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वार्ड डेवलपमेंट फंड में 10 लाख रुपये की बढ़ातरी
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वार्ड डेवलपमेंट फंड 10 लाख बढ़ाया
पार्षदों को हर साल मिलने वाला फंड 40 से 50 लाख रुपये किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नगर निगम के पार्षदों को अब हर साल वार्ड डेवलपमेंट फंड 40 की जगह 50 लाख मिलेंगे। नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में वार्ड डेवलपमेंट फंड में 10 लाख रुपये हर साल बढ़ोतरी का फैसला लिया गया।
इससे पार्षद अपने वार्ड में हर साल ज्यादा काम करवा पाएंगे। पार्षद वार्ड डेवलपमेंट फंड से जल्दी काम होता है, क्योंकि इसके लिए काम के प्रस्ताव को पास करवाने के लिए सदन में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। पार्षदों को सिर्फ काम करवाने की लेटर चीफ इंजीनियर को देना होता है। उसके बाद टेंडर अलॉट कर काम करवा दिया जाता है, जबकि सदन में प्रस्ताव लाने, पास करवाने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने में 4 से 6 माह लग जाते हैं। हालांकि, बचा हुआ डेवलेपमेंट फंड अगले साल मिलने वाले नए फंड में शामिल हो जाता है।
पार्षदों का वार्ड डेवलपमेंट फंड चाहे 10 लाख रुपये बढ़ा दिया गया है, लेकिन अधिकतर पार्षद एक साल में अपना वार्ड डेवलपमेंट फंड पूरा खर्च नहीं कर पाते हैं। पिछले साल भी बहुत से पार्षद साल के अंत तक 40 लाख रुपये खर्च नहीं कर पाए थे। पार्षदों का कहना है कि 2018 की शुरुआत में नगर निगम के पास फंड की भारी कमी थी, जिस कारण अधिकारियों ने उन्हें शुरू में फंड नहीं रिलीज किया था। फंड देरी से मिलने के कारण साल के अंत तक पैसे खर्च नहीं हो पाए थे।
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पार्षदों को हर साल मिलने वाला फंड 40 से 50 लाख रुपये किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नगर निगम के पार्षदों को अब हर साल वार्ड डेवलपमेंट फंड 40 की जगह 50 लाख मिलेंगे। नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में वार्ड डेवलपमेंट फंड में 10 लाख रुपये हर साल बढ़ोतरी का फैसला लिया गया।
इससे पार्षद अपने वार्ड में हर साल ज्यादा काम करवा पाएंगे। पार्षद वार्ड डेवलपमेंट फंड से जल्दी काम होता है, क्योंकि इसके लिए काम के प्रस्ताव को पास करवाने के लिए सदन में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। पार्षदों को सिर्फ काम करवाने की लेटर चीफ इंजीनियर को देना होता है। उसके बाद टेंडर अलॉट कर काम करवा दिया जाता है, जबकि सदन में प्रस्ताव लाने, पास करवाने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने में 4 से 6 माह लग जाते हैं। हालांकि, बचा हुआ डेवलेपमेंट फंड अगले साल मिलने वाले नए फंड में शामिल हो जाता है।
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पार्षदों का वार्ड डेवलपमेंट फंड चाहे 10 लाख रुपये बढ़ा दिया गया है, लेकिन अधिकतर पार्षद एक साल में अपना वार्ड डेवलपमेंट फंड पूरा खर्च नहीं कर पाते हैं। पिछले साल भी बहुत से पार्षद साल के अंत तक 40 लाख रुपये खर्च नहीं कर पाए थे। पार्षदों का कहना है कि 2018 की शुरुआत में नगर निगम के पास फंड की भारी कमी थी, जिस कारण अधिकारियों ने उन्हें शुरू में फंड नहीं रिलीज किया था। फंड देरी से मिलने के कारण साल के अंत तक पैसे खर्च नहीं हो पाए थे।
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