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गंधार नाटक का मंचन
Updated Fri, 07 Jul 2017 02:15 AM IST
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‘कोमल गंधार ’ नाटक का मंचन
चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में चल रहे थिएटर फेस्टिवल के तहत वीरवार को नाटक ‘कोमल गंधार ’ का मंचन किया गया। नाटक का आयोजन संस्कार भारती चंडीगढ़ द्वारा सांस्कृतिक विभाग चंडीगढ़ एवं हरियाणा सांस्कृतिक कार्य विभाग के सहयोग से प्रथम भरत मुनि नाट्य महोत्सव पर कराया गया।
नाटक की कहानी में एक व्यक्ति अपनी लड़की की शादी करने के लिए हस्तिनापुर आता है। वह आदमी बहुत बड़ा कूटनीतिज्ञ है। राज पाठ पाने के लिए वह अपनी बेटी की शादी हस्तिनापुर के राजकुमार से करता है जो कि अंधा होता है। लड़की का नाम गंधारी है। उसे लड़के के बारे में कुछ भी पता नही है। जब शादी के मंडप में गंधारी पहुंचती है तो उसे पता चलता है कि उसका पति धृतराष्ट्र है जो देख नहीं सकता है। गंधारी इस बात से पूरी तरह से टूट जाती है। वह संकल्प लेती है कि यदि उसके साथ उसके पिता ने ऐसा किया है तो भी समय के साथ अपनी आंखों पर तमाम उम्र काली पट्टी बांध लेती है। इस बात का फायदा उठाते हुए गंधारी का भाई शकुनि भी बहन के साथ रहना शुरू कर देता है। गंधारी आखिरी समय तक कौरवों को समझाती है और पांडवों को राजपाठ देने का समर्थन करती है। लेकिन पति धृतराष्ट्र और भाई शकुनि इस बात से सहमत नही।
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चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में चल रहे थिएटर फेस्टिवल के तहत वीरवार को नाटक ‘कोमल गंधार ’ का मंचन किया गया। नाटक का आयोजन संस्कार भारती चंडीगढ़ द्वारा सांस्कृतिक विभाग चंडीगढ़ एवं हरियाणा सांस्कृतिक कार्य विभाग के सहयोग से प्रथम भरत मुनि नाट्य महोत्सव पर कराया गया।
नाटक की कहानी में एक व्यक्ति अपनी लड़की की शादी करने के लिए हस्तिनापुर आता है। वह आदमी बहुत बड़ा कूटनीतिज्ञ है। राज पाठ पाने के लिए वह अपनी बेटी की शादी हस्तिनापुर के राजकुमार से करता है जो कि अंधा होता है। लड़की का नाम गंधारी है। उसे लड़के के बारे में कुछ भी पता नही है। जब शादी के मंडप में गंधारी पहुंचती है तो उसे पता चलता है कि उसका पति धृतराष्ट्र है जो देख नहीं सकता है। गंधारी इस बात से पूरी तरह से टूट जाती है। वह संकल्प लेती है कि यदि उसके साथ उसके पिता ने ऐसा किया है तो भी समय के साथ अपनी आंखों पर तमाम उम्र काली पट्टी बांध लेती है। इस बात का फायदा उठाते हुए गंधारी का भाई शकुनि भी बहन के साथ रहना शुरू कर देता है। गंधारी आखिरी समय तक कौरवों को समझाती है और पांडवों को राजपाठ देने का समर्थन करती है। लेकिन पति धृतराष्ट्र और भाई शकुनि इस बात से सहमत नही।
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