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रिसर्च के लिए प्रोफेसर धमीजा का शरीर पीजीआई को किया दान
Updated Mon, 17 Jul 2017 01:55 AM IST
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(प्रो. धमीजा की फोटो ट्रैक में सेव है। कृपया लगा लें--धन्यवाद)
रिसर्च के लिए प्रो. धमीजा का शरीर पीजीआई को किया दान
अंग्रेजी के जाने-माने प्रोफेसर थे, पूरी जिंदगी शिक्षा पर जोर देते रहे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
डीएवी कॉलेज के रिटायर प्रोफेसर चमनलाल धमीजा के निधन के बाद उनका शरीर पीजीआई को दान कर दिया गया है। वह 83 साल के थे। काफी दिन पहले उन्होंने अपने शरीर को पीजीआई को दान करने की इच्छा जताई थी। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी यह शरीर किसी के काम आ जाए तो इससे बेहतर कोई बात नहीं हो सकती। उनकी आखिरी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके बेटों ने उनका शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए पीजीआई को सौंप दिया। साथ ही समाज के सामने एक मिसाल भी पेश की है।
प्रोफेसर सीएल धमीजा की बेटी डॉ. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि उनके पिता का मानना था कि शिक्षा से ही व्यक्ति और समाज का भला हो सकता है। शिक्षा की कमी किसी भी समाज को अंधविश्वास और नासमझी की ओर ले जाता है। वे अपने स्टूडेंट के बीच काफी प्रसिद्ध थे। स्टूडेंट को पढ़ाने के साथ उन्हें प्यार भी करते थे। उनका मानना था कि स्टूडेंट को पढ़ाने से पहले उन्हें प्यार करना चाहिए, तभी पढ़ने में उनका मन लगेगा। हिंदुस्तान के बंटवारे के वक्त वह पाकिस्तान से आकर यहां बस गए थे। शुरुआती दिनों में उन्होंने काफी संघर्ष किया। पाकिस्तान से जो लोग आए थे, वह मुआवजा की मांग पर अड़े थे, लेकिन प्रोफेसर धमीजा पैसों के बजाय शिक्षा पर जोर देने में जुटे रहे। उन्होंने अपने बल पर शिक्षा हासिल की और उसके बाद नौकरी।
सेक्टर-43 में रहने वाले प्रो. धमीजा के परिवार में एक बेटी और बेटा है। बेटी डॉ. दीप्ति गुप्ता पंजाब यूनिवर्सिटी के इंग्लिश डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं, जबकि बेटा आशीष धमीजा दिल्ली में रहते हैं।
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रिसर्च के लिए प्रो. धमीजा का शरीर पीजीआई को किया दान
अंग्रेजी के जाने-माने प्रोफेसर थे, पूरी जिंदगी शिक्षा पर जोर देते रहे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
डीएवी कॉलेज के रिटायर प्रोफेसर चमनलाल धमीजा के निधन के बाद उनका शरीर पीजीआई को दान कर दिया गया है। वह 83 साल के थे। काफी दिन पहले उन्होंने अपने शरीर को पीजीआई को दान करने की इच्छा जताई थी। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी यह शरीर किसी के काम आ जाए तो इससे बेहतर कोई बात नहीं हो सकती। उनकी आखिरी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके बेटों ने उनका शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए पीजीआई को सौंप दिया। साथ ही समाज के सामने एक मिसाल भी पेश की है।
प्रोफेसर सीएल धमीजा की बेटी डॉ. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि उनके पिता का मानना था कि शिक्षा से ही व्यक्ति और समाज का भला हो सकता है। शिक्षा की कमी किसी भी समाज को अंधविश्वास और नासमझी की ओर ले जाता है। वे अपने स्टूडेंट के बीच काफी प्रसिद्ध थे। स्टूडेंट को पढ़ाने के साथ उन्हें प्यार भी करते थे। उनका मानना था कि स्टूडेंट को पढ़ाने से पहले उन्हें प्यार करना चाहिए, तभी पढ़ने में उनका मन लगेगा। हिंदुस्तान के बंटवारे के वक्त वह पाकिस्तान से आकर यहां बस गए थे। शुरुआती दिनों में उन्होंने काफी संघर्ष किया। पाकिस्तान से जो लोग आए थे, वह मुआवजा की मांग पर अड़े थे, लेकिन प्रोफेसर धमीजा पैसों के बजाय शिक्षा पर जोर देने में जुटे रहे। उन्होंने अपने बल पर शिक्षा हासिल की और उसके बाद नौकरी।
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सेक्टर-43 में रहने वाले प्रो. धमीजा के परिवार में एक बेटी और बेटा है। बेटी डॉ. दीप्ति गुप्ता पंजाब यूनिवर्सिटी के इंग्लिश डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं, जबकि बेटा आशीष धमीजा दिल्ली में रहते हैं।
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