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पचंकूलाः लावारिस कुत्तों के स्थायी समाधान पर विधायक ने जताई असमर्थता, बोले- पूरे देश की समस्या
Wed, 10 Jul 2019 11:42 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jul 2019 11:42 AM IST
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ज्ञानचंद गुप्ता
- फोटो : File Photo
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पंचकूला में बढ़ रहे स्ट्रे डॉग्स के स्थायी समाधान पर विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने असमर्थता जताई है। उन्होंने कहा कि स्ट्रे डॉग्स की प्रॉब्लम केवल पंचकूला में ही नहीं बल्कि पूरे देश में है। इसका मुख्य कारण है एनिमल एक्ट। जब तक एक्ट में संशोधन नहीं होगा तब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि सुखदर्शनपुर में नगर निगम की ओर से डॉग पॉन्ड का निर्माण करवाया जा रहा है।
इसकी कुल क्षमता करीब दो हजार है, जबकि शहर में दस हजार से अधिक स्ट्रे डॉग्स हैं। ऐसे में पॉन्ड में कितने डॉग्स को रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम डॉग्स की संख्या कम करने के लिए लगातार स्टरलाइजेशन करवा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया के बाद उन्हें वहीं छोड़ना पड़ रहा है। वह चार साल की बच्ची के साथ घटी घटना से आहत हैं और निगम परिवार का पूरा सहयोग कर रहा है। यदि निगम को फंड की आवश्यकता पड़ी तो मुहैया करवाया जाएगा।
अशांति की राह पर पंचकूला शहर
नगर निगम से रिटायर ईओ और वर्तमान में जननायक जनता पार्टी के शहरी प्रधान ओपी सिहाग का कहना है कि चार साल की बच्ची अनन्या के साथ हुई घटना ने झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि पंचकूला शहर को कभी शांति के लिए जाना जाता था, लेकिन बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि अब यह शहर अशांति के रूप में पहचाना जाने लगा है।
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उन्होंने कहा कि शहर में लावारिस पशु आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। बंदर और कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अपराध की बात करें तो चरम सीमा पर है। स्नैचिंग और छेड़छाड़ की घटनाओं से महिलाओं और युवतियों ने घर से अकेले निकलना बंद कर दिया। अपराधी कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। यह सब सरकार की उदासीनता का ही परिणाम है।
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इसकी कुल क्षमता करीब दो हजार है, जबकि शहर में दस हजार से अधिक स्ट्रे डॉग्स हैं। ऐसे में पॉन्ड में कितने डॉग्स को रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम डॉग्स की संख्या कम करने के लिए लगातार स्टरलाइजेशन करवा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया के बाद उन्हें वहीं छोड़ना पड़ रहा है। वह चार साल की बच्ची के साथ घटी घटना से आहत हैं और निगम परिवार का पूरा सहयोग कर रहा है। यदि निगम को फंड की आवश्यकता पड़ी तो मुहैया करवाया जाएगा।
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अशांति की राह पर पंचकूला शहर
नगर निगम से रिटायर ईओ और वर्तमान में जननायक जनता पार्टी के शहरी प्रधान ओपी सिहाग का कहना है कि चार साल की बच्ची अनन्या के साथ हुई घटना ने झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि पंचकूला शहर को कभी शांति के लिए जाना जाता था, लेकिन बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि अब यह शहर अशांति के रूप में पहचाना जाने लगा है।
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उन्होंने कहा कि शहर में लावारिस पशु आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। बंदर और कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अपराध की बात करें तो चरम सीमा पर है। स्नैचिंग और छेड़छाड़ की घटनाओं से महिलाओं और युवतियों ने घर से अकेले निकलना बंद कर दिया। अपराधी कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। यह सब सरकार की उदासीनता का ही परिणाम है।
बिना किसी प्लानिंग के चल रहा नगर निगम
राकेश अग्रवाल का कहना है कि नगर निगम बिना किसी प्लानिंग के पैसे को खर्च कर रहा है। यही कारण है कि सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। निगम स्ट्रे डॉग्स का स्टरलाइजेशन तो करवा रहा है लेकिन इसके लिए स्टडी नहीं की गई है। इसलिए लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ठोस प्लानिंग को लेकर कई बार पत्राचार किया। लेकिन अधिकारियों ने गौर नहीं किया।
