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आईबीडी का इलाज : डाक्टर जो कहे, वो जरूर मानें
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चंडीगढ़। इंफ्लेमेटरी बोवेल डिजीज (आईबीडी) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पीजीआई में पेशेंट का एक संवाद का आयोजन किया गया। पीजीआई के गेस्ट्रोएंट्रोलाजी डिपार्टमेंट की ओर से आयोजित संवाद में मरीजों ने अपनी बीमारी के सफर और अनुभव के बारे में बताया। इस मौके पर मोहाली से आईं संदीप कौर ने बताया कि आईबीडी एक गंभीर बीमारी है। उन्हें साल 1992 में अपनी बीमारी के बारे में पता चला था। 97 से पीजीआई आ रही हूं। मैं दावे से कह सकती हूं कि इससे पीड़ित मरीज को डाक्टर की हर बात माननी चाहिए।
बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए। डाइट पर कंट्रोल हो। रोज एक्सरसाइज करें। इलाज के दौरान भटके नहीं। यदि ये सब मरीज करते हैं तो वे आईबीडी के साथ बेहतर जीवन बिता सकते हैं। इस दौरान एक मरीज ने पूछा कि ट्रेवलिंग के दौरान काफी दिक्कतें आती हैं। होटल में रुकना होता है और वहीं का खाना-पीना होता है। ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। इस सवाल के जवाब में डिपार्टमेंट की प्रोफेसर उषा दत्ता ने कहा कि अकसर ट्रेवलिंग के दौरान बीमारी बढ़ जाती है। यदि होटल में रुकते हैं तो ताजा खाना ही खाएं। सलाद को धोकर खाएं। दाल-चावल खा सकते हैं। फल ले सकते हैं। पानी पर खास ध्यान रखना होगा। एक मरीज ने पूछा कि खाना बनाने में किस तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। इस पर डाक्टरों ने बताया कि खाने में तेल अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए। एक तेल का बार-बार इस्तेमाल कभी न करें। कच्ची घानी, सोयाबीन, नारियल और तिल के तेल का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है।
कार्यक्रम की शुरुआत पर डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर राकेश कोछड़, प्रोफेसर उषा दत्ता, प्रो. एसके सिन्हा, डा. विशाल व अन्य डाक्टरों ने आईबीडी के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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एक महीने की दवा चार हजार की
कुछ मरीजों ने कहा कि आईबीडी की दवाएं बहुत महंगी होती हैं। कई बार तो दवाओं को खरीद पाना मुश्किल होता है। इस पर डाक्टरों के पैनल ने कहा कि जो गरीब मरीज आते हैं, उनके लिए दवा कंपनियों से अपील कर उन्हें सस्ती दवा दिलवाई जाती है। इस दिशा में कोशिश की जा रही है कि मरीजों को दवाओं पर 15 से 30 फीसदी छूट मिले। आईबीडी का इलाज काफी महंगा है। एक मरीज के इलाज पर एक महीने में कम से कम तीन से चार हजार रुपये का खर्च तो आता ही है।
क्या होता है आईबीडी
आईबीडी को हमारे पाचन तंत्र को ग्रस्त करने वाली दो मुख्य बीमारियां अल्सरेटिव कोलाइटिस व क्रोहन रोग को कहते हैं। अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो हमारी बड़ी आंत को लंबे समय तक ग्रसित करती है, जिससे बड़ी आंत में घाव बनते हैं। क्रोहन रोग मुंह से लेकर बड़ी आंत के निचले हिस्से तक शरीर के खाने की नली के किसी भी हिस्से को ग्रसित करती है। इससे न सिर्फ आंत की ऊपरी सतह बल्कि पूरी की पूरी आंत इसकी चपेट में आती है।
आईबीडी क्यों होता है
अब तक आईबीडी के कारणों के बारे में पता नहीं चल पाया है। हालांकि ऐसा माना जाता है कि शरीर की प्रतिरक्षा की कोशिकाएं अपनी ही आंत के खिलाफ क्रिया करती हैं, जिससे आंत में विभिन्न जगहों पर जख्म हो जाते हैं। इसके पीछे वातावरण में बदलाव, तनाव, खानपान में परिवर्तन और कुछ जेनेटिक कारण हो सकते हैं।
आईबीडी के लक्षण क्या होते हैं
