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संवाद

Sat, 14 Jul 2018 01:52 AM IST
Updated Sat, 14 Jul 2018 01:52 AM IST
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संवाद
म्यूजिक के बाजार में बेसुरे भी अब सुर वाले हो गए
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अमर उजाला ‘संवाद’ कार्यक्रम में संगीत के बदलते दौर पर खुलकर बोले - पंजाब के युवा संगीतकार

कहा - सॉफ्टवेयर ने ‘कट पेस्ट’ संगीत को दे दिया है जन्म

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। संगीत के बाजार में अब डिमांड और सप्लाई का ऐसा दौर चला है कि बेसुरे भी सुर वाले हो गए हैं और सुर वालों को कोई पूछ नहीं रहा। यही संगीत का नया दौर है। म्यूजिक स्टूडियो के आधुनिकीकरण के साथ तबला, सितार जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र अब आधुनिक रूप ले चुके हैं। साफ्टवेयर की दुनिया ने ‘कट पेस्ट’ संगीत को जन्म दे दिया है। ऐसे में गायकों की बहार तो है पर सुरों का बाजार मंदा हो चला है। यह बातें अमर उजाला द्वारा आयोजित ‘संवाद’ कार्यक्रम में पंजाब के प्रतिभाशाली युवा संगीतकारों और गायकों ने कही। कार्यक्रम के दौरान किसी ने फ्यूजन म्यूजिक को इसका जिम्मेदार माना तो किसी ने कहा कि ऑडियंस को जो पसंद आ रहा है, वही बिक रहा है।

अब तो डिमांड और सप्लाई का दौर है : - आलाप (सिंगर)
मैं अपने माता-पिता की वजह से संगीत के क्षेत्र में हूं। कनाडा स्टडी करने गया था, इंजीनियर बनने का ख्वाब था। ऐसे में ऑडियो इंजीनियरिंग की। कुछ बड़े नामों के साथ काम किया। पिता सरदूल सिकंदर से गायन की कला तो सीखी ही थी। जब ऑडियो इंजीनियरिंग की तो उसके बाद लगा कि कुछ नया करना चाहिए। मैंने देखा कि देश का बीट पैटर्न ढोलक है, इसे मैंने नौलखी ढोलक का नाम दिया है। वास्तव में म्यूजिक इंडस्ट्री अब एकदम बदल चुकी है। मुझको ऐसा लगा कि मेरे बुजुर्गों ने इसकी सेवा की तो मुझको भी करना चाहिए। हमारे पास ऐसे भी सिंगर हैं जो मेहनत करके काम करते हैं। डिमांड और सप्लाई की बात करें तो वास्तव में मैंने देखा है जमाना ही यही रह गया है। कई ऐसे गायक हैं जो गर्दिश में हैं। उनकी गायकी के क्या कहने लेकिन उनको सुनने वाले कोई नहीं है। वास्तव में यदि पुराने गीतों पर जाएं तो बात वहीं आ जाती है कि एक-एक गाने को इतना बेहतरीन गाया जाता था कि वह कर्णप्रिय हो जाता था। अब ऐसी बात नहीं रही।
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एक दिन में सौ गाने, कैसे बनेंगे अच्छे तराने
मैं तो कहूंगी कि पंजाबी गानों में वल्गैरिटी नहीं है, वायलेंस है। पंजाब में म्यूजिक भी है और सुर भी हैं, लेकिन अब इंडस्ट्री बदल चुकी है। अब सिंगल ट्रैक का जमाना है। यू ट्यूब का जमाना है। कोई भी ट्रैक गाया और उठाकर डाल दिया सोशल मीडिया में। पंजाब के कई बड़े नामचीन गायक अभी भी लाइव शो में लाखों की भीड़ इकट्ठी कर लेते हैं पर उनको कोई म्यूजिक इंडस्ट्री मौका नहीं देती। कारण है डिमांड। ऑडियंस की चाहत बदल चुकी है या फिर कहें कि इतना ज्यादा फ्यूजन परोस दिया गया है कि ऑडियंस की आदत एकदम चेंज हो चुकी है। पहले लोग आर्टिस्टों का इंतजार करते थे और अब ऐसा नहीं है। एक दिन में सौ गाने रिलीज हो रहे हैं, उसमें रैप से लेकर हरेक प्रकार के म्यूजिक होता है। ऐसा भी नहीं रह गया है कि कोई गायक स्टाइल नहीं चेंज कर सकता है। इतिहास को देखें तो जो अपना दौर लेकर आया वह लीजेंड ही बना है। आप खुद देख लें छल्ला सभी ने गाया लेकिन जब गुरदास मान ने गाया तो उनका ही बन गया।
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- प्रीतो साहनी (एक्ट्रेस और गायिका)

