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चंडीगढ़ में पांच साल में दोगुने होंगे डायबिटिक मरीज
Updated Sun, 18 Jun 2017 01:49 AM IST
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पांच साल में चंडीगढ़ में दोगुने हो जाएंगे डायबिटीज पेशेंट
यदि प्री डायबिटिक पीड़ितों ने कोई कदम नहीं उठाए तो बढ़ेगी डायबिटिक मरीजों की संख्या
चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा हैं प्री डायबिटिक और डायबिटिक पेशेंट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यदि प्री डायबिटीज से पीड़ित मरीजों ने बीमारी से बचने के लिए कोई कदम नहीं उठाया तो वे अगले पांच सालों में डायबिटीज से पीड़ित हो जाएंगे। इसी के साथ चंडीगढ़ में इन पांच सालों में दोगुने मरीज हो जाएंगे। इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च व इंडिया डायबिटीज की स्टडी के मुताबिक शहर में डायबिटीज के कुल 13.6 फीसदी लोग पीड़ित हैं, जबकि प्री डायबिटीज से करीब 15 प्रतिशत के करीब।
यदि प्री डायबिटीज के लोग डायबिटीज में तब्दील हो जाएंगे तो अगले पांच साल में डायबिटीज का आंकड़ा 30 प्रतिशत के ऊपर पहुंच जाएगा, जो देश में सबसे ज्यादा होगा। हालांकि अब भी चंडीगढ़ के सबसे ज्यादा लोग इस गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। पीजीआई के इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अनिल भंसाली ने बताया कि डायबिटीज के लिए चंडीगढ़ प्रशासन को जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। क्योंकि शहर के युवा सबसे ज्यादा डायबिटीज के चपेट में आ रहे हैं।
इसलिए चंडीगढ़ में डायबिटीज ज्यादा
प्रोफेसर अनिल भंसाली बताते हैं कि चंडीगढ़ प्रति व्यक्ति आय में सबसे ऊपर है। इसलिए आरामतलबी और खाना पीना भी खूब है। दूसरी तरफ एक्सरसाइज बिल्कुल नहीं करते। शाम और सुबह के वक्त पार्क पूरी तरह खाली होते हैं। साल 2010 में हुई एक स्टडी बताती है कि 20-40 उम्र के 66 प्रतिशत लोग बिल्कुल भी एक्सरसाइज नहीं करते। लिहाजा इसलिए यहां पर डायबिटीज के पेशेंट ज्यादा हैं और रिस्क फैक्टर भी अधिक है।
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कॉलोनी में डायबिटीज के इसलिए बढ़ रहे केस
हाल ही में लांन्सेंट जरनल में प्रकाशित आईसीएमआर-इंडियन डायबिटीक स्टडी में बताया गया है कि चंडीगढ़ के 14 प्रतिशत लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जो पूरे भारत में सबसे ज्यादा है। यदि शहरी और ग्रामीण इलाकों के अलग-अलग आंकड़ों पर गौर करें तो शहरी इलाके के करीब 27 प्रतिशत गरीब घरों से ताल्लुक रखने वाले लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि अमीर घराने से ताल्लुक रखने वाले सिर्फ 13 प्रतिशत। प्रोफेसर भंसाली का कहना है कि पेरीफेरी में रहने वाले लोग भोजन में कार्बोहाइटेड की डाइट ज्यादा ले रहे हैं। वे अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा कमा भी रहे हैं। इसलिए इन लोगों में भी डायबिटीज की संख्या बढ़ रही है।
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यदि प्री डायबिटिक पीड़ितों ने कोई कदम नहीं उठाए तो बढ़ेगी डायबिटिक मरीजों की संख्या
चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा हैं प्री डायबिटिक और डायबिटिक पेशेंट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यदि प्री डायबिटीज से पीड़ित मरीजों ने बीमारी से बचने के लिए कोई कदम नहीं उठाया तो वे अगले पांच सालों में डायबिटीज से पीड़ित हो जाएंगे। इसी के साथ चंडीगढ़ में इन पांच सालों में दोगुने मरीज हो जाएंगे। इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च व इंडिया डायबिटीज की स्टडी के मुताबिक शहर में डायबिटीज के कुल 13.6 फीसदी लोग पीड़ित हैं, जबकि प्री डायबिटीज से करीब 15 प्रतिशत के करीब।
यदि प्री डायबिटीज के लोग डायबिटीज में तब्दील हो जाएंगे तो अगले पांच साल में डायबिटीज का आंकड़ा 30 प्रतिशत के ऊपर पहुंच जाएगा, जो देश में सबसे ज्यादा होगा। हालांकि अब भी चंडीगढ़ के सबसे ज्यादा लोग इस गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। पीजीआई के इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अनिल भंसाली ने बताया कि डायबिटीज के लिए चंडीगढ़ प्रशासन को जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। क्योंकि शहर के युवा सबसे ज्यादा डायबिटीज के चपेट में आ रहे हैं।
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इसलिए चंडीगढ़ में डायबिटीज ज्यादा
प्रोफेसर अनिल भंसाली बताते हैं कि चंडीगढ़ प्रति व्यक्ति आय में सबसे ऊपर है। इसलिए आरामतलबी और खाना पीना भी खूब है। दूसरी तरफ एक्सरसाइज बिल्कुल नहीं करते। शाम और सुबह के वक्त पार्क पूरी तरह खाली होते हैं। साल 2010 में हुई एक स्टडी बताती है कि 20-40 उम्र के 66 प्रतिशत लोग बिल्कुल भी एक्सरसाइज नहीं करते। लिहाजा इसलिए यहां पर डायबिटीज के पेशेंट ज्यादा हैं और रिस्क फैक्टर भी अधिक है।
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कॉलोनी में डायबिटीज के इसलिए बढ़ रहे केस
हाल ही में लांन्सेंट जरनल में प्रकाशित आईसीएमआर-इंडियन डायबिटीक स्टडी में बताया गया है कि चंडीगढ़ के 14 प्रतिशत लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जो पूरे भारत में सबसे ज्यादा है। यदि शहरी और ग्रामीण इलाकों के अलग-अलग आंकड़ों पर गौर करें तो शहरी इलाके के करीब 27 प्रतिशत गरीब घरों से ताल्लुक रखने वाले लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि अमीर घराने से ताल्लुक रखने वाले सिर्फ 13 प्रतिशत। प्रोफेसर भंसाली का कहना है कि पेरीफेरी में रहने वाले लोग भोजन में कार्बोहाइटेड की डाइट ज्यादा ले रहे हैं। वे अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा कमा भी रहे हैं। इसलिए इन लोगों में भी डायबिटीज की संख्या बढ़ रही है।