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अब इंडस्ट्री पर भी पावर कट की मार
Panchkula
Updated Wed, 25 Jul 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। अब शहर के उद्यमियों पर भी पावर कट की मार पड़ने लगी है। उन्हें मंगलवार को दिन में सिर्फ 45 मिनट बिजली मिली, वो भी दो बार के शेड्यूल में। लगभग दिनभर बिजली गुल रहने के कारण कारोबार लगभग ठप ही रहा। उद्योगपतियों का कहना है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो सरकार को तो नुकसान होगा ही, मजदूरों को रोटी के भी लाले पड़ जाएंगे। जब उद्योगों से उत्पादन ही नहीं होगा तो मजदूरों को तनख्वाह कैसे दी जाएगी। उधर, बिजली निगम के स्थानीय अधिकारी का कहना है कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कट लगाए जा रहे हैं।
हरियाणा चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के एक्स प्रेसिडेंट सीबी गोयल ने बताया कि शुक्रवार से बिजली कट जारी है। 24 घंटे में मात्र एक या दो घंटे बिजली मिल रही है। उद्योगों की मशीन सिर्फ स्टार्ट करने के लिए आधा घंटा लगातार लाइट जरूरी है, लेकिन इतनी बिजली भी नहीं मिल पा रही है। मंगलवार को हालत यह थी कि कई उद्योगपति अपनी फैक्टरी बंद कर चले गए। उन्हें मालूम था कि शाम तक बिजली मिलनी नहीं है। रात में उनके शेड्यूल कट शुरू हो जाएंगे। ऐसे में यहां बैठकर समय बर्बाद करने से कोई फायदा नहीं है।
वहीं, स्थानीय बिजली अधिकारियों का कहना था कि प्रदेश में फिर से बिजली संकट गहरा गया है। इससे उद्योगों पर फिर बिजली कट की मार पड़ने लगी है। उद्योगों से बिजली काटकर घरेलू फीडर को सप्लाई दी जा रही है। हालांकि, इन दलीलों से उद्योगपति बिल्कुल इत्तफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि उद्योगों की बिजली काटकर खेतों या घरेलू फीडर में बिजली देना कोई लॉजिकल बात नहीं है। इससे प्रदेश का ही नुकसान होगा। यदि सरकार ने राहत के लिए जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया तो सरकार के साथ उद्योगपतियों और मजदूरों को भी काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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हरियाणा चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के एक्स प्रेसिडेंट सीबी गोयल ने बताया कि शुक्रवार से बिजली कट जारी है। 24 घंटे में मात्र एक या दो घंटे बिजली मिल रही है। उद्योगों की मशीन सिर्फ स्टार्ट करने के लिए आधा घंटा लगातार लाइट जरूरी है, लेकिन इतनी बिजली भी नहीं मिल पा रही है। मंगलवार को हालत यह थी कि कई उद्योगपति अपनी फैक्टरी बंद कर चले गए। उन्हें मालूम था कि शाम तक बिजली मिलनी नहीं है। रात में उनके शेड्यूल कट शुरू हो जाएंगे। ऐसे में यहां बैठकर समय बर्बाद करने से कोई फायदा नहीं है।
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वहीं, स्थानीय बिजली अधिकारियों का कहना था कि प्रदेश में फिर से बिजली संकट गहरा गया है। इससे उद्योगों पर फिर बिजली कट की मार पड़ने लगी है। उद्योगों से बिजली काटकर घरेलू फीडर को सप्लाई दी जा रही है। हालांकि, इन दलीलों से उद्योगपति बिल्कुल इत्तफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि उद्योगों की बिजली काटकर खेतों या घरेलू फीडर में बिजली देना कोई लॉजिकल बात नहीं है। इससे प्रदेश का ही नुकसान होगा। यदि सरकार ने राहत के लिए जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया तो सरकार के साथ उद्योगपतियों और मजदूरों को भी काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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