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पंचकूलाः अलकेमिस्ट में मुश्किल कैंसर रीसेक्शन व रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफल, 10 घंटे का समय लगा
Fri, 05 Jul 2019 12:15 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2019 12:15 PM IST
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फाइल फोटो
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अल्केमिस्ट अस्पताल में भर्ती 45 वर्षीय एक मरीज की मुश्किल कैंसर रीसेक्शन और माइक्रो सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। मरीज स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (मुंह व जबड़े का कैंसर) से पीड़ित था, जो होंठ और जबड़े को चपेट में ले चुका था। यह सर्जरी ऑनकोसर्जन-रीसेक्शन डॉ. कंवरनीत, और प्लास्टिक सर्जन-रीकंस्ट्रक्शन डॉ. वरुण सिंगला की ओर से की गई। मरीज रमेश (बदला हुआ नाम) को डेढ़ साल से होंठ पर असामान्य विकार को देखते हुए अल्केमिस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले 6 महीने से यह विकार काफी बढ़ रहा था।
डॉ. कंवरनीत और डॉ. वरुण सिंगला ने बताया कि जांच करने पर संदेह हुआ कि मरीज को स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा है। इसमें ऊपरी और नीचले होंठ, दाहिना कॉमिस्यूर और मैंडह्वीबल के साथ चीक म्यूकोसा है। उन्होंने बताया कि बाद में कार्सिनोमा डायग्नोस होने की पुष्टि करने और सीटी व अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच के बाद, रोगी को सर्जरी के लिए तैयार किया गया था। इसमें प्रभावित क्षेत्रों की सेक्शन के लिए योजना बनाई गई। इनमें गाल, होंठ और मोकोसा की त्वचा शामिल होती है।
बताया गया कि इस दौरान मरीज की काफी विस्तृत रीसेक्शन की गई, जबकि सामान्य तौर पर शरीर के दो या तीन हिस्सों से मांस लेना पड़ता है। इसलिए कैंसर के असर को कम करने के लिए, एक काईमेरिक फ्री फ्लैप एएलटी (थाई स्किन और उसी आर्टिरी पर अंडरलाइंग मस्ल) की योजना बनाई गई। इसके चलते पैदा हुए सभी विकारों को कवर करने के लिए इसका उपयोग किया गया। व्यापक और कठिन कैंसर रीसेक्शन के कारण सर्जरी में 10 घंटे लगे।
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बाद में बनाए गए डिफेक्ट को फिर से रीकंस्ट्रक्ट करने के लिए बेहद माइक्रोसर्जरी की जरूरत पड़ी। डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी बिना किसी समस्या के हुई और फ्लैप बिना किसी जटिलता के बच गया। रोगी के स्थिर अवस्था में होने और न्यूनतम समस्याओं के साथ तेजी से ठीक होने की जानकारी दी गई।
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डॉ. कंवरनीत और डॉ. वरुण सिंगला ने बताया कि जांच करने पर संदेह हुआ कि मरीज को स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा है। इसमें ऊपरी और नीचले होंठ, दाहिना कॉमिस्यूर और मैंडह्वीबल के साथ चीक म्यूकोसा है। उन्होंने बताया कि बाद में कार्सिनोमा डायग्नोस होने की पुष्टि करने और सीटी व अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच के बाद, रोगी को सर्जरी के लिए तैयार किया गया था। इसमें प्रभावित क्षेत्रों की सेक्शन के लिए योजना बनाई गई। इनमें गाल, होंठ और मोकोसा की त्वचा शामिल होती है।
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बताया गया कि इस दौरान मरीज की काफी विस्तृत रीसेक्शन की गई, जबकि सामान्य तौर पर शरीर के दो या तीन हिस्सों से मांस लेना पड़ता है। इसलिए कैंसर के असर को कम करने के लिए, एक काईमेरिक फ्री फ्लैप एएलटी (थाई स्किन और उसी आर्टिरी पर अंडरलाइंग मस्ल) की योजना बनाई गई। इसके चलते पैदा हुए सभी विकारों को कवर करने के लिए इसका उपयोग किया गया। व्यापक और कठिन कैंसर रीसेक्शन के कारण सर्जरी में 10 घंटे लगे।
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बाद में बनाए गए डिफेक्ट को फिर से रीकंस्ट्रक्ट करने के लिए बेहद माइक्रोसर्जरी की जरूरत पड़ी। डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी बिना किसी समस्या के हुई और फ्लैप बिना किसी जटिलता के बच गया। रोगी के स्थिर अवस्था में होने और न्यूनतम समस्याओं के साथ तेजी से ठीक होने की जानकारी दी गई।