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नीलेश मिश्रा
Updated Wed, 14 Jun 2017 01:52 AM IST
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अब मरीजों को मिलेगी कहानी की ‘डोज’
- सेलिब्रेटी नीलेश मिश्रा की कहानी पर हो रही रिसर्च
- रिसर्च के बाद कहानियां भेजी जाएंगी अस्पतालों में
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अब अस्पताल में कहानियां मरीजों का आत्मबल बढ़ाएंगी। रिसर्च के अनुसार मरीजों को जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए दवा के साथ कहानियों की डोज भी दी जाएगी। यह रिसर्च की जा रही है जाने माने गीतकार और कहानी एक्सपर्ट नीलेश मिश्रा की कहानियों पर। नीलेश मिश्रा की टीम अब ऐसी कहानियां तैयार कर रही है जो कि मरीजों को सुनाई जाएंगी और उससे उन मरीजों में आत्मबल बढ़ाया जा सके। मंगलवार को चंडीगढ़ आए नीलेश मिश्रा ने बताया कि अस्पतालों में कहानियां देने की योजना है। इसके लिए रिसर्च हो रही है और जैसे ही रिसर्च पूरी होगी तो उसके मुताबिक ही कहानियां देश के अस्पतालों में दी जाएंगी।
मूलतया लखनऊ के रहने वाले लेखक, गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर नीलेश मिश्रा नीलेश मिश्रा ने कहा कि अब कहानी एक्सप्रेस उनका एक बड़ा प्रोजेक्ट है। जिसकी कहानियां रेल के इर्द गिर्द हैं। इसमें कुल 12 कहानियां हैं। जिनको तीन स्थानीय भाषाओं हिंदी, तेलगू और तमिल में सुनाया गया है। इन कहानियों में रेल के छोटे से सफर के दौरान लंबी जिंदगी जीने वालों का जिक्र होगा। छोटी-छोटी बातों को गहराई और चिंतन के साथ पेश किया जाएगा। इन कहानियों में दर्द, मनोरंजन और एक अनोखी प्रेरणा का भी समावेश होगा। नीलेश मिश्रा ने कहा कि एक समय था जबकि रेलवे के सफर के दौरान हम अपनी पूड़ी और सब्जी दूसरे यात्रियों को देते थे। यह कहानियां कुछ उसी दौर की होंगी। एक था टाइगर जैसी मूवी का स्क्रीन प्ले लिखने वाले नीलेश मिश्रा ने कहा कि वास्तव में कहानियां एक शांत माहौल बनाती हैं। जो दिल को सुकून देती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियों को सुनने वाले अक्सर उनको फोन करते हैं कि उनकी कहानियों से काफी प्रेरणा मिलती है।
मंडली तैयार करती है कहानियां :
नीलेश मिश्रा ने कहा कि उनकी मंडलियां कहानी तैयार करती हैं। यदि कोई कहानी लिखता है तो वह भी अपनी कहानी को उनके मेल आईडी पर भेज सकता है। कहानी की एडिटिंग होती है और उसके बाद फाइनल कहानी तैयार होती है। नीलेश मिश्रा ने कहा कि वह कहानी सुनाने के लिए कोई प्रेक्टिस नहीं करते हैं। एक बार पढ़ते हैं और सुना डालते हैं।
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आत्मसात करना पड़ती है कहानी :
नीलेश मिश्रा ने कहा कि कहानी को आत्मसात करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार कैरेक्टर में इतना डूब जाते हैं कि गला तक रूंध जाता है। ऐसी स्थिति में रिकार्डिंग रोकनी पड़ जाती है। नीलेश मिश्रा ने कहा कि अब ऐसी कहानी तैयार की जा रही हैं जो एक घंटे की होंगी और उनको 15-15 मिनट रोजाना सुनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियां मोबाइल एप पर भी आसानी से सुनी जा सकती हैं।
ये हैं प्रमुख रचनाएं :
स्क्रीन राइटर - एक था टाइगर, गीतकार - जादू है नशा है (जिस्म), चलो तुमको लेकर चलें (जिस्म), बेपनाह प्यार है आजा (कृष्णा कॉटेज), मैंने दिल से कहा (रोग), आई एम इन लव (वंस अपोन ए टाइम इन मुंबई) और जिंदगी (बजरंगी भाईजान)।
