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खर्राटे : चैन से सोना है तो डाक्टर को दिखाओ
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खर्राटे : चैन से सोना है तो डाक्टर को दिखाओ
खर्राटे मारने के दौरान अधिकतर लोगों की सांस रुकती है
विश्व स्लीप डे पर पीजीआई के डाक्टरों ने दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। खर्राटे कभी भी पार्टनर को चैन से सोने नहीं देते। लोग समझते हैं कि खर्राटे मारने वाला अच्छी नींद लेता है, लेकिन यह गलतफहमी है। खर्राटे के दौरान 60-70 फीसदी लोग सांस रोक लेते हैं। कई तो ऐसे हैं, जो एक घंटे में 60 से ज्यादा बार सांस रोकते हैं। इससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है। खर्राटे लेने वाले इस बात से अंजान रहते हैं। सांस रुकने के लक्षण को चिकित्सा भाषा में आब्स्ट्रेक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) कहते हैं। वर्ल्ड स्लीप डे के मौके पर पीजीआई के ओटोलेटिंजोलाजी डिपार्टमेंट के डाक्टर संदीप बंसल ने बताया कि हर ओएसए से पीड़ित व्यक्ति को खर्राटे जरूर आते होंगे। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि जिसे खर्राटे आते हैं, उसे ओएसए हो। यह जरूर है कि खर्राटे आ रहे हैं तो बिना देर किए ईएनटी विशेषज्ञ से मिले। इसका इलाज उपलब्ध है।
क्यों आते हैं खर्राटे
1. खर्राटे की बड़ी वजह मोटापा है। मोटापे से सांस की नली सिकुड़ती है। जब सांस सिकुड़ी नली से गुजरती है तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं, जिससे खर्राटे आते हैं।
2. नाक में कफ, संक्रमण, नाक की हड्डी का बढ़ना या श्वासमार्ग के अवरोध के कारण भी खर्राटे आ सकते हैं।
3. गले की तकलीफ से भी खर्राटे आ सकते हैं। कई बार गले में खराश, कफ का जम जाना, टांसिल में सूजन व संक्रमण भी खर्राटे की वजह बनते हैं।
4. उम्र का बढ़ना भी एक कारण है। उम्र के साथ गले के टिश्यू कमजोर होते हैं। इससे अधिक कंपन होते और खर्राटे आने लगते हैं।
5. कई बार सांस लेने वाली नली संकरी और कमजोर होती है। जब सांस लेते हैं तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं। इससे खर्राटे आते हैं।
6. सोने से पहले अधिक शराब पीने या नींद की दवा लेने से भी खर्राटे आने की संभावना बढ़ती है।
7. धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में खर्राटे लेने की संभावना सामान्य व्यक्तियों से ज्यादा होती है। धूम्रपान से सांस की नली में सूजन आती है इससे श्वास मार्ग संकरा होता और खर्राटे आने लगते हैं।
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8. कई लोग पीठ के बल सोते हैं। इस तरह से सोने से गले के स्नायु शिथिल पड़ते हैं और सांस की नली में रुकावट बनती है। इससे खर्राटे आना चालू होते हैं।
ऐसे की जाती है जांच
खर्राटे के दौरान सांस रुकने की जांचने के लिए पालीसिम्नोग्राफी (पीएसजी) टेस्ट किया जाता है। यह एक प्रकार स्लीप स्टडी होती है। जांच के लिए मरीज को स्लीप लैब में सुलाया जाता है और उसे मॉनिटर किया जाता है। यदि एक घंटे में 0-5 बार सांस रुकती है तो कोई घबराने वाली बात नहीं है। यदि 5-15 बार रुकती है तो खतरा बढ़ने लगता है। इसमें पेशेंट को लाइफ स्टाइल मोडिफिकेशन, वेट मैनेजमेंट व उसके पोश्चर को ठीक कर बीमारी से राहत दिला दी जाती है। यदि 15-30 और 30 से ज्यादा बार एक घंटे में सांस रुक रही है तो यह जिंदगी के लिए खतरनाक हो सकता है।
सांस रुकने से क्या होता है
