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Panchkula News: बाढ़ में बही 5300 एकड़ जमीन, एक लाख एकड़ जमीन के मालिक खोज रहे खेत

Fri, 24 Oct 2025 09:57 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 24 Oct 2025 09:57 PM IST
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5300 acres of land was washed away in the flood
सुरिंदर पाल
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जालंधर। अगस्त और सितंबर 2025 में पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ ने 23 में से 18 जिलों को प्रभावित किया, जिनमें गुरदासपुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक था।
जिले की लगभग 60,000 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई, जिसके परिणामस्वरूप धान, गन्ना, मक्का और चारे जैसी खड़ी फसलें नष्ट हो गईं, और विभिन्न स्थानों पर 1 से 3 फीट तक की रेत और गाद जमा हो गई। वहीं, पंजाब के 15 जिलों में तो 5300 एकड़ खेतीबाड़ी जमीन दरिया में समा गई। सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों की विशेष गिरदावरी पूरी करने के बाद (कुल 5307 एकड़) यह आंकड़ा सामने आया है।
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डेरा बाबा नानक और फतेहगढ़ चूड़ियां सहित सबसे ज्यादा प्रभावित ब्लॉकों में, 90 फीसदी से ज्यादा कृषि क्षेत्र को नुकसान हुआ। इस आपदा ने न केवल खरीफ उत्पादन को प्रभावित किया है, बल्कि आगामी रबी सीजन के लिए गेहूं की समय पर बुवाई को भी खतरे में डाल दिया है। भारत के सीमावर्ती क्षेत्र अमृतसर में 1515 एकड़, फिरोजपुर 1101 एकड़, गुरदासपुर में 544 एकड़ खेत गायब हो गए।
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बह गई ज्यादातर जमीन निजी स्वामित्व वाली थी। तरनतारन जिले में, भलोजाला और हरिके के बीच लगभग 50 गांवों की जमीन का एक हिस्सा ब्यास नदी की तलहटी में और हरिके और मुठियांवाला के बीच सतलुज नदी की तलहटी में पड़ता है। चूंकि यह जमीन काफी सस्ती है और पहले कभी बाढ़ का खतरा इतना गंभीर नहीं रहा, इसलिए कई लोग इस जमीन को खरीदना एक अच्छा निवेश मानते हैं।
बाढ़ आई तो इस जमीन का एक हिस्सा बह गया। पानी उतरने के बाद खेतों का ऐसा हाल हो गया है कि किसान अपनी जमीन तक नहीं तलाश पा रहे। पानी में बहकर आई रेत और गाद के कारण एक लाख एकड़ से ज्यादा जमीन की निशानदेही पूरी तरह से खत्म हो गई है। किसानों के बीच बड़ी उलझन इस बात की है कि उनका खेत कौन सा है। दो माह से बाढ़ की आफत झेल रहे किसान अब अपने खेत को ढूंढने की जद्दोजेहद में लगे हैं। निशानदेही खत्म होने से सीमांकन विवाद के बढ़ने की आशंका बढ़ रही है, इसका सीधा असर राजस्व विभाग पर देखने को मिल सकता है।

किसान नेता बलवंत सिंह ने कहा बाढ़ ने पंजाब में बहुत नुकसान किया है। खेतों की निशानदेही पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। 5300 एकड़ खेतीबाड़ी की जमीन का अता-पता ही नहीं है। यह जमीन दरिया में समा गई है। एक लाख एकड़ कृषि भूमि में बाढ़ का पानी जमा हो जाने से उसमें रेत और गाद भर गई है। किसानों की हालत यह है कि वह अपने खेतों की पहचान तक नहीं कर पा रहे। पठानकोट के बमियाल के किसान मेजर सिंह, जिनकी आठ एकड़ जमीन उझ नदी में बह गई, ने कहा कि मुआवजा देने की नीति पर फिर से विचार करने की जरूरत है क्योंकि उनके जैसे किसान अब तीन-चार साल तक खेती नहीं कर पाएंगे।
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