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590 करोड़ का घोटाला: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के निलंबित कर्मियों से खुलेंगे राज, फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश

Sat, 28 Feb 2026 09:53 AM IST
Nivedita दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला Published by: Nivedita Updated Sat, 28 Feb 2026 09:53 AM IST
सार

विजिलेंस अब तक इस मामले में 20 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है। बीते 36 घंटों में प्रदेशभर के 10 स्थानों पर छापे मारे हैं। जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों ने अभी तक किसी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

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590 crore scam Suspended IDFC First Bank employees to reveal secrets forensic audit ordered
बैंक फ्राड में पकड़े गए आरोपी - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ के घोटाले के मामले में हरियाणा विजिलेंस ने जांच का दायरा और तेज कर दिया है। शुक्रवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के चार निलंबित कर्मचारियों को पूछताछ के लिए शामिल किया गया। 

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ये कर्मचारी फरवरी में हरियाणा सरकार के खातों से अनधिकृत और फर्जी तरीके से किए गए लेन-देन में कथित रूप से लिप्त पाए गए थे।

सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान एक महत्वपूर्ण ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जो आरोपियों और संदिग्ध अधिकारियों के बीच संपर्क को लेकर जांच को नई दिशा दे सकती है। इसके अलावा दोनों बैंकों से मूल रिकॉर्ड (ओरिजनल दस्तावेज) भी तलब किए गए हैं।

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20 से ज्यादा लोगों से पूछताछ, 10 स्थानों पर छापे

विजिलेंस अब तक 20 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है। बीते 36 घंटों में प्रदेशभर के 10 स्थानों पर छापे मारे हैं। जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों ने अभी तक किसी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं।

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सीसीटीवी फुटेज और फर्जी दस्तावेजों की जांच जारी

विजिलेंस टीम ने रिमांड पर चल रहे दोनों मुख्य आरोपियों ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि और पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय—को आमने-सामने बैठाकर उन संदिग्ध खातों की पुष्टि कराई, जिनमें करोड़ों रुपये के लेन-देन हुए। बैंक की ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच जारी है। जांच में कई फर्जी दस्तावेज भी सामने आए हैं, जिन्हें आरोपियों द्वारा बैंकों में प्रस्तुत किया गया था। अब यह पता लगाया जा रहा है कि ये दस्तावेज कहां तैयार किए गए और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

सरकारी विभागों तक पहुंची जांच

विजिलेंस की जांच अब उन सरकारी विभागों तक पहुंच चुकी है, जिनकी एफडी बैंकों में जमा थीं। इन एफडी से जुड़े लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस भेजकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

चंडीगढ़ पुलिस भी कर सकती है पूछताछ

मामले में चंडीगढ़ पुलिस की एंट्री भी हो सकती है। रिभव ऋषि और अभय के अलावा स्वाति सिंगला और उसके भाई अभिषेक सिंगला भी पुलिस रिमांड पर हैं। सेक्टर-32 स्थित बैंक शाखा में हुए लेन-देन से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। चंडीगढ़ पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर साक्ष्यों को और मजबूत कर सकती है।

फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच के लिए एक एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया में वित्तीय अभिलेखों की विस्तृत जांच की जाती है, ताकि धोखाधड़ी और गबन से जुड़े ठोस साक्ष्य जुटाए जा सकें। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे संभव माने जा रहे हैं।

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