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जम्मू सेक्स स्कैंडल
Updated Thu, 31 May 2018 02:55 AM IST
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जेएंडके सेक्स स्कैंडल........
एक पीड़िता की गवाही ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
- तीन पीड़िताएं मुकरीं, अकेली एक ने दिए थे सभी के खिलाफ बयान
अमरीश शर्मा
चंडीगढ़। साल 2006 में सामने आए जेएंडके सेक्स स्कैंडल की जांच के दौरान सीबीआई को केस में चार पीड़िताएं मिलीं। केस में कई हाईप्रोफाइल लोग जुड़े हुए थे। इस वजह से ट्रायल के दौरान सभी पीड़िताओं को जान का खतरा था। शायद इसी का नतीजा था कि पूरी सुरक्षा देने के बावजूद तीन पीड़िताएं ट्रायल के दौरान मुकर गई थीं, लेकिन एक नाबालिग ने सभी दोषियों के खिलाफ खुलकर गवाही दी। उसी नाबालिग पीड़िता की गवाही ही बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर (एनकाउंटर स्पेशलिस्ट), शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद और शब्बीर अहमद लान्गू को दोषी करार देने में अहम साबित हुई। हालांकि, तत्कालीन एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और व्यापारी मेहराजुद्दीन मलिक को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जिस समय एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी को गिरफ्तार किया गया था, उस समय उनका नाम हाईकोर्ट जज के लिए प्रस्तावित किया गया था।
सीबीआई ने केस की जांच के दौरान नौ लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला को मास्टरमाइंड बताया था। हालांकि, केस के ट्रायल के दौरान दोनों की मौत हो गई। सीबीआई के अनुसार यह दोनों वेश्यावृत्ति के लिए दोषियों और आरोपियों को लड़कियां सप्लाई करते थे। इसके बाद सीबीआई ने उनकी निशानदेही पर एक-एक कर सभी आरोपियों/दोषियों को गिरफ्तार किया था। सिर्फ एक आरोपी एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी गिरफ्तारी से पहले फरार हो गया था। हालांकि, बाद में उसने सीजेएम कोर्ट श्रीनगर में सरेंडर कर दिया था।
बाक्स-1
पीड़िता को 200 से 300 रुपये मिलते थे
अदालत में दिए बयान में पीड़िता ने कहा था कि, वह एक राजमिस्त्री की बेटी है। उसकी मां घर पर ही एंब्रायड्री का काम करती थी। उसके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे। उनकी कोई नियमित कमाई नहीं थी, लेकिन दोनों की कमाई से घर का खर्च चल जाता था। पीड़िता के अनुसार उसे सबीना ने वेश्यावृति में धकेला था। इसके लिए वह उसे 200-300 रुपये ही देती थी। वहीं, कई बार तो वह उसे पैसे भी नहीं देती थी। पैसे मांगने पर वह उसे धमकाती थी कि अगर उसने पैसे मांगे तो वह उसके वीडियो वायरल कर देगी। उसकी मां कभी-कभी सबीना के घर पर काम भी करती थी। पीड़िता के बयान के अनुसार कई बार दोषियों ने उसके साथ दुराचार भी किया। दो दोषियों ने तो उसका वीडियो भी बनाया था। इसके बाद वह उसे वही वीडियो दिखाकर उसे वायरल करने के नाम पर उसे धमकाकर उससे दुराचार करते थे।
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बाक्स-2
पीड़िता और गवाहों की पहचान छिपाने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल
मामले में पीड़िता नाबालिग थी और सभी आरोपी हाईप्रोफाइल। इसलिए केस में गवाही के दौरान इसका खास ध्यान रखा गया। केस की अधिकतर सुनवाई बंद कमरे में हुई। वहीं पीड़िता और सरकारी गवाहों के नाम उजागर न हो, इसके लिए तक सीबीआई ने चार्जशीट में उनके नाम की जगह कोड वर्ड का इस्तेमाल किया। पीड़िता की जान को खतरा देखते हुए उसे सीबीआई ने सुरक्षा मुहैया करवाई थी।
बाक्स-3
किसी के चेहरे पर निराशा तो किसी के खुशी के आंसू
सीबीआई अदालत की ओर से मामले में फैसला सुनाए जाते समय जब अदालत ने दोषियों को आईटी एक्ट और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 3, 4, 5 के तहत बरी किया तो उनके चेहरों पर सुकून था, लेकिन जैसे ही अदालत ने पांच को आरपीसी की धारा 376 के तहत दोषी करार दिया तो वह एकदम से सकते में आ गए। इसके बाद अदालत ने उन्हें कस्टडी में लेने के आदेश दिए तो उनके चेहरों पर निराशा छा गई। अदालत से बरी होने के बाद एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और मेहराजुद्दीन की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। दोनों परिचितों को गले लगकर अपनी खुशी को बांटते दिखे।
टाइम लाइन
14 मार्च 2006 : जम्मू पुलिस ने नाबालिग लड़की का पोर्न वीडियो वायरल होने के बाद आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर छह लोगों को गिरफ्तार किया।
