्स बनता था, लेकिन एसडीएम दफ्तर से मिली रसीद में सिर्फ 6800 रुपये शो किए गए। इस बात की भनक भी नहीं लगती, यदि गाड़ी मालिक एसडीएम दफ्तर न पहुंचता।
ऐसे हुआ खुलासा
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता किसी से बात कर रहा था, तभी दूसरे व्यक्ति ने पूछ लिया कि गाड़ी पास कराने में उन्होंने कितने रुपये दिए। जब उन्होंने रसीद देखी तो होश उड़ गए। रसीद तो थी 6800 रुपये की, जबकि उन्होंने दिए थे करीब 36 हजार रुपये। दोस्तों ने इस बात पर हैरानी जताई। चूंकि, ई-दिशा केंद्र में फाइल जमा करते वक्त गाड़ी मालिक की तसवीर खींची गई थी, इसलिए उन्हें लगा कि आडिट में वह भी फंस सकते हैं। लिहाजा, वे सीधे एसडीएम दफ्तर पहुंच गए और आपनी बात रखी।
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सुलगते सवाल
क्या पहले भी इसी तरह सरकार को राजस्व का फटका लगाया जाता रहा है?
यदि ऐसा हुआ है तो उसका जिम्मेदार कौन है?
इस मामले में तो गाड़ी मालिक ने ही खुलासा कर दिया, लेकिन पहले यदि ऐसी धांधली हुई है तो उनका खुलासा कैसे होगा?
विभाग गाड़ी के नाम और कीमत के आधार पर रिकार्ड जांचेगी या इस मामले को दबा दिया जाएगा?
नहीं दी जानकारी
भाजपा नेता संजय आहूजा का कहना है कि उन्हें भी इस मामले की भनक लगी थी। इसलिए उन्होंने आरटीआई के तहत 20 सवाल पूछे हैं, लेकिन अब तक एक भी जवाब नहीं आया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
इस मामले पर एसडीएम भी चुप
ई-दिशा केंद्र में इस तरह की धांधली हुई, लेकिन एसडीएम शरणदीप कौर बराड़ ने इस बाबत जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा। एक अफसर होने के नाते उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि मामले की तह तक पहुंचे। इस बाबत जब उनसे बातचीत की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल ही अटेंड नहीं की।
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सेक्टर सात निवासी विकास चौधरी ने एसडीएम दफ्तर में दी शिकायत में बताया कि उनकी गाड़ी की कीमत करीब साढ़े नौ लाख थी, लेकिन कर्मचारी और एजेंट ने गाड़ी की कीमत करीब दो लाख रुपये दिखाई। गाड़ी की एक्चुअल कीमत के हिसाब से करीब 36 हजार रुपये टैक्स बनता था, लेकिन एसडीएम दफ्तर से मिली रसीद में सिर्फ 6800 रुपये शो किए गए। इस बात की भनक भी नहीं लगती, यदि गाड़ी मालिक एसडीएम दफ्तर न पहुंचता।
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ऐसे हुआ खुलासा
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता किसी से बात कर रहा था, तभी दूसरे व्यक्ति ने पूछ लिया कि गाड़ी पास कराने में उन्होंने कितने रुपये दिए। जब उन्होंने रसीद देखी तो होश उड़ गए। रसीद तो थी 6800 रुपये की, जबकि उन्होंने दिए थे करीब 36 हजार रुपये। दोस्तों ने इस बात पर हैरानी जताई। चूंकि, ई-दिशा केंद्र में फाइल जमा करते वक्त गाड़ी मालिक की तसवीर खींची गई थी, इसलिए उन्हें लगा कि आडिट में वह भी फंस सकते हैं। लिहाजा, वे सीधे एसडीएम दफ्तर पहुंच गए और आपनी बात रखी।
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सुलगते सवाल
क्या पहले भी इसी तरह सरकार को राजस्व का फटका लगाया जाता रहा है?
यदि ऐसा हुआ है तो उसका जिम्मेदार कौन है?
इस मामले में तो गाड़ी मालिक ने ही खुलासा कर दिया, लेकिन पहले यदि ऐसी धांधली हुई है तो उनका खुलासा कैसे होगा?
विभाग गाड़ी के नाम और कीमत के आधार पर रिकार्ड जांचेगी या इस मामले को दबा दिया जाएगा?
नहीं दी जानकारी
भाजपा नेता संजय आहूजा का कहना है कि उन्हें भी इस मामले की भनक लगी थी। इसलिए उन्होंने आरटीआई के तहत 20 सवाल पूछे हैं, लेकिन अब तक एक भी जवाब नहीं आया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
इस मामले पर एसडीएम भी चुप
ई-दिशा केंद्र में इस तरह की धांधली हुई, लेकिन एसडीएम शरणदीप कौर बराड़ ने इस बाबत जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा। एक अफसर होने के नाते उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि मामले की तह तक पहुंचे। इस बाबत जब उनसे बातचीत की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल ही अटेंड नहीं की।