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दर्द कम करने आए थे, दर्द लेकर लौटे
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फोटो सहित
इलाज कराने आए थे पीजीआई, दर्द लेकर लौटे
सबहेड
डॉक्टरों की हड़ताल के कारण हिमाचल, पंजाब और हरियाणा से आए पेशेंट बिना इलाज लौटे
अमित गुप्ता
चंडीगढ़। पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा है। खासकर उन मरीजों को जो दूर-दराज के इलाकों से इलाज कराने पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि पीजीआई में इलाज से उनका दर्द कम हो जाएगा, लेकिन पीजीआई में इलाज न मिलने से दर्द और बढ़ गया। इन मरीजों में कोई यूपी से आया है तो कोई पंजाब से। हर किसी को मायूस होकर वापस जाना पड़ रहा है। सोमवार को डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से पेशेंट को सही समय पर इलाज नहीं मिला, जिस पर उन्होंने अपना दर्द बयां किया।
‘सुबह से चक्कर काट रहे, कोई कुछ नहीं बताता’
पंचकूला के रामगढ़ निवासी साहब हुसैन का कहना है कि उनकी पत्नी नाबूजा खातून के शरीर में इंफेक्शन है। शरीर में सूजन रहती है। रात से तकलीफ बढ़ गई थी। सुबह पीजीआई की इमरजेंसी पहुंचा तो डाक्टरों ने कहा कि ओपीडी जाना पड़ेगा। ओपीडी में पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। पीजीआई का स्टाफ कह रहा है कि आपको इमरजेंसी में जाना होगा। अब कहां जाएं। कुछ भी नहीं पता। सुबह से हम लोग परेशान हैं और कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं है।
‘बिना इलाज लौटना पड़ रहा है’
मूलरूप से नेपाल निवासी शरद ने कहा कि उन्होंने सुन रखा था कि पीजीआई में इलाज में जल्दी मिल जाता है। लेकिन ऐसा भी नहीं है। सड़क हादसे में उनका दायां पैर फैक्चर हो गया है। पहले तो इलाज नेपाल में ही चला, लेकिन अब उनका इलाज पीजीआई में चल रहा है। रविवार सुबह ही पीजीआई पहुंच गए थे। पता चला ओपीडी में दिखाना है। ओपीडी में जबरदस्त भीड़ है। वहां पर कोई डॉक्टर उनकी सुन नहीं रहे। अब बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है।
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दस वर्षीय दक्ष को भी भटकना पड़ा
10 वर्षीय दक्ष के पिता सुशील ने बताया कि वह अंबाला के महेश नगर में रहते हैं। कुछ समय पहले दक्ष का बाइक से एक्सीडेंट हो गया था। पहले तो उसका इलाज अंबाला स्थित एक अस्पताल में हुआ। ठीक नहीं होने के चलते उसे पीजीआई में दिखाने आया था, लेकिन डॉक्टर उनकी एक नहीं सुन रही है। यहां का हाल बहुत बुरा है।
‘चार दिन से काट रहा हूं चक्कर’
आनंदपुर साहिब निवासी कुलदीप सिंह ने बताया कि उनके भतीजा पलवीर सिंह को पैरालाइज हो गया है। बीते शुक्रवार से पूरा परिवार पीजीआई में परेशान है। डॉक्टर के आने का कोई समय नहीं है। सुबह शाम चक्कर काटता हूं, लेकिन कोई डॉक्टर उनकी सुन नहीं रहा है। चार दिन से कोई इलाज नहीं मिला है। ओपीडी में लेकर आया तो यहां भी वही रोना है। पता चला कि डाक्टर हड़ताल पर है। आज का भी दिन बेकार चला गया।
कैंसर पेशेंट भी परेशान रहे
हिमाचल के बद्दी निवासी कांती ने बताया कि उनके पति राम अवतार को पिछले डेढ़ साल से चेस्ट कैंसर है। इलाज पीजीआई से कराया जा रहा है। सोमवार को डॉक्टर को दिखाना था। लेकिन हड़ताल की वजह से उनकी कोई सुन नहीं रहा है। ओपीडी से यह कहकर बाहर भेज दिया कि जाकर इमरजेंसी में इलाज कराओ, यहां कुछ नहीं होगा। काफी देर से धक्के खा रहे हैं। कुछ समझ नहीं आ रहा कि अब कहां जाएं।
अगर कुछ हो गया तो कौन होगा जिम्मेवार
पेशेंट कमल के बड़े भाई तारा सिंह ने बताया कि वे लोग पंजाब के मुक्तसर से आए हैं। बीते 23 मई को कमल की सड़क हादसे में उसका पेट फट गया। जिसके बाद उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया था। सोमवार को ओपीडी लेकर पहुंचा तो उन्हें एक भी डॉक्टर नहीं मिला। उन्हें ओपीडी के पास बाहर निकाल दिया गया। ऐसे में अगर कुछ हो गया तो इसका कौन जिम्मेवार होगा?
