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एक दिन में डॉग बाइट के 60 से ज्यादा नए केस
Updated Tue, 19 Jun 2018 01:32 AM IST
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एक दिन में डॉग बाइट के 60 से ज्यादा नए केस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शहर में कुत्तों का आतंक कितना है, इसका अंदाजा डॉग बाइट के केसों की संख्या से लगाया जा सकता है। सोमवार को शहर की दोनों डॉग बाइट क्लीनिक में कुत्ते के काटने के 60 से ज्यादा केस आए। सेक्टर 19 की डिस्पेंसरी में 44 और सेक्टर 38 की डिस्पेंसरी में 16। ये सभी फ्रेश केस हैं। हालांकि इनमें से 15 से 20 केस बाहर के होंगे, जबकि बाकी केस चंडीगढ़ के हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि इनमें मनीमाजरा हास्पिटल, सेक्टर 16, सेक्टर 22 और सेक्टर 45 के केसों की संख्या को शामिल नहीं किया गया। जबकि यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है। इनमें कैटेगिरी बी और कैटेगिरी सी के भी केस शामिल हैं। कैटेगिरी बी में खरोंच या निशान के केस होते हैं, जबकि सी में काटने पर खून निकलने के केस शामिल होते हैं। दोनों का अलग-अलग इलाज है।
डाग बाइट के तीन ग्रेड होते हैं
ग्रेड वन
कुत्ता प्यार से भी चाटता है, तो होशियार हो जाएं।
कुत्ते में रेबीज़ का इंफेक्शन होगा तो आपके शरीर में भी रेबीज़ के वायरस आने की आशंका बनी रहती है। खासकर अगर कुत्ते ने शरीर के उस हिस्से को चाट लिया हो, जहां चोट की वजह से मामूली कट या खरोंच हो।
ग्रेड टू
अगर किसी कुत्ते के काटने के बाद स्किन पर उसके एक या दो दांतों के निशान दिखाई पड़ते हैं, तो समझिए कि एहतियात बरतने की जरूरत है।
बहुत से लोग यह सोचकर कि कुत्ते को रैबीज़ नहीं होगा, एक या दो दांतों के निशान को मामूली जख्म की तरह ट्रीट करते हैं।
ऐसी अनदेखी घातक साबित हो सकती है, क्योंकि रेबीज़ का वायरस एक बार शरीर में जाकर सालों तक रह जाता है।
ग्रेड थ्री
कुत्ता आमतौर पर हाथ, पैर या चेहरा इन तीन जगहों में से किसी एक जगह पर ही काटता है।
अगर हाथ या चेहरे पर काटने के बाद एक भी गहरा निशान बनता है या दांतों के तीन-चार निशान दिखाई देते हैं तो यह खतरनाक है।
किसी जानवर के काटने या डसने से जानलेवा वायरस या जहर शरीर में दाखिल हो सकता है।
कुत्ता काटने पर क्या करें
रैबीज़ से बचने के लिए कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने के 24 घंटे के अंदर एंटी रेबीज़ इंजेक्शन लगवाएं और उसका इलाज शुरू करवाएं। कुत्ते के काटने के बाद उस हिस्से को सबसे पहले पानी से खूब अच्छी तरह धोएं। फिर साबुन लगा कर धोएं। वहां पट्टी न बांधें। पहला एंटी रेबीज़ इंजेक्शन 24 घंटे के अंदर जरूर लगवा लें।
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ऐसे करे बचाव
कुत्ता जब भौंके तो डरें या भागे नहीं, उसे नजरअंदाज करें।
अपनी बॉडी लैंग्वेज को सामान्य बनाए रखें और जताएं कि आप उससे डर नहीं रहे हैं।
अपने हावभाव से यह जताइए कि आप उसका कोई नुकसान नहीं करने वाले हैं।
कुत्तों को कभी भी पत्थर या डंडा न मारें इससे वह अपने बचाव में काट सकते हैं।
जिस कुतिया ने बच्चे दिए हों उसके नजदीक न जाएं वह अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए उग्र होकर काट सकती है।
यदि कुत्ता गुर्रा रहा हो या दांत दिखा रहा हो या नाक उठा रहा हो और उसकी पूछ उठी हो तो उससे दूर रहें।
कुत्ते को देखकर भागें मत, बिना पीठ किए आराम से चलें।
बच्चों को अनजान कुत्तों को सम्पर्क से बचायें।
कोट
रविवार रात 10 बजे सेक्टर 32 जीएमसीएच के बाहर मुझे एक कुत्ते ने काटा। वहां पर 20 से 25 कुत्ते हमेशा होते हैं। बच्चों के लिए तो बिल्कुल सुरक्षित नहीं है।
-देविंदर, निवासी सेक्टर 20 चंडीगढ़
मैं शनिवार शाम जब पार्क में खेल रहा था, तभी मेरे पालतू कुत्ते ने ही मुझे काट लिया। मैं सेक्टर 19 में ही इलाज कराने आया हूं।
-अंश, निवासी रामदरबार
