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माइम वर्कशॉप
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माइम वर्कशॉप में 50 कलाकारों को कराए कई एक्टिविटी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। टीएफटी फेस्टिवल के 30 दिवसीय नाट्य महाकुंभ में सोमवार को ‘माइम वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसमें प्रोफेशनल माइम निर्देशक कुलजिंदर सिंह ने कलाकारों के साथ माइम के अनुभव और बारीकियों को साझा किया। मूलरूप से यह नाटक चंडीगढ़ के नजदीक गांव पल्हेड़ी के निवासी व 2007 से थिएटर से जुड़े कुलजिंदर सिंह ने माइम को अभिनय का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि माइम का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही प्राचीन है। कुलजिंदर सिंह ने करीब 50 कलाकारों को बॉडी और एक्सप्रेशंस को लेकर विभिन्न व्यायाम करवाए, जिसमें पशु पक्षियों के चलने भागने और उनकी आवाजें शामिल रहीं। उन्होंने बताया कि थिएटर में भी केवल संवादों को पढ़ लेना और याद कर लेना ही काफी नहीं, कैरक्टर और कहानी का ‘सबटेक्स्ट’ यानी उसके पीछे की कहानी जानना भी जरूरी है। एक कहानी या नाटक में खुद बहुत सी कहानियां होती है, उस पर वर्क किया जाना बेहद जरूरी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। टीएफटी फेस्टिवल के 30 दिवसीय नाट्य महाकुंभ में सोमवार को ‘माइम वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसमें प्रोफेशनल माइम निर्देशक कुलजिंदर सिंह ने कलाकारों के साथ माइम के अनुभव और बारीकियों को साझा किया। मूलरूप से यह नाटक चंडीगढ़ के नजदीक गांव पल्हेड़ी के निवासी व 2007 से थिएटर से जुड़े कुलजिंदर सिंह ने माइम को अभिनय का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि माइम का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही प्राचीन है। कुलजिंदर सिंह ने करीब 50 कलाकारों को बॉडी और एक्सप्रेशंस को लेकर विभिन्न व्यायाम करवाए, जिसमें पशु पक्षियों के चलने भागने और उनकी आवाजें शामिल रहीं। उन्होंने बताया कि थिएटर में भी केवल संवादों को पढ़ लेना और याद कर लेना ही काफी नहीं, कैरक्टर और कहानी का ‘सबटेक्स्ट’ यानी उसके पीछे की कहानी जानना भी जरूरी है। एक कहानी या नाटक में खुद बहुत सी कहानियां होती है, उस पर वर्क किया जाना बेहद जरूरी है।