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पंचकूला नगर निगम में एफडी घोटाला: कोटक बैंक पर 160 करोड़ के गबन के आरोप, फर्जी खातों में ट्रांसफर कर रकम गायब
Wed, 25 Mar 2026 02:00 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 02:00 AM IST
सार
मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये की एक एफडी मैच्योर होने पर राशि ट्रांसफर करने को कहा। बैंक की ओर से दिए गए स्टेटमेंट में रकम ट्रांसफर दिखाई गई लेकिन निगम के खाते में पैसा नहीं पहुंचा। जांच में सामने आया कि स्टेटमेंट फर्जी था।
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पंचकूला नगर निगम
- फोटो : संवाद
विस्तार
नगर निगम पंचकूला में 160 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले का मामला सामने आया है। कोटक महिंद्रा बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने नगर निगम की जमा राशि फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दी और अधिकारियों को कागजी रिकॉर्ड व फर्जी स्टेटमेंट देकर गुमराह करते रहे।
नगर निगम ने अलग-अलग समय पर करीब 160 करोड़ रुपये की एफडी बैंक में जमा कराई थी। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने मिलीभगत कर जाली खाते खोलकर आरटीजीएस के माध्यम से राशि वहां ट्रांसफर कर दी। इस दौरान फर्जी हस्ताक्षर और जाली मोहरों का भी इस्तेमाल किया गया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये की एक एफडी मैच्योर होने पर राशि ट्रांसफर करने को कहा। बैंक की ओर से दिए गए स्टेटमेंट में रकम ट्रांसफर दिखाई गई लेकिन निगम के खाते में पैसा नहीं पहुंचा। जांच में सामने आया कि स्टेटमेंट फर्जी था। इसके बाद अन्य एफडी की जांच में पता चला कि बैंक रिकॉर्ड में निगम की कोई एफडी मौजूद ही नहीं है और सभी दस्तावेज जाली हैं।
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नगर निगम प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बैंक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही राज्य सरकार को पत्र लिखकर बैंक को सरकारी पैनल से बाहर करने की सिफारिश की गई है।
गौरतलब है कि हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के मामले ने भी सुर्खियां बटोरी थीं। अब इस नए घोटाले ने निजी बैंकों में जमा सरकारी धन की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पैनल से हटाने के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। कुल कितनी राशि का गायब हुई है इसकी जांच की जा रही है। नगर निगम के लीगल और अकाउंट शाखा की समीक्षा चल रही है। - विनय कुमार कमिश्नर, नगर निगम पंचकूला।
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नगर निगम ने अलग-अलग समय पर करीब 160 करोड़ रुपये की एफडी बैंक में जमा कराई थी। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने मिलीभगत कर जाली खाते खोलकर आरटीजीएस के माध्यम से राशि वहां ट्रांसफर कर दी। इस दौरान फर्जी हस्ताक्षर और जाली मोहरों का भी इस्तेमाल किया गया।
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मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये की एक एफडी मैच्योर होने पर राशि ट्रांसफर करने को कहा। बैंक की ओर से दिए गए स्टेटमेंट में रकम ट्रांसफर दिखाई गई लेकिन निगम के खाते में पैसा नहीं पहुंचा। जांच में सामने आया कि स्टेटमेंट फर्जी था। इसके बाद अन्य एफडी की जांच में पता चला कि बैंक रिकॉर्ड में निगम की कोई एफडी मौजूद ही नहीं है और सभी दस्तावेज जाली हैं।
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नगर निगम प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बैंक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही राज्य सरकार को पत्र लिखकर बैंक को सरकारी पैनल से बाहर करने की सिफारिश की गई है।
गौरतलब है कि हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के मामले ने भी सुर्खियां बटोरी थीं। अब इस नए घोटाले ने निजी बैंकों में जमा सरकारी धन की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पैनल से हटाने के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। कुल कितनी राशि का गायब हुई है इसकी जांच की जा रही है। नगर निगम के लीगल और अकाउंट शाखा की समीक्षा चल रही है। - विनय कुमार कमिश्नर, नगर निगम पंचकूला।