आईबीडी किसी भी उम्र में हो सकता है। आमतौर पर यह 20 से 40 वर्ष की आयु के लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है।
पेट में दर्द होना
दस्त लगना
दस्त के साथ में रक्तस्राव होना
वजन का कम होना, भूख कम लगना
बुखार, जोड़ों में दर्द और थकावट आदि होना।
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बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए। डाइट पर कंट्रोल हो। रोज एक्सरसाइज करें। इलाज के दौरान भटके नहीं। यदि ये सब मरीज करते हैं तो वे आईबीडी के साथ बेहतर जीवन बिता सकते हैं। इस दौरान एक मरीज ने पूछा कि ट्रेवलिंग के दौरान काफी दिक्कतें आती हैं। होटल में रुकना होता है और वहीं का खाना-पीना होता है। ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। इस सवाल के जवाब में डिपार्टमेंट की प्रोफेसर उषा दत्ता ने कहा कि अकसर ट्रेवलिंग के दौरान बीमारी बढ़ जाती है। यदि होटल में रुकते हैं तो ताजा खाना ही खाएं। सलाद को धोकर खाएं। दाल-चावल खा सकते हैं। फल ले सकते हैं। पानी पर खास ध्यान रखना होगा। एक मरीज ने पूछा कि खाना बनाने में किस तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। इस पर डाक्टरों ने बताया कि खाने में तेल अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए। एक तेल का बार-बार इस्तेमाल कभी न करें। कच्ची घानी, सोयाबीन, नारियल और तिल के तेल का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है।
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कार्यक्रम की शुरुआत पर डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर राकेश कोछड़, प्रोफेसर उषा दत्ता, प्रो. एसके सिन्हा, डा. विशाल व अन्य डाक्टरों ने आईबीडी के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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एक महीने की दवा चार हजार की
कुछ मरीजों ने कहा कि आईबीडी की दवाएं बहुत महंगी होती हैं। कई बार तो दवाओं को खरीद पाना मुश्किल होता है। इस पर डाक्टरों के पैनल ने कहा कि जो गरीब मरीज आते हैं, उनके लिए दवा कंपनियों से अपील कर उन्हें सस्ती दवा दिलवाई जाती है। इस दिशा में कोशिश की जा रही है कि मरीजों को दवाओं पर 15 से 30 फीसदी छूट मिले। आईबीडी का इलाज काफी महंगा है। एक मरीज के इलाज पर एक महीने में कम से कम तीन से चार हजार रुपये का खर्च तो आता ही है।
क्या होता है आईबीडी
आईबीडी को हमारे पाचन तंत्र को ग्रस्त करने वाली दो मुख्य बीमारियां अल्सरेटिव कोलाइटिस व क्रोहन रोग को कहते हैं। अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो हमारी बड़ी आंत को लंबे समय तक ग्रसित करती है, जिससे बड़ी आंत में घाव बनते हैं। क्रोहन रोग मुंह से लेकर बड़ी आंत के निचले हिस्से तक शरीर के खाने की नली के किसी भी हिस्से को ग्रसित करती है। इससे न सिर्फ आंत की ऊपरी सतह बल्कि पूरी की पूरी आंत इसकी चपेट में आती है।
आईबीडी क्यों होता है
अब तक आईबीडी के कारणों के बारे में पता नहीं चल पाया है। हालांकि ऐसा माना जाता है कि शरीर की प्रतिरक्षा की कोशिकाएं अपनी ही आंत के खिलाफ क्रिया करती हैं, जिससे आंत में विभिन्न जगहों पर जख्म हो जाते हैं। इसके पीछे वातावरण में बदलाव, तनाव, खानपान में परिवर्तन और कुछ जेनेटिक कारण हो सकते हैं।
आईबीडी के लक्षण क्या होते हैं
आईबीडी किसी भी उम्र में हो सकता है। आमतौर पर यह 20 से 40 वर्ष की आयु के लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है।
पेट में दर्द होना
दस्त लगना
दस्त के साथ में रक्तस्राव होना
वजन का कम होना, भूख कम लगना
बुखार, जोड़ों में दर्द और थकावट आदि होना।