09 मई 2006: केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर केस को सीबीआई नई दिल्ली को ट्रांसफर किया।
10 मई 2006: सीबीआई ने अपने स्तर पर केस दर्ज किया।
21 मई 2006: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज करवाए। साथ ही मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में आरोपियों की शिनाख्त की।
25 सितंबर 2006: केस का ट्रायल चंडीगढ़ जिला अदालत में शुरू हुआ।
19 मार्च 2007: सभी नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय।
21 मार्च 2007: आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू
30 मई 2018 : पूर्व डीआईजी और डीएसपी समेत पांच दोषी करार, दो बरी। सजा पर फैसला 4 जून को।
दोषी करार होने के बाद भी रौब नहीं हुआ कम
सीबीआई की विशेष अदालत की ओर से पूर्व डीआईजी बीएसएफ केसी पाड़ी और जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर को दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत ने पुलिस कस्टडी में लेने के आदेश दे दिए। सीबीआई कर्मियों ने उन्हें कस्टडी में लेना चाहा तो वह मोबाइल लेकर कॉल करने लगे। इस पर उन्हें रोका गया तो डीआईजी उन्हें अपने पद का रौब दिखाते रहे। वहीं, डीएसपी भी खुद को ‘एसपी हूं एसपी’ कहते हुए सीबीआई कर्मियों पर दबाव बनाने का प्रयास करने लगे। इस पर सीबीआई कर्मियों ने अदालत के फैसले के बाद उन्हें सिर्फ दोषी बताया और उन्हें कस्टडी में ले लिया।
बाक्स
डीएसपी और होटल मालिक हाल ही में हुए थे बरी
सीबीआई की विशेष अदालत ने सप्लीमेंटरी मामले में तत्कालीन डीएसपी श्रीनगर मोहम्मद मीर युसूफ को सबूतों अभाव में इसी साल फरवरी में बरी किया था। मीर पर मुख्य आरोपी सबीना और उसके पति द्वारा चलाए जा रहे सेक्स रैकेट की एक नाबालिग के यौन शोषण का आरोप लगा था। ट्रायल के दौरान पीड़िता के बयान से मुकरने के बाद अदालत ने मीर युसूफ को बरी कर दिया था। वहीं पिछले साल अदालत मामले में आरोपी होटल मालिक रियाज अहमद कावा को भी सबूतों के अभाव में बरी कर चुकी है। होटल मालिक रियाज पर होटल में देह व्यापार करने का आरोप था। सीबीआई ने उसके खिलाफ अनैतिक तस्करी अधिनियम की रोकथाम के धारा 3 के तहत केस दर्ज किया था।
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एक पीड़िता की गवाही ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
- तीन पीड़िताएं मुकरीं, अकेली एक ने दिए थे सभी के खिलाफ बयान
अमरीश शर्मा
चंडीगढ़। साल 2006 में सामने आए जेएंडके सेक्स स्कैंडल की जांच के दौरान सीबीआई को केस में चार पीड़िताएं मिलीं। केस में कई हाईप्रोफाइल लोग जुड़े हुए थे। इस वजह से ट्रायल के दौरान सभी पीड़िताओं को जान का खतरा था। शायद इसी का नतीजा था कि पूरी सुरक्षा देने के बावजूद तीन पीड़िताएं ट्रायल के दौरान मुकर गई थीं, लेकिन एक नाबालिग ने सभी दोषियों के खिलाफ खुलकर गवाही दी। उसी नाबालिग पीड़िता की गवाही ही बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर (एनकाउंटर स्पेशलिस्ट), शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद और शब्बीर अहमद लान्गू को दोषी करार देने में अहम साबित हुई। हालांकि, तत्कालीन एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और व्यापारी मेहराजुद्दीन मलिक को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जिस समय एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी को गिरफ्तार किया गया था, उस समय उनका नाम हाईकोर्ट जज के लिए प्रस्तावित किया गया था।
सीबीआई ने केस की जांच के दौरान नौ लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला को मास्टरमाइंड बताया था। हालांकि, केस के ट्रायल के दौरान दोनों की मौत हो गई। सीबीआई के अनुसार यह दोनों वेश्यावृत्ति के लिए दोषियों और आरोपियों को लड़कियां सप्लाई करते थे। इसके बाद सीबीआई ने उनकी निशानदेही पर एक-एक कर सभी आरोपियों/दोषियों को गिरफ्तार किया था। सिर्फ एक आरोपी एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी गिरफ्तारी से पहले फरार हो गया था। हालांकि, बाद में उसने सीजेएम कोर्ट श्रीनगर में सरेंडर कर दिया था।
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पीड़िता को 200 से 300 रुपये मिलते थे
