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मेवात के 200गांव अब पानी के लिए सरकार भरोसे
Updated Sun, 02 Jul 2017 01:22 AM IST
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पानी के लिए तरस रहे हैं मेवात के 200 गांवों को हाईकोर्ट से निराशा
-अदालत ने कहा, राज्य सरकार को अप्रोच किए बगैर सीधे नहीं आ सकते हाईकोर्ट
-पहले हरियाणा सरकार को रिप्रजेंटेशन के माध्यम से अप्रोच करने की दी नसीहत
-हाईकोर्ट की टिप्पणी पर याचिका ली गई वापस, सरकार से लगाएंगे गुहार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पानी के लिए तरस रहे मेवात के 200 गांवों के लोगों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से मायूसी हाथ लगी है। लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस संदर्भ में सरकार को निर्देश जारी करने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि बिना सरकार को अप्रोच किए सीधे अदालत नहीं आया जा सकता। वह पहले राज्य सरकार से संपर्क करे। अब ग्रामीणों की रिप्रजेंटेशन पर हरियाणा सरकार को फैसला लेना होगा।
याचिका दाखिल कर कहा गया है कि 200 गांवों के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी 80 गांवों को डार्क जोन घोषित कर चुकी है, लेकिन अभी तक सरकार ने कुछ नहीं किया। बच्चों को एक दिन छोड़कर स्कूल भेजा जाता है ताकि वे टैंकर से पानी ला सकें। सिंचाई विभाग ने डीसी को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके अनुसार 103 गांवों में मौजूद 145 तालाब सूख चुके हैं। याची ने कहा कि इन गांवों में साफ पीने का पानी मौजूद नहीं है। यहां पानी का स्तर बेहद नीचे जा चुका है और नीचे मौजूद खतरनाक केमिकल के पानी से मिलने की आशंका बनी रहती है, जो जानलेवा हो सकता है। केमिकल वेस्ट का सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में बड़ी संख्या में मौजूद फैक्ट्रियां हैं।
आगरा नहर देश की कृषि के लिए बेहद अहम है। यह ओखला बैराज से शुरू होती है, जिसे 1874 में आरंभ किया गया था। पहले इसे सभी काम के लिए इस्तेमाल किया जाता था परंतु 1904 के बाद में इसको केवल खेती के लिए सीमित कर दिया गया। हरियाणा सरकार ने अपने सिंचाई साधनों का प्रबंध नहीं किया, जिसके चलते लोगों के सामने समस्या आ खड़ी हुई है। करोड़ों का मेवात कैनाल प्रोजेक्ट अभी तक लंबित पड़ा हुआ है। योजना आयोग ने माना है कि यह प्रोजेक्ट 300 से अधिक गांवों की 240000 एकड़ भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवा सकता है। समय पर इन प्रोजेक्टों का पूरा होना लोगों के लिए राहत की खबर लाएगा। जमीन का पानी नीचे जा रहा है और बहुत कम लोगों के पास ट्यूबवेल मौजूद है। यहां पर फसलों का उत्पादन प्रति हेक्टेयर अन्य जिलों की तुलना में बेहद कम है।
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-अदालत ने कहा, राज्य सरकार को अप्रोच किए बगैर सीधे नहीं आ सकते हाईकोर्ट
-पहले हरियाणा सरकार को रिप्रजेंटेशन के माध्यम से अप्रोच करने की दी नसीहत
-हाईकोर्ट की टिप्पणी पर याचिका ली गई वापस, सरकार से लगाएंगे गुहार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पानी के लिए तरस रहे मेवात के 200 गांवों के लोगों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से मायूसी हाथ लगी है। लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस संदर्भ में सरकार को निर्देश जारी करने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि बिना सरकार को अप्रोच किए सीधे अदालत नहीं आया जा सकता। वह पहले राज्य सरकार से संपर्क करे। अब ग्रामीणों की रिप्रजेंटेशन पर हरियाणा सरकार को फैसला लेना होगा।
याचिका दाखिल कर कहा गया है कि 200 गांवों के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी 80 गांवों को डार्क जोन घोषित कर चुकी है, लेकिन अभी तक सरकार ने कुछ नहीं किया। बच्चों को एक दिन छोड़कर स्कूल भेजा जाता है ताकि वे टैंकर से पानी ला सकें। सिंचाई विभाग ने डीसी को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके अनुसार 103 गांवों में मौजूद 145 तालाब सूख चुके हैं। याची ने कहा कि इन गांवों में साफ पीने का पानी मौजूद नहीं है। यहां पानी का स्तर बेहद नीचे जा चुका है और नीचे मौजूद खतरनाक केमिकल के पानी से मिलने की आशंका बनी रहती है, जो जानलेवा हो सकता है। केमिकल वेस्ट का सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में बड़ी संख्या में मौजूद फैक्ट्रियां हैं।
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आगरा नहर देश की कृषि के लिए बेहद अहम है। यह ओखला बैराज से शुरू होती है, जिसे 1874 में आरंभ किया गया था। पहले इसे सभी काम के लिए इस्तेमाल किया जाता था परंतु 1904 के बाद में इसको केवल खेती के लिए सीमित कर दिया गया। हरियाणा सरकार ने अपने सिंचाई साधनों का प्रबंध नहीं किया, जिसके चलते लोगों के सामने समस्या आ खड़ी हुई है। करोड़ों का मेवात कैनाल प्रोजेक्ट अभी तक लंबित पड़ा हुआ है। योजना आयोग ने माना है कि यह प्रोजेक्ट 300 से अधिक गांवों की 240000 एकड़ भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवा सकता है। समय पर इन प्रोजेक्टों का पूरा होना लोगों के लिए राहत की खबर लाएगा। जमीन का पानी नीचे जा रहा है और बहुत कम लोगों के पास ट्यूबवेल मौजूद है। यहां पर फसलों का उत्पादन प्रति हेक्टेयर अन्य जिलों की तुलना में बेहद कम है।
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