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पंचकूला का बेटा बना लेफ्टिनेंट, बड़ा भाई पायलट, नाना 3 युद्ध लड़ चुके थे
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Wed, 14 Sep 2016 10:00 PM IST
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पंचकूला का साहिल खत्री सेना में लेफ्टिनेंट बना
- फोटो : अमर उजाला
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पंचकूला के बेटे को लेफ्टिनेंट के पद पर ज्वॉइनिंग मिली है। नाना तीन युद्ध लड़ चुके थे, मामा भी कर्नल हैं। बड़ा भाई फाइटर पायलट है। आज जब देश के युवाओं में मल्टीनेशनल कंपनियों में जाकर बड़े-बड़े पैकेज लेने की होड़ लगी है, ऐसे में पंचकूला का एक परिवार ऐसा भी है, जिसके बेटे देश-सेवा को अहमियत देते हैं।
हम बात कर रहे हैं सेक्टर-17 में रहने वाले खत्री परिवार की। जिनके छोटे बेटे साहिल को हाल ही में आर्मी की जैग ब्रांच में लेफ्टिनेंट के पद पर ज्वाइनिंग मिली है। जिक्रयोग है कि परिवार के बड़े बेटे आदित्य ने चार वर्ष पूर्व, जून 2012 में वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में ज्वाइन किया था। बचपन से ही दोनों भाइयों ने सेना में जाने का मन बना रखा था।
इस सोच के पीछे पारिवारिक पृष्ठभूमि भी काम कर रही थी। माता कविता खत्री, हरियाणा बीज विकास निगम में कार्यरत हैं, अपने दोनों बच्चों को बचपन में लोरी के बजाए उनके नाना के युद्ध के किस्से सुनाया करती थी। नाना स्व होशियार सिंह ने पाकिस्तान और चीन के साथ हुए 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में भाग लिया था। मामा भी उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए सेना में भर्ती हुए। अभी वे कर्नल के पद पर देश की सेवा कर रहे हैं।
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साहिल और आदित्य ने जब होश संभाला तो मामा कर्नल प्रदीप सांगवान अपने साथ कैंट क्षेत्र में ले जाने लगे थे। इससे सेना में जाने की इच्छा और बलवती हो गई। हरियाणा शिक्षा विभाग में प्रवक्ता, पिता नरेश खत्री बताते हैं कि साहिल बचपन से ही मेधावी रहा है। इसने मैट्रिक लिटिल फ्लावर स्कूल पंचकूला से और कानून की पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से की।
वे बताते हैं कि बचपन में मामा के घर जाता तो उनकी आर्मी कैंप पहन कर शीशे के सामने खड़े होकर बड़े गर्व की अनुभूति किया करता था। वे कहते हैं कि उन्हें इस बात का बहुत गर्व है कि उनके दोनों बेटों ने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देश सेवा के रास्ते को चुना है।
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हम बात कर रहे हैं सेक्टर-17 में रहने वाले खत्री परिवार की। जिनके छोटे बेटे साहिल को हाल ही में आर्मी की जैग ब्रांच में लेफ्टिनेंट के पद पर ज्वाइनिंग मिली है। जिक्रयोग है कि परिवार के बड़े बेटे आदित्य ने चार वर्ष पूर्व, जून 2012 में वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में ज्वाइन किया था। बचपन से ही दोनों भाइयों ने सेना में जाने का मन बना रखा था।
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इस सोच के पीछे पारिवारिक पृष्ठभूमि भी काम कर रही थी। माता कविता खत्री, हरियाणा बीज विकास निगम में कार्यरत हैं, अपने दोनों बच्चों को बचपन में लोरी के बजाए उनके नाना के युद्ध के किस्से सुनाया करती थी। नाना स्व होशियार सिंह ने पाकिस्तान और चीन के साथ हुए 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में भाग लिया था। मामा भी उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए सेना में भर्ती हुए। अभी वे कर्नल के पद पर देश की सेवा कर रहे हैं।
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साहिल और आदित्य ने जब होश संभाला तो मामा कर्नल प्रदीप सांगवान अपने साथ कैंट क्षेत्र में ले जाने लगे थे। इससे सेना में जाने की इच्छा और बलवती हो गई। हरियाणा शिक्षा विभाग में प्रवक्ता, पिता नरेश खत्री बताते हैं कि साहिल बचपन से ही मेधावी रहा है। इसने मैट्रिक लिटिल फ्लावर स्कूल पंचकूला से और कानून की पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से की।
वे बताते हैं कि बचपन में मामा के घर जाता तो उनकी आर्मी कैंप पहन कर शीशे के सामने खड़े होकर बड़े गर्व की अनुभूति किया करता था। वे कहते हैं कि उन्हें इस बात का बहुत गर्व है कि उनके दोनों बेटों ने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देश सेवा के रास्ते को चुना है।