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टंकियों पर लारवा मिलने पर चीफ इंजीनियर को नोटिस
Updated Sun, 09 Jul 2017 09:59 PM IST
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टंकी में लारवा मिलने पर चीफ इंजीनियर को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मानसून से पहले स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग ने लारवा खत्म करो अभियान तेजी से चला रखा है। घर-घर जाकर कूलरों की जांच की जा रही है। सबसे ज्यादा लारवा पीयू के हॉस्टलों और हाउसिंग बोर्ड के खाली पड़े मकानों की टंकी से मिल रहे हैं। टंकी पर ढक्कन नहीं हैं। इसलिए जमा पानी में लारवा ज्यादा मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने हाउसिंग बोर्ड के चीफ इंजीनियर को नोटिस भेजकर जल्द से जल्द टंकी में ढक्कन लगाने के आदेश जारी किए हैं। सीटीयू वर्कशॉप में भी काफी मात्रा में लारवा मिले हैं।
25 हजार से ज्यादा घरों की जांच
मलेरिया विभाग अभियान के तहत 25 हजार से ज्यादा घरों की जांच कर चुका है। घरों के कूलरों और टंकी की जांच होती है और उसके बाद घर के मालिक से हस्ताक्षर कराए जाते हैं, ताकि पता चलते रहे कि किस घर की जांच हुई या नहीं। जिन घरों में लारवा मिले हैं, उन पर कार्रवाई की गई है। अब तक 600 से ज्यादा नोटिस, दो शोकॉज नोटिस, पांच चालान काटे जा चुके हैं।
मानसून की देरी का पड़ेगा प्रभाव
एंटी मलेरिया अधिकारी गौरव अग्रवाल ने बताया कि मानसून की देरी का प्रभाव डेंगू के लारवा पर भी पड़ सकता है। बारिश और उसके बाद बढ़ी उमस वेक्टर बोर्न डिजीज के लिए अनुकूल होती है। खासकर रुक-रुक होने वाली बारिश। लगातार और तेज बारिश का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। पिछले दिनों चंडीगढ़ में रुक-रुक कर ही बारिश हुई है। हालांकि पिछले तीन हफ्ते से डेंगू का एक भी केस सामने नहीं आया है।
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खाली पड़े मकानों की खुली टंकियां और पीयू हॉस्टल के कूलर बने ठिकाना
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मानसून से पहले स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग ने लारवा खत्म करो अभियान तेजी से चला रखा है। घर-घर जाकर कूलरों की जांच की जा रही है। सबसे ज्यादा लारवा पीयू के हॉस्टलों और हाउसिंग बोर्ड के खाली पड़े मकानों की टंकी से मिल रहे हैं। टंकी पर ढक्कन नहीं हैं। इसलिए जमा पानी में लारवा ज्यादा मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने हाउसिंग बोर्ड के चीफ इंजीनियर को नोटिस भेजकर जल्द से जल्द टंकी में ढक्कन लगाने के आदेश जारी किए हैं। सीटीयू वर्कशॉप में भी काफी मात्रा में लारवा मिले हैं।
25 हजार से ज्यादा घरों की जांच
मलेरिया विभाग अभियान के तहत 25 हजार से ज्यादा घरों की जांच कर चुका है। घरों के कूलरों और टंकी की जांच होती है और उसके बाद घर के मालिक से हस्ताक्षर कराए जाते हैं, ताकि पता चलते रहे कि किस घर की जांच हुई या नहीं। जिन घरों में लारवा मिले हैं, उन पर कार्रवाई की गई है। अब तक 600 से ज्यादा नोटिस, दो शोकॉज नोटिस, पांच चालान काटे जा चुके हैं।
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मानसून की देरी का पड़ेगा प्रभाव
एंटी मलेरिया अधिकारी गौरव अग्रवाल ने बताया कि मानसून की देरी का प्रभाव डेंगू के लारवा पर भी पड़ सकता है। बारिश और उसके बाद बढ़ी उमस वेक्टर बोर्न डिजीज के लिए अनुकूल होती है। खासकर रुक-रुक होने वाली बारिश। लगातार और तेज बारिश का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। पिछले दिनों चंडीगढ़ में रुक-रुक कर ही बारिश हुई है। हालांकि पिछले तीन हफ्ते से डेंगू का एक भी केस सामने नहीं आया है।
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खाली पड़े मकानों की खुली टंकियां और पीयू हॉस्टल के कूलर बने ठिकाना