सांस लेने में बार-बार रुकावट होने पर शरीर में आक्सीजन का लेवल कम हो जाता है, जिससे बीपी बढ़ जाता है। सांस रुकने से हार्ट ज्यादा तेजी से पंप करता है। इससे साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। इससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। इसमें लक्षण भी सामने नहीं आते। आक्सीजन के साथ कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा ज्यादा होने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है। इससे स्ट्रोक्स की आशंका बढ़ती है। सांस रुकने से व्यक्ति रात में सोता नहीं। कुछ-कुछ अंतराल में नींद खुलती रहती है। इससे वह दिन के वक्त सोता है। कई बार तो लोग कुर्सी में बैठते हैं और सो जाते हैं। नींद पूरी नहीं होने से चिड़चिड़ापन भी आता है। कई बार लोग ड्राइविंग के वक्त झपकी लेते हैं। इससे एक्सीडेंट का खतरा रहता है।
क्या है इलाज
1. पीजीआई के मुताबिक सबसे पहले लोगों को वजन कम करने को कहा जाता है। ऐसी स्टडीज है कि पांच किलो वजन कम होने से 30 फीसदी खर्राटे कम हो जाते हैं।
2. ये एक विशेष प्रकार का उपकरण होता है, जो रात के वक्त व्यक्ति को लगाकर सोना पड़ता है। इससे सांस की नली का अवरोध रुक जाता है, लेकिन इसमें दिक्कत यह होती है कि इसे हमेशा लगाना होगा।
3. समस्या गंभीर होने पर सर्जरी के ऑप्शन के बारे में सोचा जा सकता है। सर्जरी से पहले टेस्ट किया जाता है, जिसे ड्रग-इंडयूस्ड स्लीप इंडोस्कोपी कहते हैं। इसमें मरीज को नींद आने की दवा दी जाती है और पता करते हैं कहां-कहां सांस रुक रही है। उसके बाद आपरेशन किया जाता है।
खर्राटों से बचने के लिए क्या करें
1. समय रहते वजन काबू करें।
2. गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब जैसे नशे से दूर रहे।
3. यदि ब्लड प्रेशर 120-80 से अधिक है तो डाक्टर से जांच करवाकर उसे नियंत्रित करें।
4. सोने से पहले तीखा और भारीभरकम भोजन न करें।
5. दिन में कम से तीन से चार लीटर पानी पीएं।
बच्चों में खर्राटे का कारण
एडेनॉइड्स (नाक के पीछे मांस का बढ़ना)।
जीभ का मोटी होना।
जुकाम व हड्डी टेढ़ी होने से नाक में रुकावट ।
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खर्राटे मारने के दौरान अधिकतर लोगों की सांस रुकती है
विश्व स्लीप डे पर पीजीआई के डाक्टरों ने दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। खर्राटे कभी भी पार्टनर को चैन से सोने नहीं देते। लोग समझते हैं कि खर्राटे मारने वाला अच्छी नींद लेता है, लेकिन यह गलतफहमी है। खर्राटे के दौरान 60-70 फीसदी लोग सांस रोक लेते हैं। कई तो ऐसे हैं, जो एक घंटे में 60 से ज्यादा बार सांस रोकते हैं। इससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है। खर्राटे लेने वाले इस बात से अंजान रहते हैं। सांस रुकने के लक्षण को चिकित्सा भाषा में आब्स्ट्रेक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) कहते हैं। वर्ल्ड स्लीप डे के मौके पर पीजीआई के ओटोलेटिंजोलाजी डिपार्टमेंट के डाक्टर संदीप बंसल ने बताया कि हर ओएसए से पीड़ित व्यक्ति को खर्राटे जरूर आते होंगे। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि जिसे खर्राटे आते हैं, उसे ओएसए हो। यह जरूर है कि खर्राटे आ रहे हैं तो बिना देर किए ईएनटी विशेषज्ञ से मिले। इसका इलाज उपलब्ध है।
क्यों आते हैं खर्राटे
1. खर्राटे की बड़ी वजह मोटापा है। मोटापे से सांस की नली सिकुड़ती है। जब सांस सिकुड़ी नली से गुजरती है तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं, जिससे खर्राटे आते हैं।
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2. नाक में कफ, संक्रमण, नाक की हड्डी का बढ़ना या श्वासमार्ग के अवरोध के कारण भी खर्राटे आ सकते हैं।
3. गले की तकलीफ से भी खर्राटे आ सकते हैं। कई बार गले में खराश, कफ का जम जाना, टांसिल में सूजन व संक्रमण भी खर्राटे की वजह बनते हैं।