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इलाज कराने आए थे पीजीआई, दर्द लेकर लौटे
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डॉक्टरों की हड़ताल के कारण हिमाचल, पंजाब और हरियाणा से आए पेशेंट बिना इलाज लौटे
अमित गुप्ता
चंडीगढ़। पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा है। खासकर उन मरीजों को जो दूर-दराज के इलाकों से इलाज कराने पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि पीजीआई में इलाज से उनका दर्द कम हो जाएगा, लेकिन पीजीआई में इलाज न मिलने से दर्द और बढ़ गया। इन मरीजों में कोई यूपी से आया है तो कोई पंजाब से। हर किसी को मायूस होकर वापस जाना पड़ रहा है। सोमवार को डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से पेशेंट को सही समय पर इलाज नहीं मिला, जिस पर उन्होंने अपना दर्द बयां किया।
‘सुबह से चक्कर काट रहे, कोई कुछ नहीं बताता’
पंचकूला के रामगढ़ निवासी साहब हुसैन का कहना है कि उनकी पत्नी नाबूजा खातून के शरीर में इंफेक्शन है। शरीर में सूजन रहती है। रात से तकलीफ बढ़ गई थी। सुबह पीजीआई की इमरजेंसी पहुंचा तो डाक्टरों ने कहा कि ओपीडी जाना पड़ेगा। ओपीडी में पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। पीजीआई का स्टाफ कह रहा है कि आपको इमरजेंसी में जाना होगा। अब कहां जाएं। कुछ भी नहीं पता। सुबह से हम लोग परेशान हैं और कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं है।
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‘बिना इलाज लौटना पड़ रहा है’
मूलरूप से नेपाल निवासी शरद ने कहा कि उन्होंने सुन रखा था कि पीजीआई में इलाज में जल्दी मिल जाता है। लेकिन ऐसा भी नहीं है। सड़क हादसे में उनका दायां पैर फैक्चर हो गया है। पहले तो इलाज नेपाल में ही चला, लेकिन अब उनका इलाज पीजीआई में चल रहा है। रविवार सुबह ही पीजीआई पहुंच गए थे। पता चला ओपीडी में दिखाना है। ओपीडी में जबरदस्त भीड़ है। वहां पर कोई डॉक्टर उनकी सुन नहीं रहे। अब बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है।
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दस वर्षीय दक्ष को भी भटकना पड़ा
10 वर्षीय दक्ष के पिता सुशील ने बताया कि वह अंबाला के महेश नगर में रहते हैं। कुछ समय पहले दक्ष का बाइक से एक्सीडेंट हो गया था। पहले तो उसका इलाज अंबाला स्थित एक अस्पताल में हुआ। ठीक नहीं होने के चलते उसे पीजीआई में दिखाने आया था, लेकिन डॉक्टर उनकी एक नहीं सुन रही है। यहां का हाल बहुत बुरा है।
‘चार दिन से काट रहा हूं चक्कर’
आनंदपुर साहिब निवासी कुलदीप सिंह ने बताया कि उनके भतीजा पलवीर सिंह को पैरालाइज हो गया है। बीते शुक्रवार से पूरा परिवार पीजीआई में परेशान है। डॉक्टर के आने का कोई समय नहीं है। सुबह शाम चक्कर काटता हूं, लेकिन कोई डॉक्टर उनकी सुन नहीं रहा है। चार दिन से कोई इलाज नहीं मिला है। ओपीडी में लेकर आया तो यहां भी वही रोना है। पता चला कि डाक्टर हड़ताल पर है। आज का भी दिन बेकार चला गया।
कैंसर पेशेंट भी परेशान रहे
हिमाचल के बद्दी निवासी कांती ने बताया कि उनके पति राम अवतार को पिछले डेढ़ साल से चेस्ट कैंसर है। इलाज पीजीआई से कराया जा रहा है। सोमवार को डॉक्टर को दिखाना था। लेकिन हड़ताल की वजह से उनकी कोई सुन नहीं रहा है। ओपीडी से यह कहकर बाहर भेज दिया कि जाकर इमरजेंसी में इलाज कराओ, यहां कुछ नहीं होगा। काफी देर से धक्के खा रहे हैं। कुछ समझ नहीं आ रहा कि अब कहां जाएं।
अगर कुछ हो गया तो कौन होगा जिम्मेवार
पेशेंट कमल के बड़े भाई तारा सिंह ने बताया कि वे लोग पंजाब के मुक्तसर से आए हैं। बीते 23 मई को कमल की सड़क हादसे में उसका पेट फट गया। जिसके बाद उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया था। सोमवार को ओपीडी लेकर पहुंचा तो उन्हें एक भी डॉक्टर नहीं मिला। उन्हें ओपीडी के पास बाहर निकाल दिया गया। ऐसे में अगर कुछ हो गया तो इसका कौन जिम्मेवार होगा?