फ्यूजन से आया गायकी में एकदम चेंज
मैं सपना चौधरी को जानती हूं। वे गायिका नहीं बल्कि एक परफार्मर हैं। उनके काफी फालोअर हैं, लोगों को उनकी परफारमेंस पसंद आती है। उन्होंने अपना एक मंच बना लिया है कोई भी बना सकता है। वास्तव में आडियंस की बात है। आडियंस को क्या पसंद आएगा यह आप तय नहीं कर सकते हैं। मुझको लगता है कि पंजाब में भी परफार्मर हैं और गायक भी हैं, लेकिन आडियंस तो जुटानी होगी। एक अच्छा संगीत लाने के लिए जरूरी है कि थोड़ा समझा जाए। मसलन, मैं अगर नहीं गा सकती हूं और अच्छी एक्टिंग कर सकती हूं तो मैं एक्टिंग करूंगी न कि सिंगिंग। पंजाब में फ्यूजन बढ़ा है और फ्यूजन के बढ़ने से पारंपरिक गायकों को वैल्यू में अंतर आया है।
- पिंकी संधू (पिंकी मोगे वाली)

जो पसीने से नहाते हैं इतिहास बदलते हैं
हमारा पटियाला घराना है। हम यू ट्यूब पर अकसर गाने सुनते हैं तो अच्छा नहीं लगता है। म्यूजिक कुछ है और गाने कुछ हैं। समझ में नहीं आता हो क्या रहा है। कई बार कोफ्त यह होती है कि हमारी मेहनत कहां गई। हमने ही नहीं, कई ऐसे गायकों ने जिन्होंने वर्षों तपस्या करके संगीत का प्रशिक्षण लिया और हमसे ज्यादा व्यूज कई के हैं। एक आर्टिस्ट को मैं सुन रहा था, अकरम फरीदी, क्या गाते हैं। उनका गायन हम लगातार सुनते रहे। पाकिस्तान में उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता है, पर यू ट्यूब में उनके व्यूज हैं 504। उनका क्या आरोह अवरोह है, कोई उनका मुकाबला नहीं कर सकता है। कोई मेहनत ही नहीं करना चाहता है। वास्तव में चेंज आ चुका है, सुर का कार्ड गायब हो चुका है। फिर भी मैं कहना चाहूंगा जो पानी से नहाते हैं वह लिबास बदलते हैं जो पसीने से नहाते हैं वह इतिहास बदलते हैं।

- अली ब्रदर्स (शाहरुख अली खान, परवेज बबलू, परवेज हसन)

90 फीसदी म्यूजिक, 10 फीसदी गायन
मैंने कुछ समय पहले संगीत शुरू किया। हम बिना रियाज के स्टूडियो चले गए। वास्तव में चेंज तो आ चुका है। म्यूजिक डायरेक्टर ने कहा कि 90 फीसदी म्यूजिक है और 10 फीसदी गायन। म्यूजिक डायरेक्टर ने कहा कि मैं ट्यूनिंग ला दूंगा। लेकिन मैंने दो बार गाया, तीन बार गाया। मुझे मजा नहीं आया तो मैंने वक्त मांगा, रियाज किया और उसके बाद स्टूडियो गया। जब म्यूजिक डायरेक्टर ने मुझको सुना तो उनको अच्छा लगा। ठीक है कि म्यूजिक ने इंडस्ट्री को बदल दिया है पर इतना भी न करें कि हम गायकी के बेसिक को भी भूल जाएं। बिना बेसिक के काम हमेशा खराब ही होता है।
- बरिंदर ढपई और दिलप्रीत विर्क (गायक)
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