फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   बजट को लेकर अर्थ शास् त्रीयों से बातचीत

बजट को लेकर अर्थ शास् त्रीयों से बातचीत

Sat, 02 Feb 2019 01:51 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Sat, 02 Feb 2019 01:51 AM IST
विज्ञापन
बजट को लेकर अर्थ शास्
त्रीयों से बातचीत
फोटो सहित
विज्ञापन


संपूर्ण बजट में प्रावधान होगा तभी पांच लाख
तक की आय टैक्स फ्री होगी : अर्थशास्त्री

- किसानों को 6000 हजार रुपये सालाना दिया लाभ बहुत कम
- एग्रो इंडस्ट्री से खुलते रोजगार के रास्ते, इस तरफ ध्यान नहीं दिया
- 23 फसलों का एमएसपी किसानों को मौके पर ही दिलाना बड़ी चुनौती, बाजार की उपलब्धता भी जरूरी

सुशील कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्र की एनडीए सरकार के अंतरिम बजट में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला प्रावधान किया गया तो वह है, पांच लाख तक की आय टैक्स फ्री करना, लेकिन इसकी हकीकत अर्थशास्त्रियों ने अलग बताई है। उनका मानना है कि संपूर्ण बजट में इसका प्रावधान किया जाएगा, तभी पांच लाख तक की आय टैक्स फ्री होगी। पापुलिस्ट बजट दिखाई दे, इसलिए इस बिंदु पर अधिक जोर दिया गया है। अर्थशास्त्री भी इस बजट को लोकसभा चुनाव से जोड़कर ही देख रहे हैं। अर्थशास्त्रियों का राय में बजट :



रोजगार के रास्ते खोलने के लिए एग्रो इंडस्ट्री पर होना चाहिए था जोर (फोटो)
पंजाब विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट की चेयरपर्सन प्रो. उपिंदर साहनी कहती हैं कि बजट में मिडिल क्लास को पांच लाख तक की इनकम पर टैक्स से छूट दिए जाने की जो बात कही गई है, उसका असल में लाभ संपूर्ण बजट में दर्ज होने के बाद ही मिल पाएगा। बजट भारी भरकम दिखे, इसलिए इस बिंदु को शामिल किया गया है। दो हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों को सालाना 6000 हजार रुपये देने की जो व्यवस्था की जा रही है, जिससे किसानों का भला नहीं हो सकता। उन्हें उनकी लागत का पूरा मूल्य चुकाना होगा। मंडियों की स्थापना उनके आसपास करनी होगी। एग्रो इंडस्ट्री को डेवलप करने की बात ही नहीं की गई, जबकि यहीं से रोजगार के रास्ते खुलते हैं। सबसे जरूरी है ऑयल प्राइस कम होना, उसको भी बजट से दूर रखा गया है। एमएसएमई को मजबूत किया जाना चाहिए था। स्टार्टअप को बेनिफिट की बात होनी चाहिए थी, इससे रोजगार मिलते, लेकिन बजट में यह बातें स्पष्ट नहीं हैं। उज्ज्वला योजना के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। गरीबों को गैस सिलेंडर दिए गए, लेकिन दोबारा उसे भरवाने के लिए पैसे कहां से आएंगे, इसके लिए सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए थी।
विज्ञापन


किसानों-मजदूरों के लिए बनानी होंगी लांग टर्म पॉलिसी (फोटो)
क्रेड में आरबीआई चेयर प्रोफेसर डॉ. सतीश वर्मा कहते हैं कि बजट में सभी वर्गों को कुछ न कुछ हाथ लगा है। किसानों व मजदूरों के लिए पहली बार बेसिक इनकम को सिक्योर किया गया है। असंगठित क्षेत्र के लोगों को भी पेंशन स्कीम दी गई, लेकिन यह लांग टर्म तक चलें तो लोगों को लाभ मिल पाएगा। किसानों के लिए चलाई गई योजना का लाभ तेलंगाना आदि के किसान पहले से ले रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि 22 से 23 जिन फसलों को एमएसपी के दायरे में लाया गया है, उनका मूल्य शत-प्रतिशत किसानों को तुरंत ही मिलना चाहिए। अब तक गेहूं, आलू का ही मूल्य किसानों को मिल पाता है। बाकी फसलों का मूल्य दिलाने के प्रयास सफल नहीं हुए। गन्ने का भुगतान भी शीघ्र सरकार को करना होगा। किसान खुद चाहते हैं कि उसकी आमदनी रेगुलर हो, तभी उसका स्तर ऊपर उठ पाएगा। मंडियों की स्थापना आसपास करनी होंगी। ऑनलाइन बाजार में फसल की बिक्री के लिए किसानों को कंप्यूटर में दक्ष करने की आवश्यकता पर जोर दिया जाना चाहिए था। सरकार को किसानों के लिए लांग टर्म कोर्स पॉलिसी को अपनाना होगा तभी उनका संपूर्ण भला हो पाएगा। अर्थव्यवस्था को भी इससे पंख लगेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed