{"_id":"5d2110238ebc3e6cb66e771a","slug":"156244788175-panchkula-news131","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोई पहले अटेंप्ट तो किसी ने 5 बार नाकाम साबित होने पर भी नहीं मानी हार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोई पहले अटेंप्ट तो किसी ने 5 बार नाकाम साबित होने पर भी नहीं मानी हार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। हजार मुश्किलें राहों में खड़ी थीं लेकिन, हमने भी पैरों को फौलाद बना रखा था...ये लाइनें पटियाला (पंजाब) के विश्वजीत सिंह मान पर बिल्कुल फिट बैठती हैं, जिन्होंने तमाम मुश्किलों का सामना करने के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और पंजाब सिविल सर्विस में रैंक 10 लाकर दिखा दिया कि अगर लक्ष्य पर निशाना साध लिया जाए तो उसे भेदने से कोई नहीं रोक सकता। विश्वजीत सिंह पांच बार फेल रहे, इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और यह मुकाम हासिल किया। सिर्फ विश्वजीत ही नहीं, सफलता की ऐसी कई कहानियां हैं...जो आपको प्रेरणा से भर देंगी। इन सभी पीसीएस में चयनित को सम्मानित करने के लिए सेक्टर 25 स्थित अभिमन्यु आईएएस अकादमी में एक समारोह आयोजित किया गया था।
बैंक में लाखों का पैकेज छोड़ चुना सिविल सर्विसेज
पंजाब सिविल सर्विस में 20वीं रैंक लाने वाले सतिश्वर सिंह ढिल्लो की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने पहले अटेंप्ट में यह पोजिशन हासिल की है। सतिश्वर सिंह ढिल्लो ने बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की है, जिसके बाद उनका एक इंटरनेशनल बैंक में सिलेक्शन हो गया। उन्होंने दो साल वहां नौकरी की, लेकिन दिल नहीं माना तो नौकरी छोड़ सिविल सर्विसेज की तैयारी करने लगे। 2017 में तैयारी शुरू की, एक साल दिन रात पढ़ाई कर परीक्षा दिया और पंजाब में 20वीं रैंक हासिल किया। सतिश्वर सिंह ने बताया कि वह आईएएस रॉबिन गुप्ता से काफी प्रभावित हुए, जिसके बाद ही उन्होंने देश सेवा का रास्ता चुना। सतिश्वर सिंह का मानना है कि वह अपनी सारी मेहनत लोगों की सेवा में लगाना चाहते हैं, न कि किसी प्राइवेट संस्था को और अमीर बनाने में।
5 बार हुए फेल फिर भी नहीं मानी हार, पाया मुकाम
पंजाब सिविल सर्विस में 10वीं रैंक लाने वाले पंजाब के समाना के बुजरक गांव के विश्वजीत सिंह मान के पिता एक किसान हैं। विश्वजीत सिंह मान की हिम्मत ही है कि उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विसेज और इंजीनियरिंग सर्विस के लिए 4 बार परीक्षा दी, पीसीएस के लिए भी कोशिश की लेकर सफल नहीं हो पाए। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिर में पंजाब सिविल सर्विसेज में 10वीं रैंक हासिल की। विश्वजीत सिंह ने बिजली विभाग में बतौर जूनियर इंजीनियर काम करते हुए परीक्षा की तैयारी की। लोगों की सेवा की भावना ही थी, कि कई जगह सिलेक्शन होने के बाद भी उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। विश्वजीत सिंह मान ने बताया कि तैयारी के दौरान 10 से 12 घंटे रोजाना पढ़ना पड़ा। 2014 से ही तैयारी शुरू कर दी थी, कई बार निराशा हुई लेकिन हार नहीं मानी।
विज्ञापन
22 साल की उम्र में बने पीसीएस ऑफिसर
22 साल की उम्र में ही पीसीएस ऑफिसर बने दिलप्रीत सिंह देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। उन्होंने सिविल सर्विसेज के पहले अटेंप्ट में ही पीसीएस क्लीयर कर लिया है। पंजाब सिविल सर्विसेज में उन्होने 12वीं रैंक हासिल की है। दिलप्रीत सिंह चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के स्टूडेंट हैं। उन्होंने सिविल सर्विसेज के लिए पेक में इंजीनियरिंग करते हुए दूसरे वर्ष से ही तैयारी शुरू कर दी थी। दिलप्रीत सिंह ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सर्विस की तैयारी करने में काफी मेहनत और लगन चाहिए, क्योंकि पढ़ाई में कोताही नहीं बरती जा सकती। दिलप्रीत ने बताया कि प्री में सी-सैट पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जबकि मेन्स में लैंग्वेज पर फोकस रखना चाहिए। वह आगे आईएएस के लिए भी तैयारी कर रहे हैं। दिलप्रीत सिंह के पिता मनमोहन सिंह पंजाब पावर ग्रिड के डीजीएम हैं।
पिता किसान, बेटी बनी पीसीएस ऑफिसर
पंजाब के संगरूर जिले के कोटली गांव से संबंध रखने वाली परलीन कौर ने पंजाब सिविल सर्विस में तीसरी रैंक हासिल की है। उनके पिता गांव में ही खेती करते हैं। परलीन ने बताया कि सिविल सर्विसेज की परीक्षा अन्य परीक्षाओं से काफी कठिन होती है, इसके लिए किसी को भी अपना पूरा एक साल देना होता है। तन-मन से जुट कर पढ़ाई करनी होगी, तब जाकर पास होंगे। परलीन ने पूरे साल पढ़ाई की, नोट्स तैयार किए ताकि परीक्षा के समय नोट्स से रिवाइज किया जा सके। सेल्फ स्टडी पर ज्यादा फोकस किया, क्योंकि परलीन का मानना है कि कोई भी इंसान अपना आंकलन खुद ही सबसे बेहतर तरीके से कर सकता है। परलीन कौर ने एमए जियोग्राफी से पोस्ट ग्रेजुएशन की। वह यूनिवर्सिटी टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
अभिमन्यु आईएएस अकादमी के छात्रों ने गाड़े झंडे
पीसीएस 2019 परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा ने एक बार फिर अभिमन्यु आईएएस अकादमी की उत्कृष्टता को साबित कर दिया है, जिसमें अकादमी के छात्रों ने सफलता पूर्वक इस परीक्षा को उत्तीर्ण किया और शीर्ष स्थान प्राप्त किए। पीसीएस 2019 परीक्षा में संस्थान के 40 से अधिक छात्रों को सफलता मिली।
ये स्टूडेंट्स रहे टॉपर
शीर्ष रैंक हासिल करने वाले छात्रों में सुखविंदर सिंह बराड़, बिरकर्ण सिंह, लार्सन, रविंदर सिंह, इश्मीत कौर, विश्वदीप मट्टू, जगनूर सिंह ग्रेवाल, जसप्रीत सिंह, सुमरिता, कंवल पुनीत कौर, परलीन कौर क्लेका, कार्तिक मट्टू, प्रभजोत कौर, बबनदीप सिंह, अरुण मुंडन, सिद्धार्थ अत्री, मुराद जसवीर सिंह गिल, दीपांकर गर्ग, रूपिंदर कौर, मानवजीत सिंह सिद्धू, सूरज, दिव्या सिंगला, विश्वजीत सिंह मान शामिल हैं। यह सभी स्टूडेंट्स अभिमन्यु आईएएस अकादमी के हैं।
मुंबई के एडिशनल कमिश्मर (इनकम टैक्स) कुसुम बंसल ने टॉपर्स को किया सम्मानित
