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अनुव्रत के साथ समाज जुड़ा है: सोलंकी
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:51 AM IST
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अणुव्रत के साथ समाज जुड़ा है : सोलंकी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अनुव्रत के साथ समाज जुड़ा है। आचार्य तुलसी का अणुव्रत आंदोलन गुरुदेव तुलसी के बाद भी आज विशेष रूप से कार्यरत है। इस आंदोलन के साथ समाज जुड़ा है। समाज के साथ जब जुड़ाव होता है तब आंदोलन कभी मृत नहीं होता। सचमुच में अणुव्रत के साथ जन-जन का जुड़ाव है। यह प्रसन्नता की बात है। यह बात हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने शुक्रवार को राजभवन में मुनि विनय कुमार आलोक से विचार विमर्श करते हुए कही।
सोलंकी ने मुनि विनय कुमार आलोक को कहा कि आप हमेशा ही कुछ नया करने की सोचते हैं। यह पुरुषार्थ का प्रतीक है। हर व्यक्ति पहले तो सोच नहीं सकता। सोचता है तो क्रियान्वित करने में असफल रहता है। क्योंकि उसके सामने लक्ष्य स्पष्ट नहीं होता। बिना स्पष्टता के कार्य सिद्धि तक नहीं पहुंचता। अणुव्रत आंदोलन की पूरे देश में चर्चा होती है क्योंकि आंदोलन अनेक हुए पर व्यक्ति के साथ ही आंदोलन समाप्त हो गए।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अनुव्रत के साथ समाज जुड़ा है। आचार्य तुलसी का अणुव्रत आंदोलन गुरुदेव तुलसी के बाद भी आज विशेष रूप से कार्यरत है। इस आंदोलन के साथ समाज जुड़ा है। समाज के साथ जब जुड़ाव होता है तब आंदोलन कभी मृत नहीं होता। सचमुच में अणुव्रत के साथ जन-जन का जुड़ाव है। यह प्रसन्नता की बात है। यह बात हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने शुक्रवार को राजभवन में मुनि विनय कुमार आलोक से विचार विमर्श करते हुए कही।
सोलंकी ने मुनि विनय कुमार आलोक को कहा कि आप हमेशा ही कुछ नया करने की सोचते हैं। यह पुरुषार्थ का प्रतीक है। हर व्यक्ति पहले तो सोच नहीं सकता। सोचता है तो क्रियान्वित करने में असफल रहता है। क्योंकि उसके सामने लक्ष्य स्पष्ट नहीं होता। बिना स्पष्टता के कार्य सिद्धि तक नहीं पहुंचता। अणुव्रत आंदोलन की पूरे देश में चर्चा होती है क्योंकि आंदोलन अनेक हुए पर व्यक्ति के साथ ही आंदोलन समाप्त हो गए।
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