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डीए पर रोक के कारण कर्मचारियों को 18 महीनों में 216 करोड़ का नुकसान
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चंडीगढ़। कोरोना महामारी के कारण जनवरी 2020 से महंगाई भत्ता रोकने पर हरियाणा के कर्मचारियों को 18 महीने में 216 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। डीए पर रोक के कारण 30 जून, 2021 को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को 2 लाख 22 हजार रुपये का नगद घाटा होगा। उन्हें जीवन भर पेंशन में भी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह गणना कर्मचारियों की 50 हजार बेसिक पगार के आधार पर की गई है।
जनवरी 2020 से 30 जून, 2021 तक डीए न मिलने पर प्रति कर्मचारी को 72 हजार रुपये का नुकसान होगा। सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने कहा है कि अगर 1 जुलाई, 2021 से महंगाई भत्ता बहाल नहीं किया तो कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। आसमान छूती महंगाई के बावजूद महंगाई भत्ते की बहाली न होने से लाखों कर्मचारियों व पेंशनर्स में रोष है। संघ नेताओं ने केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार की तर्ज पर महंगाई भत्ते की बहाली और जनवरी 2020 से जून 2021 तक बकाया डीए का नकद भुगतान करने की मांग की है। कर्मचारी, अधिकारी कोरोना रिलीफ फंड में 110 करोड़ दान दे चुके हैं। अब प्रदेश के कर्मचारी आर्थिक कटौतियों को बिल्कुल सहन नहीं करेंगे।
जनवरी 2020 में कम से कम 4 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 21 प्रतिशत, जुलाई 2020 में 25 प्रतिशत और जनवरी 2021 में 29 प्रतिशत महंगाई भत्ता कम से कम मिलना चाहिए था, जो अभी केवल 17 प्रतिशत ही मिल रहा है। यदि एक कर्मचारी का मूल वेतन 50 हजार रुपये है तो उसको जनवरी 2020 से जून 2021 तक कुल 72 हजार का महंगाई भत्ते का नुकसान हुआ है। यदि वह कर्मचारी जून 2021 में ही रिटायर हो जाता है तो उसके आर्थिक नुकसान और ज्यादा बढ़ जाते हैं। कर्मचारी को मिलने वाली 300 दिन की लीव इनकैशमेंट में 60 हजार रुपये व ग्रेच्युटी में 90 हजार का सीधा घाटा होगा।
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जनवरी 2020 से 30 जून, 2021 तक डीए न मिलने पर प्रति कर्मचारी को 72 हजार रुपये का नुकसान होगा। सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने कहा है कि अगर 1 जुलाई, 2021 से महंगाई भत्ता बहाल नहीं किया तो कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। आसमान छूती महंगाई के बावजूद महंगाई भत्ते की बहाली न होने से लाखों कर्मचारियों व पेंशनर्स में रोष है। संघ नेताओं ने केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार की तर्ज पर महंगाई भत्ते की बहाली और जनवरी 2020 से जून 2021 तक बकाया डीए का नकद भुगतान करने की मांग की है। कर्मचारी, अधिकारी कोरोना रिलीफ फंड में 110 करोड़ दान दे चुके हैं। अब प्रदेश के कर्मचारी आर्थिक कटौतियों को बिल्कुल सहन नहीं करेंगे।
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जनवरी 2020 में कम से कम 4 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 21 प्रतिशत, जुलाई 2020 में 25 प्रतिशत और जनवरी 2021 में 29 प्रतिशत महंगाई भत्ता कम से कम मिलना चाहिए था, जो अभी केवल 17 प्रतिशत ही मिल रहा है। यदि एक कर्मचारी का मूल वेतन 50 हजार रुपये है तो उसको जनवरी 2020 से जून 2021 तक कुल 72 हजार का महंगाई भत्ते का नुकसान हुआ है। यदि वह कर्मचारी जून 2021 में ही रिटायर हो जाता है तो उसके आर्थिक नुकसान और ज्यादा बढ़ जाते हैं। कर्मचारी को मिलने वाली 300 दिन की लीव इनकैशमेंट में 60 हजार रुपये व ग्रेच्युटी में 90 हजार का सीधा घाटा होगा।
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