अदालत में दिए बयान में पीड़िता ने कहा था कि, वह एक राजमिस्त्री की बेटी है। उसकी मां घर पर ही एंब्रायड्री का काम करती थी। उसके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे। उनकी कोई नियमित कमाई नहीं थी, लेकिन दोनों की कमाई से घर का खर्च चल जाता था। पीड़िता के अनुसार उसे सबीना ने वेश्यावृति में धकेला था। इसके लिए वह उसे 200-300 रुपये ही देती थी। वहीं, कई बार तो वह उसे पैसे भी नहीं देती थी। पैसे मांगने पर वह उसे धमकाती थी कि अगर उसने पैसे मांगे तो वह उसके वीडियो वायरल कर देगी। उसकी मां कभी-कभी सबीना के घर पर काम भी करती थी। पीड़िता के बयान के अनुसार कई बार दोषियों ने उसके साथ दुराचार भी किया। दो दोषियों ने तो उसका वीडियो भी बनाया था। इसके बाद वह उसे वही वीडियो दिखाकर उसे वायरल करने के नाम पर उसे धमकाकर उससे दुराचार करते थे।
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पीड़िता और गवाहों की पहचान छिपाने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल
मामले में पीड़िता नाबालिग थी और सभी आरोपी हाईप्रोफाइल। इसलिए केस में गवाही के दौरान इसका खास ध्यान रखा गया। केस की अधिकतर सुनवाई बंद कमरे में हुई। वहीं पीड़िता और सरकारी गवाहों के नाम उजागर न हो, इसके लिए तक सीबीआई ने चार्जशीट में उनके नाम की जगह कोड वर्ड का इस्तेमाल किया। पीड़िता की जान को खतरा देखते हुए उसे सीबीआई ने सुरक्षा मुहैया करवाई थी।
बाक्स-3
किसी के चेहरे पर निराशा तो किसी के खुशी के आंसू
सीबीआई अदालत की ओर से मामले में फैसला सुनाए जाते समय जब अदालत ने दोषियों को आईटी एक्ट और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 3, 4, 5 के तहत बरी किया तो उनके चेहरों पर सुकून था, लेकिन जैसे ही अदालत ने पांच को आरपीसी की धारा 376 के तहत दोषी करार दिया तो वह एकदम से सकते में आ गए। इसके बाद अदालत ने उन्हें कस्टडी में लेने के आदेश दिए तो उनके चेहरों पर निराशा छा गई। अदालत से बरी होने के बाद एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और मेहराजुद्दीन की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। दोनों परिचितों को गले लगकर अपनी खुशी को बांटते दिखे।
टाइम लाइन
14 मार्च 2006 : जम्मू पुलिस ने नाबालिग लड़की का पोर्न वीडियो वायरल होने के बाद आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर छह लोगों को गिरफ्तार किया।
09 मई 2006: केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर केस को सीबीआई नई दिल्ली को ट्रांसफर किया।
10 मई 2006: सीबीआई ने अपने स्तर पर केस दर्ज किया।
21 मई 2006: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज करवाए। साथ ही मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में आरोपियों की शिनाख्त की।
25 सितंबर 2006: केस का ट्रायल चंडीगढ़ जिला अदालत में शुरू हुआ।
19 मार्च 2007: सभी नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय।
21 मार्च 2007: आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू
30 मई 2018 : पूर्व डीआईजी और डीएसपी समेत पांच दोषी करार, दो बरी। सजा पर फैसला 4 जून को।
दोषी करार होने के बाद भी रौब नहीं हुआ कम
सीबीआई की विशेष अदालत की ओर से पूर्व डीआईजी बीएसएफ केसी पाड़ी और जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर को दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत ने पुलिस कस्टडी में लेने के आदेश दे दिए। सीबीआई कर्मियों ने उन्हें कस्टडी में लेना चाहा तो वह मोबाइल लेकर कॉल करने लगे। इस पर उन्हें रोका गया तो डीआईजी उन्हें अपने पद का रौब दिखाते रहे। वहीं, डीएसपी भी खुद को ‘एसपी हूं एसपी’ कहते हुए सीबीआई कर्मियों पर दबाव बनाने का प्रयास करने लगे। इस पर सीबीआई कर्मियों ने अदालत के फैसले के बाद उन्हें सिर्फ दोषी बताया और उन्हें कस्टडी में ले लिया।
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डीएसपी और होटल मालिक हाल ही में हुए थे बरी
सीबीआई की विशेष अदालत ने सप्लीमेंटरी मामले में तत्कालीन डीएसपी श्रीनगर मोहम्मद मीर युसूफ को सबूतों अभाव में इसी साल फरवरी में बरी किया था। मीर पर मुख्य आरोपी सबीना और उसके पति द्वारा चलाए जा रहे सेक्स रैकेट की एक नाबालिग के यौन शोषण का आरोप लगा था। ट्रायल के दौरान पीड़िता के बयान से मुकरने के बाद अदालत ने मीर युसूफ को बरी कर दिया था। वहीं पिछले साल अदालत मामले में आरोपी होटल मालिक रियाज अहमद कावा को भी सबूतों के अभाव में बरी कर चुकी है। होटल मालिक रियाज पर होटल में देह व्यापार करने का आरोप था। सीबीआई ने उसके खिलाफ अनैतिक तस्करी अधिनियम की रोकथाम के धारा 3 के तहत केस दर्ज किया था।