{"_id":"59455ad04f1c1b606b8b45b8","slug":"191497717456-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएसटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएसटी
Updated Sat, 17 Jun 2017 10:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीएसटी से फार्म मशीनरी पर पड़ेगी महंगाई की मार
सीआईसीयू का दावा, 12 फीसदी बढ़ जाएंगे मशीनरी के दाम
किसानों को राहत देने के लिए टैक्स माफ करे सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) का मानना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में अधिक दर होने के चलते फार्म मशीनरी पर महंगाई की मार पड़ेगी। चैंबर ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को तर्कों के साथ पत्र लिखकर मांग की है कि फार्म मशीनरी को जीएसटी से मुक्त किया जाए।
काबिलेजिक्र है कि देश के कृषि क्षेत्र में कई तरह की मशीनरी का उपयोग किया जाता है। कृषि प्रधान देश होने के नाते और किसानों को राहत देने के मकसद से फार्म मशीनरी मौजूदा सिस्टम के तहत उत्पाद शुल्क एवं वैल्यू एडेड टैक्स से मुक्त है। एक जुलाई से प्रस्तावित जीएसटी में फार्म मशीनरी पर 12 फीसदी कर लगाने का प्रस्ताव है। इसे लेकर मशीनरी निर्माताओं और कारोबारियों में रोष है। साफ है कि 12 फीसदी कर लगने से कृषि उपकरण मसलन रोटावेटर और थ्रेशर इत्यादि महंगे हो जाएंगे। यदि किसान को अब एक रोटावेटर एक लाख रुपये में मिल रहा है तो जीएसटी के बाद उसकी कीमत 1.12 लाख रुपये हो जाएगी।
मेकिन्से एवं सीआईआई द्वारा की गई स्टडी के अनुसार देश में 2030 तक अनाज की खपत दोगुना होने की संभावना है। खाद्य उत्पादों की खपत चार फीसदी वृद्धि दर के साथ 11 लाख करोड़ रुपये से बढ़ कर वर्ष 2030 तक 22.5 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। नतीजतन प्रति व्यक्ति खपत भी मौजूदा 9360 रुपये से बढ़ कर 15390 रुपये सालाना हो जाएगी।
विज्ञापन
फार्म मशीनरी के दम पर कृषि उत्पादन को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। इसके उपयोग से उत्पादकता में 12 से 34 फीसदी का इजाफा किया जा सकता है। बीज की बीस फीसदी तक बचत की जा सकती है। खाद की भी 15 से बीस फीसदी तक बचत हो सकती है। किसान की आमदनी 29 से 49 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है।
चैंबर के प्रधान अवतार सिंह और महासचिव उपकार सिंह आहूजा का कहना है कि यूरोप और अमेरिका के मुकाबले भारत में पहले ही फार्म मशीनरी का काफी कम उपयोग हो रहा है। देश की कुल कृषि योग्य जमीन के 21.30 फीसदी पर ही ट्रैक्टरों का उपयोग हो रहा है। जबकि बाकी एरिया में बैल या लोग खुद ही कृषि के काम पूरे करते हैं। सरकार एक तरफ किसानों की लागत कम करने के लिए विभिन्न उत्पादों एवं उपकरणों पर तरह तरह की सब्सिडी मुहैया करा रही है। जबकि दूसरी तरफ जीएसटी लगा कर कृषि मशीनरी को महंगा करने की कवायद की जा रही है। अवतार सिंह और उपकार सिंह ने सरकार से आग्रह किया है कि कृषि मशीनरी को जीएसटी से मुक्त करके राहत दी जाए।
विज्ञापन
सीआईसीयू का दावा, 12 फीसदी बढ़ जाएंगे मशीनरी के दाम
किसानों को राहत देने के लिए टैक्स माफ करे सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) का मानना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में अधिक दर होने के चलते फार्म मशीनरी पर महंगाई की मार पड़ेगी। चैंबर ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को तर्कों के साथ पत्र लिखकर मांग की है कि फार्म मशीनरी को जीएसटी से मुक्त किया जाए।
काबिलेजिक्र है कि देश के कृषि क्षेत्र में कई तरह की मशीनरी का उपयोग किया जाता है। कृषि प्रधान देश होने के नाते और किसानों को राहत देने के मकसद से फार्म मशीनरी मौजूदा सिस्टम के तहत उत्पाद शुल्क एवं वैल्यू एडेड टैक्स से मुक्त है। एक जुलाई से प्रस्तावित जीएसटी में फार्म मशीनरी पर 12 फीसदी कर लगाने का प्रस्ताव है। इसे लेकर मशीनरी निर्माताओं और कारोबारियों में रोष है। साफ है कि 12 फीसदी कर लगने से कृषि उपकरण मसलन रोटावेटर और थ्रेशर इत्यादि महंगे हो जाएंगे। यदि किसान को अब एक रोटावेटर एक लाख रुपये में मिल रहा है तो जीएसटी के बाद उसकी कीमत 1.12 लाख रुपये हो जाएगी।
विज्ञापन
मेकिन्से एवं सीआईआई द्वारा की गई स्टडी के अनुसार देश में 2030 तक अनाज की खपत दोगुना होने की संभावना है। खाद्य उत्पादों की खपत चार फीसदी वृद्धि दर के साथ 11 लाख करोड़ रुपये से बढ़ कर वर्ष 2030 तक 22.5 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। नतीजतन प्रति व्यक्ति खपत भी मौजूदा 9360 रुपये से बढ़ कर 15390 रुपये सालाना हो जाएगी।
विज्ञापन
फार्म मशीनरी के दम पर कृषि उत्पादन को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। इसके उपयोग से उत्पादकता में 12 से 34 फीसदी का इजाफा किया जा सकता है। बीज की बीस फीसदी तक बचत की जा सकती है। खाद की भी 15 से बीस फीसदी तक बचत हो सकती है। किसान की आमदनी 29 से 49 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है।
चैंबर के प्रधान अवतार सिंह और महासचिव उपकार सिंह आहूजा का कहना है कि यूरोप और अमेरिका के मुकाबले भारत में पहले ही फार्म मशीनरी का काफी कम उपयोग हो रहा है। देश की कुल कृषि योग्य जमीन के 21.30 फीसदी पर ही ट्रैक्टरों का उपयोग हो रहा है। जबकि बाकी एरिया में बैल या लोग खुद ही कृषि के काम पूरे करते हैं। सरकार एक तरफ किसानों की लागत कम करने के लिए विभिन्न उत्पादों एवं उपकरणों पर तरह तरह की सब्सिडी मुहैया करा रही है। जबकि दूसरी तरफ जीएसटी लगा कर कृषि मशीनरी को महंगा करने की कवायद की जा रही है। अवतार सिंह और उपकार सिंह ने सरकार से आग्रह किया है कि कृषि मशीनरी को जीएसटी से मुक्त करके राहत दी जाए।