सेक्टर-20 में सबसे ज्यादा स्ट्रे डॉग्स का आतंक
सेक्टर-20 के लोगों को सबसे ज्यादा स्ट्रे डॉग्स का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मौजूदा स्थिति यह कि शाम और रात के समय घर से सड़क पर निकला मुश्किल हो जाता है। कई बार तो सब्जी लेकर लौटने के दौरान डॉग्स घेर लेते हैं। सड़कों पर डॉग्स के झुंड देखे जा सकते हैं। लोगों ने बताया कि सेक्टर-20 से लोकर पीरमुच्छला तक मेन सड़क के दोनों किनारे डॉग्स दिखते हैं। कई बार तो वह बाइक सवारों का पीछा भी करते हैं और घेर लेते हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सेक्टर-20 में सबसे ज्यादा स्ट्रे डॉग्स का आतंक
सेक्टर-20 के लोगों को सबसे ज्यादा स्ट्रे डॉग्स का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मौजूदा स्थिति यह कि शाम और रात के समय घर से सड़क पर निकला मुश्किल हो जाता है। कई बार तो सब्जी लेकर लौटने के दौरान डॉग्स घेर लेते हैं। सड़कों पर डॉग्स के झुंड देखे जा सकते हैं। लोगों ने बताया कि सेक्टर-20 से लोकर पीरमुच्छला तक मेन सड़क के दोनों किनारे डॉग्स दिखते हैं। कई बार तो वह बाइक सवारों का पीछा भी करते हैं और घेर लेते हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
एनिमल एक्ट: वह जो आप जानने चाहते है
- भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक किसी पशु को मारना या अपंग करना, भले ही वह आवारा क्यों न हो, दंडनीय अपराध है।
- इस नियम के तहत कुत्तों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। पालतू और आवारा। कोई भी व्यक्ति या स्थानीय प्रशासन पशु कल्याण संस्था के सहयोग से आवारा कुत्तों का बर्थ कंट्रोल ऑपरेशन कर सकती है. उन्हें मारना गैरकानूनी है।
- जानवर को पर्याप्त भोजन, पानी, शरण देने से इनकार करना और लंबे समय तक बांधे रखना दंडनीय अपराध है। इसके लिए जुर्माना या तीन महीने की सजा या फिर दोनों हो सकते हैं।
- स्लॉटर हाउस रूल्स 2001 के मुताबिक देश के किसी भी हिस्से में पशु बलि देना गैरकानूनी है।
- चिड़ियाघर और उसके परिसर में जानवरों को चिढ़ाना, खाना देना या तंग करना दंडनीय अपराध है। पीसीए के तहत ऐसा करने वाले को तीन साल की सजा, 25 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- पशुओं को असुविधा में रखकर दर्द पहुंचाकर या परेशान करते हुए किसी भी गाड़ी में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मोटर व्हीकल एक्ट और पीसीए एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है।
- किसी भी जंगली जानवर को पकड़ना, फंसाना, जहर देना या लालच देना दंडनीय अपराध है। इसके दोषी को सात साल की सजा या 25 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत बंदरों को कानूनी सुरक्षा दी गई है। कानून कहता है कि बंदरों से नुमाइश करवाना या उन्हें कैद में रखना गैरकानूनी है।
- इस नियम के तहत कुत्तों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। पालतू और आवारा। कोई भी व्यक्ति या स्थानीय प्रशासन पशु कल्याण संस्था के सहयोग से आवारा कुत्तों का बर्थ कंट्रोल ऑपरेशन कर सकती है. उन्हें मारना गैरकानूनी है।
- जानवर को पर्याप्त भोजन, पानी, शरण देने से इनकार करना और लंबे समय तक बांधे रखना दंडनीय अपराध है। इसके लिए जुर्माना या तीन महीने की सजा या फिर दोनों हो सकते हैं।
- स्लॉटर हाउस रूल्स 2001 के मुताबिक देश के किसी भी हिस्से में पशु बलि देना गैरकानूनी है।
- चिड़ियाघर और उसके परिसर में जानवरों को चिढ़ाना, खाना देना या तंग करना दंडनीय अपराध है। पीसीए के तहत ऐसा करने वाले को तीन साल की सजा, 25 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- पशुओं को असुविधा में रखकर दर्द पहुंचाकर या परेशान करते हुए किसी भी गाड़ी में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मोटर व्हीकल एक्ट और पीसीए एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है।
- किसी भी जंगली जानवर को पकड़ना, फंसाना, जहर देना या लालच देना दंडनीय अपराध है। इसके दोषी को सात साल की सजा या 25 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत बंदरों को कानूनी सुरक्षा दी गई है। कानून कहता है कि बंदरों से नुमाइश करवाना या उन्हें कैद में रखना गैरकानूनी है।