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यूटी प्रशासक बदनौर के ड्रीम प्रोजेक्ट पर लगा ग्रहण, बनेंगे 296 बस क्यू शेल्टर, दावा- टेंडर जल्द
Mon, 08 Jul 2019 11:03 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2019 11:03 AM IST
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बस क्यू शैल्टर
- फोटो : फाइल फोटो
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चंडीगढ़वासियों को विदेश की तर्ज पर यात्री सुविधा मुहैया कराने की योजना सिटी ब्यूटीफुल में अब तक परवान नहीं चढ़ सकी है। दो साल पहले सिटी में अत्याधुनिक बस क्यू शेल्टर बनवाने की कवायद हुई थी, लेकिन डिपार्टमेंट की लापरवाही के चलते अब तक टेंडर तक नहीं हो सके हैं। यह हाल तब है, जब बस क्यू शेल्टर को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जा रहा है। एक माह पूर्व फिर से शहर में 296 बस क्यू शेल्टर बनवाने केलिए टेंडर कॉल करने की बात सामने आई थी, लेकिन इसे फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
यात्रियों को बस के इंतजार में सड़क किनारे खड़े न होना पड़े, इसलिए दो साल पहले प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने शहर में अत्याधुनिक बस क्यू शेल्टर बनवाने की योजना बनाई थी। प्रशासन के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से कई टेंडर निकालने की पहल की गई, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। यही वजह है कि प्रशासक के ड्रीम प्रोजेक्ट को दो साल बीत जाने के बाद भी रफ्तार नहीं मिल पाई है। इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने बताया कि जल्द ही बस क्यू शेल्टर के लिए टेंडर निकाले जाएंगे। इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
ऐसे बनेंगे बस क्यू शेल्टर
शहर में 296 बस क्यू शेल्टर बनाए जाने हैं। सैंपल के तौर पर सेक्टर 17 के हिमालय मार्ग पर प्रशासन के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से लोहे का एक बस क्यू शेल्टर बनवाया गया है। शहर के कुल 66 जगहों पर लोहे के बस क्यू शेेल्टर बने थे, लेकिन यहां से लोग लोहे को निकाल ले गए। इसके बाद ये बस क्यू शेल्टर बदहाल पड़े हैं। सेक्टर 17 के बस क्यू शेल्टर को छोड़ दिया जाए तो लोहे के हटाए गए बस क्यू शेल्टर वाली जगहों पर 65 नए बनने हैं। इसके अलावा शहर में 230 बस क्यू शेल्टर नई जगह पर बनाने का प्लान है, लेकिन अभी तक इन पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
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इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट का यह है प्लान
प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग की मानें तो एडवरटाइजमेंट लगाने वाली कंपनियों से 296 बस क्यू शेल्टर बनवाने का टेंडर करने के लिए एक एजेंडा तैयार किया गया है। जल्द ही इसके लिए टेंडर भी निकाल दिए जाएंगे। कंपनियों को टेंडर अलॉट होने के सवा साल भीतर सिटी में सभी बस क्यू शेल्टर बनाना होगा। इसके बाद कंपनियों को 8 साल तक इन बस क्यू शेल्टर को एडवरटाइजमेंट के लिए दिया जाएगा। समय पूरा होने के बाद प्रशासन का इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट इन्हें अपने अंडर में ले लेगा।
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यात्रियों को बस के इंतजार में सड़क किनारे खड़े न होना पड़े, इसलिए दो साल पहले प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने शहर में अत्याधुनिक बस क्यू शेल्टर बनवाने की योजना बनाई थी। प्रशासन के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से कई टेंडर निकालने की पहल की गई, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। यही वजह है कि प्रशासक के ड्रीम प्रोजेक्ट को दो साल बीत जाने के बाद भी रफ्तार नहीं मिल पाई है। इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने बताया कि जल्द ही बस क्यू शेल्टर के लिए टेंडर निकाले जाएंगे। इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
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ऐसे बनेंगे बस क्यू शेल्टर
शहर में 296 बस क्यू शेल्टर बनाए जाने हैं। सैंपल के तौर पर सेक्टर 17 के हिमालय मार्ग पर प्रशासन के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से लोहे का एक बस क्यू शेल्टर बनवाया गया है। शहर के कुल 66 जगहों पर लोहे के बस क्यू शेेल्टर बने थे, लेकिन यहां से लोग लोहे को निकाल ले गए। इसके बाद ये बस क्यू शेल्टर बदहाल पड़े हैं। सेक्टर 17 के बस क्यू शेल्टर को छोड़ दिया जाए तो लोहे के हटाए गए बस क्यू शेल्टर वाली जगहों पर 65 नए बनने हैं। इसके अलावा शहर में 230 बस क्यू शेल्टर नई जगह पर बनाने का प्लान है, लेकिन अभी तक इन पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
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इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट का यह है प्लान
प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग की मानें तो एडवरटाइजमेंट लगाने वाली कंपनियों से 296 बस क्यू शेल्टर बनवाने का टेंडर करने के लिए एक एजेंडा तैयार किया गया है। जल्द ही इसके लिए टेंडर भी निकाल दिए जाएंगे। कंपनियों को टेंडर अलॉट होने के सवा साल भीतर सिटी में सभी बस क्यू शेल्टर बनाना होगा। इसके बाद कंपनियों को 8 साल तक इन बस क्यू शेल्टर को एडवरटाइजमेंट के लिए दिया जाएगा। समय पूरा होने के बाद प्रशासन का इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट इन्हें अपने अंडर में ले लेगा।