फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   महाशिवरात्रि सोमवार को शाम 4 बजकर 2

महाशिवरात्रि सोमवार को शाम 4 बजकर 2

Sun, 03 Mar 2019 01:30 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Sun, 03 Mar 2019 01:30 AM IST
विज्ञापन
महाशिवरात्रि  सोमवार को शाम 4 बजकर 2
महाशिवरात्रि: कुंभ के शाही स्नान से बढ़ा महत्व
विज्ञापन


शहर के मंदिरों में शुरू हुई पर्व की तैयारियां
सोमवार को शाम 4 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ

अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। भगवान शिव के भक्तों को महाशिवरात्रि का इंतजार रहता है। इस पर्व को भगवान शिव का हर भक्त बड़ी ही धूमधाम से मनाता है। सोमवार को मनाए जाने वाले महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां पंचकूला के मंदिरों में अभी से शुरू हो गई हैं। इस दिन भगवान शिव की साधना-आराधना करने से जीवन में चल रही परेशानियों का निवारण होता है। पंचकूला के आचार्य भागवत प्रसाद के अनुसार साल 2019 में पड़ने वाली महाशिवरात्रि कुछ खास है। क्योंकि महाशिवरात्रि सोमवार को है। जिस वजह से इसका महत्व और बढ़ जाता है। इसके साथ ही प्रयागराज में चल रहे कुंभ की नजर से भी यह खास है, क्योंकि इस दिन ही आखिरी शाही स्नान होगा। महाशिवरात्रि के दिन मंदिरों में पहुंचने वाले भक्त शिव भगवान को खुश करने के लिए शिवलिंग पर कई चीजें अर्पित करते हैं, लेकिन कई बार भक्तजन ऐसी चीजें अर्पित करते है जिन्हें शास्त्रों में वर्जित माना जाता है। जिन्हें अर्पित करने से भोले बाबा खुश होने की बजाए नाराज हो सकते हैं। इसलिए भक्तों को हल्दी, तुलसी के पत्ते, तिल, टूटे हुए चावल, कुमकुम अर्पित करने से परहेज करना चाहिए।

आचार्य के अनुसार हर महीने की कृष्णपक्ष चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि होती है, लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव का पार्वती से विवाह हुआ था साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विज्ञापन


ऐसे करें शिव की पूजा
आचार्य भागवत प्रसाद ने बताया कि कार्य में सफलता, पढ़ाई के लिए, नौकरी, संतान, व्यापार, शादी, रोग निवारण, धन प्राप्ति आदि के लिए महाशिवरात्रि पर गाय के घी में कपूर मिला कर हवन सामग्री से महामृत्युंजय मंत्र की 108 आहुति देनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


- इस दिन रुद्राक्ष की माला धारण करना भी अच्छा माना जाता है।
- कच्चे दूध में दही शहद शक्कर घी में गंगा जल मिला कर शिवलिंग का अभिषेक कर चन्दन,आक, धतूरा,भांग,बेलपत्र,पुष्प, धूप, दीप आदि से पूजा की जा सकती है।
- मिट्टी के लोटे में पानी या दूध भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के फूल, चावल आदि डालकर ‘शिवलिंग’ पर चढ़ाना चाहिए। अगर आस-पास कोई शिव मंदिर नहीं है, तो घर में ही मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया जाना चाहिए।
- शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ओम नम: शिवाय का जाप इस दिन करना चाहिए। साथ ही महाशिवरात्री के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है।
- शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार शिवरात्रि का पूजन ‘निशीथ काल’ में करना सर्वश्रेष्ठ रहता है। हालांकि भक्त रात्रि के चारों प्रहरों में से अपनी सुविधानुसार यह पूजन कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि मुहूर्त निशीथ काल पूजा मुहूर्त : 24:08:03 से 24:57:24 तक। अवधि : 0 घंटे 49 मिनट महाशिवरात्री पारणा मुहूर्त : 06:43:48 से 15:29:15 पांच मार्च तक।

पंचकूला के मंदिरों में खास व्यवस्था
सेक्टर-21 शिव मंदिर कमेटी के प्रधान नीरज पराशर के अनुसार शनिवार को शोभा यात्रा निकालने के बाद शिव पुराण स्थापित किया जाएगा। 3 मार्च से 9 मार्च तक शाम 4 से 7 बजे तक तरुण तपस्वी शिव योगी श्री श्री 1008 महा मंडलेश्वर स्वामी जमुनापुरी महाराज द्वारा कथा वाचन किया जाएगा। इस दौरान रोजाना रात 10 बजे तक रुद्राभिषेक होगा। 4 मार्च को महाशिवरात्रि के दिन सुबह 4 चार बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। पूरा दिन भजन कीर्तन होगा और प्रसाद में पकौड़े, खीर व फल वितरित किए जाएंगे। शाम 8 बजे से 5 मार्च की सुबह 5 बजे तक चार प्रहर की पूजा की जाएगी। 10 मार्च को भंडारे का आयोजन किया जाएगा व 12 मार्च को भजन संध्या, आरती और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। वहीं श्री राम मंदिर सेक्टर-दो के प्रधान पवन मित्तल के अनुसार 2 से 4 मार्च तक महा शिव पुराण सत्संग किया जाएगा। 4 मार्च को सुबह 5 से शाम 3 बजे तक जलाभिषेक और रात्रि 8 बजे से सुबह 4 बजे तक चार पहर की पूजा की जाएगी। 5 मार्च को सुबह साढ़े 9 बजे से 12 बजे तक कीर्तन किया जाएगा व भोग लगाया जाएगा और 12 बजे के बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा।


महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा
शिवरात्रि को लेकर बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं। विवरण मिलता है कि भगवती पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसके फलस्वरूप फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही कारण है कि महाशिवरात्रि को अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। वहीं गरुड़ पुराण में इस दिन के महत्व को लेकर एक अन्य कथा है। जिसके अनुसार इस दिन निषादराज अपने कुत्ते के साथ शिकार खेलने गया किंतु उन्हें कोई शिकार नहीं मिला। वह थककर भूख-प्यास से परेशान हो एक तालाब के किनारे गया, जहां बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था। अपने शरीर को आराम देने के लिए उसने कुछ बिल्व-पत्र तोड़े जो शिवलिंग पर भी गिर गए। अपने पैरों को साफ करने के लिए उसने उन पर तालाब का जल छिड़का, जिसकी कुछ बूंदे शिवलिंग पर भी जा गिरीं। ऐसा करते समय उसका एक तीर नीचे गिर गया। जिसे उठाने के लिए वह शिवलिंग के सामने नीचे को झुका। इस तरह शिवरात्रि के दिन शिव-पूजन की पूरी प्रक्रिया उसने अनजाने में ही पूरी कर ली। मृत्यु के बाद जब यमदूत उसे लेने आए तो शिव के गणों ने उसकी रक्षा की और उन्हें भगा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed