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जीत की कहानी, अंशुल की जुबानी
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ताकतवर दुश्मन से थी लड़ाई.. आखिरकार जीते
सबहेड
फैसले के बाद रामचंद्र छत्रपति के बेटे विक्ट्री बनाकर किया खुशी का इजहार
कहा- 16 वर्षों में आए कई उतार चढ़ाव पर परिवार ने हार नहीं मानी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा डेरा प्रमुख राम रहीम समेत चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मृतक रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कोर्ट से बाहर निकलते ही विक्ट्री का निशान बनाकर जीत की खुशी का इजहार किया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि 16 साल बाद उन्हें न्याय मिला है। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। सीबीआई की ओर से जिस तरह से पिता के मर्डर केस की पैरवी की गई है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई के दौरान उन्होंने बहुत सारे उतार चढ़ाव देखे लेकिन परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। यह उनके संघर्ष की जीत है। उन्होंने कहा कि संत का रूप धारण कर अपराध करने वाला राम रहीम आज सलाखों के पीछे है।
अंशुल ने कहा कि गुरमीत राम रहीम ने उनके पिता रामचंद्र छत्रपति पर ही नहीं बल्कि देश के चौथे स्तंभ पर हमला किया। न्याय के लिए उनकी पूरी फैमिली ने 16 साल तक संघर्ष किया। गुरमीत राम रहीम जैसे ताकतवर दुश्मन के खिलाफ 16 वर्षों तक लंबी लड़ाई लड़ी। आज अदालत ने गुरमीत राम रहीम और तीन अन्य दोषियों निर्मल सिंह, कृष्ण लाल, कुलदीप सिंह को ताउम्र उम्रकैद की सजा सुनाई है। मेरे पिता के हत्यारों को जो सजा मिली है, उससे वह संतुष्ट हैं। समाज में इस तरह का अपराध करने से पहले लोग 100 बार सोचेंगे। कोर्ट ने इस तरह का फैसला देकर न्याय की आस लगाए लोगों का हौसला बढ़ाया है। सीबीआई के वकील एसपीएस वर्मा की ओर से केस की दलीलें पुख्ता तौर पर रखी गई थीं।
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फैसले के बाद रामचंद्र छत्रपति के बेटे विक्ट्री बनाकर किया खुशी का इजहार
कहा- 16 वर्षों में आए कई उतार चढ़ाव पर परिवार ने हार नहीं मानी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा डेरा प्रमुख राम रहीम समेत चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मृतक रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कोर्ट से बाहर निकलते ही विक्ट्री का निशान बनाकर जीत की खुशी का इजहार किया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि 16 साल बाद उन्हें न्याय मिला है। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। सीबीआई की ओर से जिस तरह से पिता के मर्डर केस की पैरवी की गई है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई के दौरान उन्होंने बहुत सारे उतार चढ़ाव देखे लेकिन परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। यह उनके संघर्ष की जीत है। उन्होंने कहा कि संत का रूप धारण कर अपराध करने वाला राम रहीम आज सलाखों के पीछे है।
अंशुल ने कहा कि गुरमीत राम रहीम ने उनके पिता रामचंद्र छत्रपति पर ही नहीं बल्कि देश के चौथे स्तंभ पर हमला किया। न्याय के लिए उनकी पूरी फैमिली ने 16 साल तक संघर्ष किया। गुरमीत राम रहीम जैसे ताकतवर दुश्मन के खिलाफ 16 वर्षों तक लंबी लड़ाई लड़ी। आज अदालत ने गुरमीत राम रहीम और तीन अन्य दोषियों निर्मल सिंह, कृष्ण लाल, कुलदीप सिंह को ताउम्र उम्रकैद की सजा सुनाई है। मेरे पिता के हत्यारों को जो सजा मिली है, उससे वह संतुष्ट हैं। समाज में इस तरह का अपराध करने से पहले लोग 100 बार सोचेंगे। कोर्ट ने इस तरह का फैसला देकर न्याय की आस लगाए लोगों का हौसला बढ़ाया है। सीबीआई के वकील एसपीएस वर्मा की ओर से केस की दलीलें पुख्ता तौर पर रखी गई थीं।
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