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कई राज्यों के साहित्यकार व कवियों का लगा मेला

Mon, 01 Jul 2019 01:48 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2019 01:48 AM IST
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कई राज्यों के साहित्यकार व कवियों का लगा मेला
चंडीगढ़। कवि नागार्जुन जयंती पर रविवार को कला एवं सृजन सरोकार मंच उम्मीद द्वारा लोकार्पण एवं कविता पाठ का आयोजन किया गया। सेक्टर- 17 स्थित टीएस सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्यकारों ने अपने अनुभव भी साझा किए। इस कार्यक्रम में कई राज्यों के कवियों ने हिस्सा लिया।
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कई पुस्तकों का विमोचन
कवि कुमार कृष्ण की दो कविता संग्रह पक्षी की चोंच के दाने में उड़ रहा है गांव और उम्मीद का पेड़ के अलावा लाजपत राय गर्ग के उपन्यास पल जो यूं गुजरे और शशि कुमार की पुस्तक चलो केसर उगाते हैं का लोकार्पण किया गया। आयोजन की खास बात यह भी रही कि इस कार्यक्रम में न तो कोई मुख्य अतिथि और न ही कार्यक्रम की अध्यक्षता की औपचारिकता का निर्वहन किया गया। स्वयं लेखकों ने ही मंच पर कृतियों का विमोचन किया । कवि, कहानीकार व व्यंग्यकार गुरमीत बेदी ने प्रो. कुमार कृष्ण के दोनों नव प्रकाशित कविता संग्रहों पर समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए कहा कि मानवीय संवेदनाएं ही नहीं बल्कि पहाड़ का परिवेश पूरी जीवंतता के साथ इन कविताओं में आकार लेता है और पहाड़ का दर्द गहरी संवेदनाओं में मुखरित होता है। उन्होंने कहा कुमार कृष्ण की दृष्टि और कविताओं का कैनवास बहुत महीन व विशाल है । भावनाओं के अलावा काव्य सृजन के मामले में कविताएं उत्कृष्ट हैं। कविताओं की भाषा में गजब की रवानगी है, लय है व शिल्प सौंदर्य है। गुरमीत बेदी ने कहा कि कुमार कृष्ण की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे हम सामाजिक दायित्वबोध से उपजी गहरी संवेदना में डूब उतर रहे हों। अपनी विशिष्ट भाषिक बनावट, संवेदनात्मक गहराई व उत्कृष्ट सृजनशीलता से सराबोर उनकी कविताएं चिंतन के धरातल पर भी हमें साथ लेकर चलती हैं।
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आगे की भूमिका भी सामने रखी
प्रो. कुमार कृष्ण ने अपनी चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया। पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला की हिंदी विभाग की प्रमुख प्रो. सुखविंदर कौर बाठ , कवि व चिंतक पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के प्रो. रवि कुमार अनु ने भी प्रो. कुमार कृष्ण की कविताओं के विभिन्न पक्षों को लेकर अपने विचार साझा किए। उपन्यासकार लाजपत राय गर्ग ने अपने उपन्यास के कथानक और इसकी पृष्ठभूमि से श्रोताओं को अवगत करवाया और डॉ पान सिंह ने इस उपन्यास पर समीक्षात्मक टिप्पणी की। उम्मीद संस्था के अध्यक्ष डॉ. पान सिंह ने संस्था के गठन का उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था युवाओं को साहित्य से जोड़ने के साथ-साथ पर्यावरण व स्वच्छ भारत अभियान में भी अपनी पूरी सहभागिता दर्ज करवाएगी। उन्होंने कहा, प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को संस्था द्वारा साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा जिनमें लेखकों की नव प्रकाशित कृतियों पर भी चर्चा होगी और कविता पाठ भी होगा। इस मौके पर पीयू के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अशोक सभरवाल, डॉ. मुकेश अरोड़ा, डॉ. राजवंती मान, डा. प्रियंका भारद्वाज , डा. सुरेंद्र रंगा , अश्विनी कुमार , डॉ. केसर रजा, जगमोहन कौर, डा. जय चंद शर्मा, प्रिंसिपल भूपिंदर सिंह, डॉ. नीरू, डॉ. प्रियंका, गोविंदर सिंह आदि रहे। मंच संचालन डॉ प्रियंका भारद्वाज ने किया।
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