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- सेलिब्रेटी नीलेश मिश्रा की कहानी पर हो रही रिसर्च
- रिसर्च के बाद कहानियां भेजी जाएंगी अस्पतालों में
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अब अस्पताल में कहानियां मरीजों का आत्मबल बढ़ाएंगी। रिसर्च के अनुसार मरीजों को जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए दवा के साथ कहानियों की डोज भी दी जाएगी। यह रिसर्च की जा रही है जाने माने गीतकार और कहानी एक्सपर्ट नीलेश मिश्रा की कहानियों पर। नीलेश मिश्रा की टीम अब ऐसी कहानियां तैयार कर रही है जो कि मरीजों को सुनाई जाएंगी और उससे उन मरीजों में आत्मबल बढ़ाया जा सके। मंगलवार को चंडीगढ़ आए नीलेश मिश्रा ने बताया कि अस्पतालों में कहानियां देने की योजना है। इसके लिए रिसर्च हो रही है और जैसे ही रिसर्च पूरी होगी तो उसके मुताबिक ही कहानियां देश के अस्पतालों में दी जाएंगी।
मूलतया लखनऊ के रहने वाले लेखक, गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर नीलेश मिश्रा नीलेश मिश्रा ने कहा कि अब कहानी एक्सप्रेस उनका एक बड़ा प्रोजेक्ट है। जिसकी कहानियां रेल के इर्द गिर्द हैं। इसमें कुल 12 कहानियां हैं। जिनको तीन स्थानीय भाषाओं हिंदी, तेलगू और तमिल में सुनाया गया है। इन कहानियों में रेल के छोटे से सफर के दौरान लंबी जिंदगी जीने वालों का जिक्र होगा। छोटी-छोटी बातों को गहराई और चिंतन के साथ पेश किया जाएगा। इन कहानियों में दर्द, मनोरंजन और एक अनोखी प्रेरणा का भी समावेश होगा। नीलेश मिश्रा ने कहा कि एक समय था जबकि रेलवे के सफर के दौरान हम अपनी पूड़ी और सब्जी दूसरे यात्रियों को देते थे। यह कहानियां कुछ उसी दौर की होंगी। एक था टाइगर जैसी मूवी का स्क्रीन प्ले लिखने वाले नीलेश मिश्रा ने कहा कि वास्तव में कहानियां एक शांत माहौल बनाती हैं। जो दिल को सुकून देती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियों को सुनने वाले अक्सर उनको फोन करते हैं कि उनकी कहानियों से काफी प्रेरणा मिलती है।
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मंडली तैयार करती है कहानियां :
नीलेश मिश्रा ने कहा कि उनकी मंडलियां कहानी तैयार करती हैं। यदि कोई कहानी लिखता है तो वह भी अपनी कहानी को उनके मेल आईडी पर भेज सकता है। कहानी की एडिटिंग होती है और उसके बाद फाइनल कहानी तैयार होती है। नीलेश मिश्रा ने कहा कि वह कहानी सुनाने के लिए कोई प्रेक्टिस नहीं करते हैं। एक बार पढ़ते हैं और सुना डालते हैं।
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आत्मसात करना पड़ती है कहानी :
नीलेश मिश्रा ने कहा कि कहानी को आत्मसात करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार कैरेक्टर में इतना डूब जाते हैं कि गला तक रूंध जाता है। ऐसी स्थिति में रिकार्डिंग रोकनी पड़ जाती है। नीलेश मिश्रा ने कहा कि अब ऐसी कहानी तैयार की जा रही हैं जो एक घंटे की होंगी और उनको 15-15 मिनट रोजाना सुनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियां मोबाइल एप पर भी आसानी से सुनी जा सकती हैं।
ये हैं प्रमुख रचनाएं :
स्क्रीन राइटर - एक था टाइगर, गीतकार - जादू है नशा है (जिस्म), चलो तुमको लेकर चलें (जिस्म), बेपनाह प्यार है आजा (कृष्णा कॉटेज), मैंने दिल से कहा (रोग), आई एम इन लव (वंस अपोन ए टाइम इन मुंबई) और जिंदगी (बजरंगी भाईजान)।