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50 हजार सीटें बढ़ाने पर रोक

Mon, 18 Mar 2019 02:11 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Mon, 18 Mar 2019 02:11 AM IST
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50 हजार सीटें बढ़ाने पर रोक
फ्लैग : गरीब सवर्ण आरक्षण के तहत पीयू में दस फीसदी सीटें बढ़ाने की पहल को लगी ब्रेक
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सिंडिकेट ने कहा- सुविधाएं हों तभी बढ़ाई जाएं कॉलेजों में 50 हजार सीटें

-बनाई जाएगी एक कमेटी जो कॉलेजों व पीयू कैंपस की सुविधाओं का करेगी आंकलन


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से कैंपस समेत 196 कॉलेजों में बढ़ाई जाने वाली 50 हजार सीटों पर ब्रेक लग गई है। सिंडिकेट ने कहा है कि पहले सुविधाएं देखी जाएं। यदि सुविधाएं पर्याप्त हों तो सीटों को इसी शैक्षिक सत्र से बढ़ा दिया जाए अन्यथा पहले छात्रों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जाए। यह सीटें केंद्र सरकार की ओर से गरीब सवर्णों के लिए दस फीसदी आरक्षण की व्यवस्था के तहत बढ़ाई जानी थीं। अधिकांश जगह यह लागू भी हो गया। पीयू भी गरीब सवर्ण विद्यार्थियों को दाखिले में लाभ देने के लिए अपने परिसर समेत कॉलेजों में सीटें बढ़ाने का खाका तैयार कर रहा था। सभी कॉलेजों से कुल विद्यार्थियों को सुविधाओं की जानकारी जुटाई गई। यह मामला सिंडिकेट की बैठक में पहुंचा तो सभी तैयारियां धड़ाम हो गई।
सदस्यों ने कहा कि सीटें बढ़ाना तो अच्छी बात है, लेकिन सुविधाएं भी बढ़ रही हैं या नहीं, पहले यह देखना होगा। यदि सीटें ही बढ़ानी हैं तो इससे शिक्षा की गुणवत्ता और प्रभावित होगी। शिक्षक व स्टूडेंट्स के पढ़ाने का अनुपात और गड़बड़ा जाएगा। नैक के मानकों में पंजाब विश्वविद्यालय व कॉलेज और पीछे हो जाएंगे। तमाम सवाल खड़े किए तो कोई भी इसका जवाब नहीं दे पाया। आखिर में तय हुआ कि इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी जो कॉलेजों व पीयू कैंपस की सुविधाओं का आंकलन करेगी। बढ़ाई जाने वाली सीटों से लाभ होगा या हानि? यह देखा जाएगा। फिलहाल सीटें बढ़ती नजर नहीं आ रही हैं। मालूम हो कि पीयू व कॉलेजों में लगभग तीन लाख विद्यार्थी शिक्षा पा रहे हैं।
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इनसेट---
कुछ कॉलेज सीटें अभी बढ़ाने के पक्ष में
कुछ कॉलेज अपने यहां दस फीसदी सीटें बढ़ाने के पक्ष में हैं। सूत्रों का कहना है कि वहां बाहरी विद्यार्थियों के भी दाखिले होते हैं। ऐसे में उनको इसका लाभ मिल सकता है जबकि उनके पास विद्यार्थियों को बढ़ाने की पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं हैं। दो कॉलेजों पर तो बाहरी विद्यार्थियों के दाखिले करने की जांच भी चल रही है, उसके नतीजे अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं। मालूम हो कि कॉलेजों को बढ़ाई गई सीटों पर किए दाखिलों का हिसाब देना जरूरी होगा।
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