एक विशेष सम्मान समारोह में मुंबई के एडिशनल कमिश्मर (इनकम टैक्स) कुसुम बंसल ने पीसीएस 2019 टॉपर्स को सम्मानित किया। उन्होंने सभी सफल उम्मीदवारों का स्वागत किया और उन्हें बधाई दी और उन्हें ‘न्यू इंडिया के आर्किटेक्टस’ के रूप में वर्णित किया। इस समारोह में 150 से अधिक सिविल सर्विस एस्पिरेंट्स ने भी भाग लिया। इस मौके पर सीएमडी अभिमन्यु परवीन बंसल ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में 35 हजार से अधिक छात्रों को अभिमन्यु आईएएस में प्रशिक्षित किया गया है। अभी तक संस्थान द्वारा प्रशिक्षित 1315 से अधिक छात्रों ने यूपीएससी, सिविल सर्विसेज, स्टेट लोक सेवा परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की और शीर्ष रैंक भी हासिल किए हैं।
विज्ञापन
बैंक में लाखों का पैकेज छोड़ चुना सिविल सर्विसेज
पंजाब सिविल सर्विस में 20वीं रैंक लाने वाले सतिश्वर सिंह ढिल्लो की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने पहले अटेंप्ट में यह पोजिशन हासिल की है। सतिश्वर सिंह ढिल्लो ने बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की है, जिसके बाद उनका एक इंटरनेशनल बैंक में सिलेक्शन हो गया। उन्होंने दो साल वहां नौकरी की, लेकिन दिल नहीं माना तो नौकरी छोड़ सिविल सर्विसेज की तैयारी करने लगे। 2017 में तैयारी शुरू की, एक साल दिन रात पढ़ाई कर परीक्षा दिया और पंजाब में 20वीं रैंक हासिल किया। सतिश्वर सिंह ने बताया कि वह आईएएस रॉबिन गुप्ता से काफी प्रभावित हुए, जिसके बाद ही उन्होंने देश सेवा का रास्ता चुना। सतिश्वर सिंह का मानना है कि वह अपनी सारी मेहनत लोगों की सेवा में लगाना चाहते हैं, न कि किसी प्राइवेट संस्था को और अमीर बनाने में।
विज्ञापन
5 बार हुए फेल फिर भी नहीं मानी हार, पाया मुकाम
पंजाब सिविल सर्विस में 10वीं रैंक लाने वाले पंजाब के समाना के बुजरक गांव के विश्वजीत सिंह मान के पिता एक किसान हैं। विश्वजीत सिंह मान की हिम्मत ही है कि उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विसेज और इंजीनियरिंग सर्विस के लिए 4 बार परीक्षा दी, पीसीएस के लिए भी कोशिश की लेकर सफल नहीं हो पाए। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिर में पंजाब सिविल सर्विसेज में 10वीं रैंक हासिल की। विश्वजीत सिंह ने बिजली विभाग में बतौर जूनियर इंजीनियर काम करते हुए परीक्षा की तैयारी की। लोगों की सेवा की भावना ही थी, कि कई जगह सिलेक्शन होने के बाद भी उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। विश्वजीत सिंह मान ने बताया कि तैयारी के दौरान 10 से 12 घंटे रोजाना पढ़ना पड़ा। 2014 से ही तैयारी शुरू कर दी थी, कई बार निराशा हुई लेकिन हार नहीं मानी।
विज्ञापन
22 साल की उम्र में बने पीसीएस ऑफिसर
22 साल की उम्र में ही पीसीएस ऑफिसर बने दिलप्रीत सिंह देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। उन्होंने सिविल सर्विसेज के पहले अटेंप्ट में ही पीसीएस क्लीयर कर लिया है। पंजाब सिविल सर्विसेज में उन्होने 12वीं रैंक हासिल की है। दिलप्रीत सिंह चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के स्टूडेंट हैं। उन्होंने सिविल सर्विसेज के लिए पेक में इंजीनियरिंग करते हुए दूसरे वर्ष से ही तैयारी शुरू कर दी थी। दिलप्रीत सिंह ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सर्विस की तैयारी करने में काफी मेहनत और लगन चाहिए, क्योंकि पढ़ाई में कोताही नहीं बरती जा सकती। दिलप्रीत ने बताया कि प्री में सी-सैट पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जबकि मेन्स में लैंग्वेज पर फोकस रखना चाहिए। वह आगे आईएएस के लिए भी तैयारी कर रहे हैं। दिलप्रीत सिंह के पिता मनमोहन सिंह पंजाब पावर ग्रिड के डीजीएम हैं।
