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राष्ट्रपति अवॉर्डी शिक्षक की अवमानना याचिका पर शिक्षा सचिव को नोटिस, जानिए क्या है मामला
Thu, 11 Jul 2019 02:20 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jul 2019 02:20 AM IST
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उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके शिक्षक संदीप कुमार को रिलीव करने पर रोक केआदेश का पालन न करना चंडीगढ़ के शिक्षा सचिव को भारी पड़ गया। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने अब शिक्षा सचिव को हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना का नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
संदीप ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि वह 2015 से हल्लो माजरा के स्कूल में शिक्षण का कार्य कर रहा है। मार्च माह में उसे चंडीगढ़ से रिलीव कर उसके मूल राज्य में वापस भेजने के आदेश जारी कर दिए गए थे। इस आदेश के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार और यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। नोटिस का जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने 14 मई को याची को रिलीव करने ओर मूल राज्य में वापस भेजने के आदेश पर रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद संदीप को स्कूल में ज्वाइन नहीं करवाया गया। इससे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है। याची ने कहा कि उसे ज्वाइन न करने देना हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना और हाईकोर्ट का अनादर है। ऐसे में दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए और याची को ज्वाइनिंग दी जानी चाहिए। अपने पक्ष में दलील देते हुए याची ने बताया कि उसको रिलीव करने का निर्णय झूृठी शिकायतों के आधार पर लिया गया है और जांच के दौरान भी याची का रवैया बिलकुल सही था। इसके साथ ही याची को उसके उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रपति भी सम्मानित कर चुके हैं।
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संदीप ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि वह 2015 से हल्लो माजरा के स्कूल में शिक्षण का कार्य कर रहा है। मार्च माह में उसे चंडीगढ़ से रिलीव कर उसके मूल राज्य में वापस भेजने के आदेश जारी कर दिए गए थे। इस आदेश के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार और यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। नोटिस का जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने 14 मई को याची को रिलीव करने ओर मूल राज्य में वापस भेजने के आदेश पर रोक लगा दी थी।
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हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद संदीप को स्कूल में ज्वाइन नहीं करवाया गया। इससे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है। याची ने कहा कि उसे ज्वाइन न करने देना हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना और हाईकोर्ट का अनादर है। ऐसे में दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए और याची को ज्वाइनिंग दी जानी चाहिए। अपने पक्ष में दलील देते हुए याची ने बताया कि उसको रिलीव करने का निर्णय झूृठी शिकायतों के आधार पर लिया गया है और जांच के दौरान भी याची का रवैया बिलकुल सही था। इसके साथ ही याची को उसके उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रपति भी सम्मानित कर चुके हैं।
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