4. उम्र का बढ़ना भी एक कारण है। उम्र के साथ गले के टिश्यू कमजोर होते हैं। इससे अधिक कंपन होते और खर्राटे आने लगते हैं।
5. कई बार सांस लेने वाली नली संकरी और कमजोर होती है। जब सांस लेते हैं तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं। इससे खर्राटे आते हैं।
6. सोने से पहले अधिक शराब पीने या नींद की दवा लेने से भी खर्राटे आने की संभावना बढ़ती है।
7. धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में खर्राटे लेने की संभावना सामान्य व्यक्तियों से ज्यादा होती है। धूम्रपान से सांस की नली में सूजन आती है इससे श्वास मार्ग संकरा होता और खर्राटे आने लगते हैं।
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8. कई लोग पीठ के बल सोते हैं। इस तरह से सोने से गले के स्नायु शिथिल पड़ते हैं और सांस की नली में रुकावट बनती है। इससे खर्राटे आना चालू होते हैं।
ऐसे की जाती है जांच
खर्राटे के दौरान सांस रुकने की जांचने के लिए पालीसिम्नोग्राफी (पीएसजी) टेस्ट किया जाता है। यह एक प्रकार स्लीप स्टडी होती है। जांच के लिए मरीज को स्लीप लैब में सुलाया जाता है और उसे मॉनिटर किया जाता है। यदि एक घंटे में 0-5 बार सांस रुकती है तो कोई घबराने वाली बात नहीं है। यदि 5-15 बार रुकती है तो खतरा बढ़ने लगता है। इसमें पेशेंट को लाइफ स्टाइल मोडिफिकेशन, वेट मैनेजमेंट व उसके पोश्चर को ठीक कर बीमारी से राहत दिला दी जाती है। यदि 15-30 और 30 से ज्यादा बार एक घंटे में सांस रुक रही है तो यह जिंदगी के लिए खतरनाक हो सकता है।
सांस रुकने से क्या होता है
सांस लेने में बार-बार रुकावट होने पर शरीर में आक्सीजन का लेवल कम हो जाता है, जिससे बीपी बढ़ जाता है। सांस रुकने से हार्ट ज्यादा तेजी से पंप करता है। इससे साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। इससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। इसमें लक्षण भी सामने नहीं आते। आक्सीजन के साथ कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा ज्यादा होने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है। इससे स्ट्रोक्स की आशंका बढ़ती है। सांस रुकने से व्यक्ति रात में सोता नहीं। कुछ-कुछ अंतराल में नींद खुलती रहती है। इससे वह दिन के वक्त सोता है। कई बार तो लोग कुर्सी में बैठते हैं और सो जाते हैं। नींद पूरी नहीं होने से चिड़चिड़ापन भी आता है। कई बार लोग ड्राइविंग के वक्त झपकी लेते हैं। इससे एक्सीडेंट का खतरा रहता है।
क्या है इलाज
1. पीजीआई के मुताबिक सबसे पहले लोगों को वजन कम करने को कहा जाता है। ऐसी स्टडीज है कि पांच किलो वजन कम होने से 30 फीसदी खर्राटे कम हो जाते हैं।
2. ये एक विशेष प्रकार का उपकरण होता है, जो रात के वक्त व्यक्ति को लगाकर सोना पड़ता है। इससे सांस की नली का अवरोध रुक जाता है, लेकिन इसमें दिक्कत यह होती है कि इसे हमेशा लगाना होगा।
3. समस्या गंभीर होने पर सर्जरी के ऑप्शन के बारे में सोचा जा सकता है। सर्जरी से पहले टेस्ट किया जाता है, जिसे ड्रग-इंडयूस्ड स्लीप इंडोस्कोपी कहते हैं। इसमें मरीज को नींद आने की दवा दी जाती है और पता करते हैं कहां-कहां सांस रुक रही है। उसके बाद आपरेशन किया जाता है।
खर्राटों से बचने के लिए क्या करें
1. समय रहते वजन काबू करें।
2. गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब जैसे नशे से दूर रहे।
3. यदि ब्लड प्रेशर 120-80 से अधिक है तो डाक्टर से जांच करवाकर उसे नियंत्रित करें।
4. सोने से पहले तीखा और भारीभरकम भोजन न करें।
5. दिन में कम से तीन से चार लीटर पानी पीएं।
बच्चों में खर्राटे का कारण
एडेनॉइड्स (नाक के पीछे मांस का बढ़ना)।
जीभ का मोटी होना।
जुकाम व हड्डी टेढ़ी होने से नाक में रुकावट ।