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खाली सीटों को भरने का रास्ता तलाशेंगे चेयरमैन
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खाली सीटों को भरने का रास्ता निकालेंगे चेयरमैन
- पीयू वीसी ने सभी विभाग अध्यक्षों को दिए आदेश
- हर साल दो से पांच फीसदी तक सीटें रह जाती हैं खाली
- कुछ सीटें एडमिशन के बाद भी होती हैं खाली, भरने के रास्ते भी निकाले जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में हर साल खाली रहने वाली सीटों को भरे जाने की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। इसके लिए सभी विभाग अध्यक्षों को वीसी प्रो. राजकुमार ने आदेश दिए हैं। शुरू से लेकर मध्य सत्र में यह सीटें किस नियमों से भरी जा सकती हैं और स्टूडेंट्स कैसे आ सकते हैं। इस पर चेयरमैन निर्णय लें ताकि आने वाले शैक्षिक सत्र में यह सीटें खाली न रहने पाएं।
आंकड़ों पर गौर करें तो पंजाब विश्वविद्यालय में 15 हजार सीटें हैं। इन सीटों पर हर साल दाखिले जुलाई से शुरू होते हैं जो अगस्त-सितंबर माह तक चलते हैं। पिछले वर्षों में दो से पांच फीसदी सीटें खाली भी रही हैं तो कुछ स्टूडेंट दाखिला लेने के बाद बीच में छोड़ गए। ऐसे में खाली सीटें रहने से पीयू को भी नुकसान है और यह सीट जरूरतमंद व मानक पूरे करने वाले स्टूडेंट्स को दाखिला दिया जा सकता है। पिछले साल भी दो फीसदी सीटें खाली रही थीं। दो दर्जन से अधिक स्टूडेंट मध्य सत्र में ही पढ़ाई छोड़ दिए थे। ऐसे में सीटें खाली हो गई।
इन खाली सीटों को भरने के लिए वीसी प्रो. राजकुमार ने योजना बनाई है। उन्होंने सभी विभाग अध्यक्षों से कहा है कि खाली सीटों को भरने के रास्ते वह निकालें। अपने-अपने विभाग में सीटें खाली न रहें, इस पर ध्यान दें। सीट खाली नहीं रहेगी तो रेंकिंग आदि में भी उसका लाभ मिलेगा। साथ ही पीयू को भी फीस आदि के जरिये लाभ होगा। बजट की पूर्ति भी इसके जरिये हो सकेगी। इसके लिए वीसी ने फरवरी तक का समय सभी विभाग अध्यक्षों को दिया है।
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कॉलेजों भी अपने बारे में सोचें
जिस तरह पीयू योजना बना रहा है। उसी तरह पीयू से संबद्घ 192 कॉलेज भी इसी तरह रास्ता निकाल सकते हैं ताकि उनके यहां भी सीटें खाली न रहें। मालूम हो कि पीयू व उससे संबद्घ इन कॉलेजों में हर साल लगभग 2.50 लाख स्टूडेंट्स शिक्षा पाते हैं। इसके अलावा 35 से 40 हजार स्टूडेंट हर साल प्राइवेट फार्म भरकर पढ़ाई करते हैं। इन सभी के एग्जाम परीक्षा नियंत्रक विभाग कराता है। इस साल यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में सीटें बढ़ने की उम्मीद है।
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- पीयू वीसी ने सभी विभाग अध्यक्षों को दिए आदेश
- हर साल दो से पांच फीसदी तक सीटें रह जाती हैं खाली
- कुछ सीटें एडमिशन के बाद भी होती हैं खाली, भरने के रास्ते भी निकाले जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में हर साल खाली रहने वाली सीटों को भरे जाने की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। इसके लिए सभी विभाग अध्यक्षों को वीसी प्रो. राजकुमार ने आदेश दिए हैं। शुरू से लेकर मध्य सत्र में यह सीटें किस नियमों से भरी जा सकती हैं और स्टूडेंट्स कैसे आ सकते हैं। इस पर चेयरमैन निर्णय लें ताकि आने वाले शैक्षिक सत्र में यह सीटें खाली न रहने पाएं।
आंकड़ों पर गौर करें तो पंजाब विश्वविद्यालय में 15 हजार सीटें हैं। इन सीटों पर हर साल दाखिले जुलाई से शुरू होते हैं जो अगस्त-सितंबर माह तक चलते हैं। पिछले वर्षों में दो से पांच फीसदी सीटें खाली भी रही हैं तो कुछ स्टूडेंट दाखिला लेने के बाद बीच में छोड़ गए। ऐसे में खाली सीटें रहने से पीयू को भी नुकसान है और यह सीट जरूरतमंद व मानक पूरे करने वाले स्टूडेंट्स को दाखिला दिया जा सकता है। पिछले साल भी दो फीसदी सीटें खाली रही थीं। दो दर्जन से अधिक स्टूडेंट मध्य सत्र में ही पढ़ाई छोड़ दिए थे। ऐसे में सीटें खाली हो गई।
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इन खाली सीटों को भरने के लिए वीसी प्रो. राजकुमार ने योजना बनाई है। उन्होंने सभी विभाग अध्यक्षों से कहा है कि खाली सीटों को भरने के रास्ते वह निकालें। अपने-अपने विभाग में सीटें खाली न रहें, इस पर ध्यान दें। सीट खाली नहीं रहेगी तो रेंकिंग आदि में भी उसका लाभ मिलेगा। साथ ही पीयू को भी फीस आदि के जरिये लाभ होगा। बजट की पूर्ति भी इसके जरिये हो सकेगी। इसके लिए वीसी ने फरवरी तक का समय सभी विभाग अध्यक्षों को दिया है।
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कॉलेजों भी अपने बारे में सोचें
जिस तरह पीयू योजना बना रहा है। उसी तरह पीयू से संबद्घ 192 कॉलेज भी इसी तरह रास्ता निकाल सकते हैं ताकि उनके यहां भी सीटें खाली न रहें। मालूम हो कि पीयू व उससे संबद्घ इन कॉलेजों में हर साल लगभग 2.50 लाख स्टूडेंट्स शिक्षा पाते हैं। इसके अलावा 35 से 40 हजार स्टूडेंट हर साल प्राइवेट फार्म भरकर पढ़ाई करते हैं। इन सभी के एग्जाम परीक्षा नियंत्रक विभाग कराता है। इस साल यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में सीटें बढ़ने की उम्मीद है।