मेरे दोनों हाथों और पैर में कुत्ते ने काटा है। आप समझ सकते हैं कि शहर के कुत्ते कितने खतरनाक हैं। मेरे हाथों में सूजन तक आ चुकी है।
-संदीप, निवासी चंडीगढ़
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शहर में कुत्तों का आतंक कितना है, इसका अंदाजा डॉग बाइट के केसों की संख्या से लगाया जा सकता है। सोमवार को शहर की दोनों डॉग बाइट क्लीनिक में कुत्ते के काटने के 60 से ज्यादा केस आए। सेक्टर 19 की डिस्पेंसरी में 44 और सेक्टर 38 की डिस्पेंसरी में 16। ये सभी फ्रेश केस हैं। हालांकि इनमें से 15 से 20 केस बाहर के होंगे, जबकि बाकी केस चंडीगढ़ के हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि इनमें मनीमाजरा हास्पिटल, सेक्टर 16, सेक्टर 22 और सेक्टर 45 के केसों की संख्या को शामिल नहीं किया गया। जबकि यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है। इनमें कैटेगिरी बी और कैटेगिरी सी के भी केस शामिल हैं। कैटेगिरी बी में खरोंच या निशान के केस होते हैं, जबकि सी में काटने पर खून निकलने के केस शामिल होते हैं। दोनों का अलग-अलग इलाज है।
डाग बाइट के तीन ग्रेड होते हैं
ग्रेड वन
कुत्ता प्यार से भी चाटता है, तो होशियार हो जाएं।
कुत्ते में रेबीज़ का इंफेक्शन होगा तो आपके शरीर में भी रेबीज़ के वायरस आने की आशंका बनी रहती है। खासकर अगर कुत्ते ने शरीर के उस हिस्से को चाट लिया हो, जहां चोट की वजह से मामूली कट या खरोंच हो।
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अगर किसी कुत्ते के काटने के बाद स्किन पर उसके एक या दो दांतों के निशान दिखाई पड़ते हैं, तो समझिए कि एहतियात बरतने की जरूरत है।
बहुत से लोग यह सोचकर कि कुत्ते को रैबीज़ नहीं होगा, एक या दो दांतों के निशान को मामूली जख्म की तरह ट्रीट करते हैं।
ऐसी अनदेखी घातक साबित हो सकती है, क्योंकि रेबीज़ का वायरस एक बार शरीर में जाकर सालों तक रह जाता है।
ग्रेड थ्री
कुत्ता आमतौर पर हाथ, पैर या चेहरा इन तीन जगहों में से किसी एक जगह पर ही काटता है।
अगर हाथ या चेहरे पर काटने के बाद एक भी गहरा निशान बनता है या दांतों के तीन-चार निशान दिखाई देते हैं तो यह खतरनाक है।
किसी जानवर के काटने या डसने से जानलेवा वायरस या जहर शरीर में दाखिल हो सकता है।
कुत्ता काटने पर क्या करें
रैबीज़ से बचने के लिए कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने के 24 घंटे के अंदर एंटी रेबीज़ इंजेक्शन लगवाएं और उसका इलाज शुरू करवाएं। कुत्ते के काटने के बाद उस हिस्से को सबसे पहले पानी से खूब अच्छी तरह धोएं। फिर साबुन लगा कर धोएं। वहां पट्टी न बांधें। पहला एंटी रेबीज़ इंजेक्शन 24 घंटे के अंदर जरूर लगवा लें।
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कुत्ता जब भौंके तो डरें या भागे नहीं, उसे नजरअंदाज करें।
अपनी बॉडी लैंग्वेज को सामान्य बनाए रखें और जताएं कि आप उससे डर नहीं रहे हैं।
अपने हावभाव से यह जताइए कि आप उसका कोई नुकसान नहीं करने वाले हैं।
कुत्तों को कभी भी पत्थर या डंडा न मारें इससे वह अपने बचाव में काट सकते हैं।
जिस कुतिया ने बच्चे दिए हों उसके नजदीक न जाएं वह अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए उग्र होकर काट सकती है।
यदि कुत्ता गुर्रा रहा हो या दांत दिखा रहा हो या नाक उठा रहा हो और उसकी पूछ उठी हो तो उससे दूर रहें।
कुत्ते को देखकर भागें मत, बिना पीठ किए आराम से चलें।
बच्चों को अनजान कुत्तों को सम्पर्क से बचायें।
कोट
रविवार रात 10 बजे सेक्टर 32 जीएमसीएच के बाहर मुझे एक कुत्ते ने काटा। वहां पर 20 से 25 कुत्ते हमेशा होते हैं। बच्चों के लिए तो बिल्कुल सुरक्षित नहीं है।
-देविंदर, निवासी सेक्टर 20 चंडीगढ़
मैं शनिवार शाम जब पार्क में खेल रहा था, तभी मेरे पालतू कुत्ते ने ही मुझे काट लिया। मैं सेक्टर 19 में ही इलाज कराने आया हूं।
-अंश, निवासी रामदरबार
मेरे दोनों हाथों और पैर में कुत्ते ने काटा है। आप समझ सकते हैं कि शहर के कुत्ते कितने खतरनाक हैं। मेरे हाथों में सूजन तक आ चुकी है।
-संदीप, निवासी चंडीगढ़