पिता किसान, बेटी बनी पीसीएस ऑफिसर
पंजाब के संगरूर जिले के कोटली गांव से संबंध रखने वाली परलीन कौर ने पंजाब सिविल सर्विस में तीसरी रैंक हासिल की है। उनके पिता गांव में ही खेती करते हैं। परलीन ने बताया कि सिविल सर्विसेज की परीक्षा अन्य परीक्षाओं से काफी कठिन होती है, इसके लिए किसी को भी अपना पूरा एक साल देना होता है। तन-मन से जुट कर पढ़ाई करनी होगी, तब जाकर पास होंगे। परलीन ने पूरे साल पढ़ाई की, नोट्स तैयार किए ताकि परीक्षा के समय नोट्स से रिवाइज किया जा सके। सेल्फ स्टडी पर ज्यादा फोकस किया, क्योंकि परलीन का मानना है कि कोई भी इंसान अपना आंकलन खुद ही सबसे बेहतर तरीके से कर सकता है। परलीन कौर ने एमए जियोग्राफी से पोस्ट ग्रेजुएशन की। वह यूनिवर्सिटी टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
अभिमन्यु आईएएस अकादमी के छात्रों ने गाड़े झंडे
पीसीएस 2019 परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा ने एक बार फिर अभिमन्यु आईएएस अकादमी की उत्कृष्टता को साबित कर दिया है, जिसमें अकादमी के छात्रों ने सफलता पूर्वक इस परीक्षा को उत्तीर्ण किया और शीर्ष स्थान प्राप्त किए। पीसीएस 2019 परीक्षा में संस्थान के 40 से अधिक छात्रों को सफलता मिली।
ये स्टूडेंट्स रहे टॉपर
शीर्ष रैंक हासिल करने वाले छात्रों में सुखविंदर सिंह बराड़, बिरकर्ण सिंह, लार्सन, रविंदर सिंह, इश्मीत कौर, विश्वदीप मट्टू, जगनूर सिंह ग्रेवाल, जसप्रीत सिंह, सुमरिता, कंवल पुनीत कौर, परलीन कौर क्लेका, कार्तिक मट्टू, प्रभजोत कौर, बबनदीप सिंह, अरुण मुंडन, सिद्धार्थ अत्री, मुराद जसवीर सिंह गिल, दीपांकर गर्ग, रूपिंदर कौर, मानवजीत सिंह सिद्धू, सूरज, दिव्या सिंगला, विश्वजीत सिंह मान शामिल हैं। यह सभी स्टूडेंट्स अभिमन्यु आईएएस अकादमी के हैं।
मुंबई के एडिशनल कमिश्मर (इनकम टैक्स) कुसुम बंसल ने टॉपर्स को किया सम्मानित
एक विशेष सम्मान समारोह में मुंबई के एडिशनल कमिश्मर (इनकम टैक्स) कुसुम बंसल ने पीसीएस 2019 टॉपर्स को सम्मानित किया। उन्होंने सभी सफल उम्मीदवारों का स्वागत किया और उन्हें बधाई दी और उन्हें ‘न्यू इंडिया के आर्किटेक्टस’ के रूप में वर्णित किया। इस समारोह में 150 से अधिक सिविल सर्विस एस्पिरेंट्स ने भी भाग लिया। इस मौके पर सीएमडी अभिमन्यु परवीन बंसल ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में 35 हजार से अधिक छात्रों को अभिमन्यु आईएएस में प्रशिक्षित किया गया है। अभी तक संस्थान द्वारा प्रशिक्षित 1315 से अधिक छात्रों ने यूपीएससी, सिविल सर्विसेज, स्टेट लोक सेवा परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की और शीर्ष रैंक भी हासिल किए हैं।