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एक ही परिवार से कई-कई सदस्य बनते रहे हैं पार्षद

Tue, 10 May 2016 04:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल Updated Tue, 10 May 2016 04:17 PM IST
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There are several members of the same family become councilor
मतदान - फोटो : file photo

पलवल की नगर परिषद में कई प्रकार के इतिहास बनते रहे हैं। जहां एक-एक परिवार के कई-कई लोगों को पार्षद बनने का मौका मिलता रहा है तो कई दिग्गजों को आम लोगों ने शिकस्त भी दी है। 

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वर्ष 2000 के ए ग्रेड की नगर परिषद के अस्तित्व में आने से पहले यहां बी श्रेणी की नगरपालिका हुआ करती थी। इसमें पूर्व मंत्री रहे बाबू कल्याण सिंह परिवार की तीन पीढ़ियां नगर पालिका में प्रतिनिधित्व करती रही हैं। बाबू कल्याण सिंह खुद कई बार नगर पार्षद रहे। उनके पुत्र कंवर राजेंद्र सिंह एक बार, भतीजे सुभाष चौधरी तीन बार, महेंद्र भड़ाना, रणदीप भड़ाना व पवन भड़ाना एक-एक बार पार्षद रहे हैं।
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पवन व रणदीप भड़ाना इस बार भी चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। पूर्व विधायक मूलचंद मंगला भी खुद पार्षद रहे तथा उनके पुत्र हरीश मंगला व पुत्रवधु भी एक-एक बार चुनाव जीत कर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पूर्व पार्षद सुरेश चुटानी, उनकी पत्नी राज चुटानी व पुत्र निशा चुटानी भी पार्षद रही हैं। चुटानी दंपति जहां परिषद के उपाध्यक्ष भी रहे वहीं निशा निर्विरोध रूप से पार्षद चुनी गईं। पूर्व पार्षद कंवर रमेश कुमार व उनकी पत्नी दोनों ही पार्षद रहे चुके हैं।
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पूर्व पार्षद बलराम गुप्ता, उनके भाई शिवशंकर गर्ग तथा भाभी भी नगर परिषद का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।  पूर्व में पार्षद रहे चंदगीराम ठेकेदार खुद दो बार पार्षद रहे। उनके निधन के बाद पुत्र नरेंद्र बबली तीन बार पार्षद चुने गए। बबली के निधन होने पर उपचुनाव हुआ, जिसमें उनके छोटे भाई मनोज बंधु पार्षद चुने गए।


पूर्व पार्षद चंदीराम गुप्ता दो बार खुद व दो बार उनकी पत्नी रेणुबाला गुप्ता दो-दो बार पार्षद रहे हैं। रेणुबाला गुप्ता एक बार तो निर्विरोध पार्षद चुनी गईं, लेकिन उनके बडे़ भाई तथा कांग्रेसी नेता ओमप्रकाश गुप्ता एक बार चुनाव लड़े और नवागत प्रत्याशी करण सिंह ने उन्हें बुरी तरह से हरा दिया। पार्षद नारायण सिंह सैनी खुद व उनकी पुत्रवधु भी एक ही बोर्ड में पार्षद रहे हैं। इसके साथ ही समाज व राजनीतिक दलों में अपनी खनक रखने वाले वीके जैन, गंगालाल गोयल, डालंचद मंगला व रामजीलाल शर्मा थानेदार सहित कई लोग नए-नए प्रत्याशियों से चुनाव हारते रहे। 

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