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हाईवे से 500 मीटर की दूरी कैसे मापी जाए इसपर फैसला नहीं
Updated Thu, 03 Aug 2017 01:38 AM IST
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हाईवे से 500 मीटर दूरी सड़क से मापी जाए या एरियल, नहीं हो सका फैसला
हाईवे डी नोटिफाई करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उपलब्ध न होने से लटका मामला
यूटी प्रशासन की ओर से ठेकों को बंद करने के दिए गए नोटिस पर रोक जारी
-एक्साईज पॉलिसी के तहत पहले अलॉट किए गए थे ठेके
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
नेशनल और स्टेट हाईंवे के 500 मीटर के दायरे में होने का हवाला देकर ठेकों को बंद करने के यूटी प्रशासन के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उपलब्ध न होने के चलते फैसला नहीं हो सका। याचिका में 500 मीटर की दूरी कैसे मापी जाए इसे मुद्दा बनाया गया है क्योंकि यूटी प्रशासन ने एरियल दूरी को आधार बनाकर ठेकों को बंद करने का नोटिस दिया था, जिसपर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है। अब अगली सुनवाई 18 अगस्त तय की गई है और तब तक यह मामला लटक गया है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए ठेका मालिकों ने कहा था कि नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर दूरी तक कोई भी शराब का ठेका खोलने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पाबंदी लगाई गई है। इन आदेशों को लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है और यह नहीं तय हो पा रहा है कि 500 मीटर की दूरी को मापने के लिए कौन सा पैमाना इस्तेमाल किया जाए। प्रशासन के सामने एरियल डिस्टेंस या सड़क के जरिये इस गणना को लेकर दुविधा की स्थिति बनी है। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के तहत ही वर्ष 2017-18 की एक्साइज पालिसी बनाई है। इसी पालिसी के तहत पहले उन्हें ठेका दे दिया था। याचिकाकर्ताओं ने पालिसी की शर्तों के तहत ही उन्होंने अप्रैल माह में करोड़ों की लाइसेंस फीस भी जमा करवा दी थी। एक याचिकाकर्ता ने बताया कि, मध्य मार्ग नेशनल हाईवे है ऐसे में यहाँ किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया गया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को सेक्टर-7 और 8 की इंटरनल मार्किट में ठेका अलॉट किया गया था। अगर सड़क के जरिये यहां की मध्य मार्ग से दूरी मापी जाये तो यह 500 मीटर से अधिक है लेकिन अगर एरियल या हवाई रस्ते के इसकी दुरी 464 मीटर हो जाती है जोकि 500 मीटर के दायरे में आ जाती है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है की पहले उन्हें इन जगहों के लिए ठेकों का लाइसेंस प्रशासन ने जारी कर दिया। इस लाइसेंस के तहत अब याचिकाकर्ताओं ने फीस भर काम भी शुरू कर दिया है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दे प्रशासन का कहना है की यह ठेके नेशनल या स्टेट हाइवे के 500 के दायरे में हैं ऐसे में अब प्रशासन ने 5 जून को उन्हें नोटिस थमा इन ठेकों को बंद करने को कहा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार प्रशासन अपने तरीके से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को परिभाषित कर रहा है। इन आदेशों में यह कहीं भी तय नहीं किया गया है कि, नेशनल और स्टेट हाइवेज से 500 मीटर की दूरी एरियल या हवाई फैसले के जरिये तय की जाएगी या सड़क के जरिये तय की जाएगी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूरी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो उन्हें पहले लाइसेंस जारी ही क्यों किया गया। अब जब उन्होंने बिक्री शुरू कर दी है तो अब उन्हें बंद किये जाने का नोटिस दिया जा रहा है। अगर अब वह अपना व्यवसाय बंद करते हैं तो उन्हें भरी नुक्सार उठाना होगा। लिहाजा याचिकाकर्ताओं ने इस नोटिस पर रोक लगाए जाने की हाई कोर्ट से मांग की थी।
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हाईवे डी नोटिफाई करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उपलब्ध न होने से लटका मामला
यूटी प्रशासन की ओर से ठेकों को बंद करने के दिए गए नोटिस पर रोक जारी
-एक्साईज पॉलिसी के तहत पहले अलॉट किए गए थे ठेके
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
नेशनल और स्टेट हाईंवे के 500 मीटर के दायरे में होने का हवाला देकर ठेकों को बंद करने के यूटी प्रशासन के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उपलब्ध न होने के चलते फैसला नहीं हो सका। याचिका में 500 मीटर की दूरी कैसे मापी जाए इसे मुद्दा बनाया गया है क्योंकि यूटी प्रशासन ने एरियल दूरी को आधार बनाकर ठेकों को बंद करने का नोटिस दिया था, जिसपर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है। अब अगली सुनवाई 18 अगस्त तय की गई है और तब तक यह मामला लटक गया है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए ठेका मालिकों ने कहा था कि नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर दूरी तक कोई भी शराब का ठेका खोलने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पाबंदी लगाई गई है। इन आदेशों को लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है और यह नहीं तय हो पा रहा है कि 500 मीटर की दूरी को मापने के लिए कौन सा पैमाना इस्तेमाल किया जाए। प्रशासन के सामने एरियल डिस्टेंस या सड़क के जरिये इस गणना को लेकर दुविधा की स्थिति बनी है। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के तहत ही वर्ष 2017-18 की एक्साइज पालिसी बनाई है। इसी पालिसी के तहत पहले उन्हें ठेका दे दिया था। याचिकाकर्ताओं ने पालिसी की शर्तों के तहत ही उन्होंने अप्रैल माह में करोड़ों की लाइसेंस फीस भी जमा करवा दी थी। एक याचिकाकर्ता ने बताया कि, मध्य मार्ग नेशनल हाईवे है ऐसे में यहाँ किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया गया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को सेक्टर-7 और 8 की इंटरनल मार्किट में ठेका अलॉट किया गया था। अगर सड़क के जरिये यहां की मध्य मार्ग से दूरी मापी जाये तो यह 500 मीटर से अधिक है लेकिन अगर एरियल या हवाई रस्ते के इसकी दुरी 464 मीटर हो जाती है जोकि 500 मीटर के दायरे में आ जाती है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है की पहले उन्हें इन जगहों के लिए ठेकों का लाइसेंस प्रशासन ने जारी कर दिया। इस लाइसेंस के तहत अब याचिकाकर्ताओं ने फीस भर काम भी शुरू कर दिया है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दे प्रशासन का कहना है की यह ठेके नेशनल या स्टेट हाइवे के 500 के दायरे में हैं ऐसे में अब प्रशासन ने 5 जून को उन्हें नोटिस थमा इन ठेकों को बंद करने को कहा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार प्रशासन अपने तरीके से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को परिभाषित कर रहा है। इन आदेशों में यह कहीं भी तय नहीं किया गया है कि, नेशनल और स्टेट हाइवेज से 500 मीटर की दूरी एरियल या हवाई फैसले के जरिये तय की जाएगी या सड़क के जरिये तय की जाएगी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूरी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो उन्हें पहले लाइसेंस जारी ही क्यों किया गया। अब जब उन्होंने बिक्री शुरू कर दी है तो अब उन्हें बंद किये जाने का नोटिस दिया जा रहा है। अगर अब वह अपना व्यवसाय बंद करते हैं तो उन्हें भरी नुक्सार उठाना होगा। लिहाजा याचिकाकर्ताओं ने इस नोटिस पर रोक लगाए जाने की हाई कोर्ट से मांग की थी।
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