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चार नवंबर को किसान मोर्चा की बैठक में आंदोलन की दिशा होगी तय
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पलवल। देश की संसद द्वारा तीन कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन बिल को रद्द करने की मांगों को लेकर किसान आंदोलन जारी रहा। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर रणजीत सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित धरने का संचालन धर्मचंद घुगेरा ने किया। धरने में किसानों ने निर्णय लिया कि किसानों की जरूरी मांगों पर सरकार के रुख को ध्यान में रखकर चार दिसंबर को आयोजित किसान मोर्चा की बैठक में आंदोलन की दिशा तय की जाएगी। इस अवसर पर पूर्व सांसद अवतार भड़ाना ने धरने में शामिल किसानों को जीत की बधाई देते हुए आंदोलन को समर्थन देने का वादा किया।
धरने में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतनसिंह सौरौत व ताराचंद ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में किसानों को एक तय दाम से कम कीमत पर अपनी फसल को बेचने की मजबूरी नहीं होती। सरकार को निर्धारित दाम पर किसान की फसल खरीदनी पड़ती है। कृषि कानूनों के जरिये एमएसपी खत्म करने की साजिश हो रही थी। कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद भी किसान आंदोलन खत्म नहीं हो रहा। जिस तरह दुनिया भर में आबादी बढ़ रही है, उसे देखते हुए अगले कुछ सालों बाद सबसे ज्यादा मांग खाद्य पदार्थों की होगी और इसकी पूर्ति के लिए खेती किसानी पहले नंबर पर रहेगी। इसीलिए पूंजीपति पूरी दुनिया बड़े पैमाने पर खेती की जमीनें खरीद रहे हैं, जिनमें भारत भी पीछे नहीं है। उस समय जिसके पास जितनी जमीन होगी बादशाहत भी उसी के पास रहेगी। यह रुझान भारत में भी बढ़ रहा है। देश के पूंजीपति घराने इस कोशिश में हैं कि उन्हें खुली मार्केट मिले, उनके ऊपर कोई नियंत्रण न हो, उन्हें कोई मंडी टैक्स न देना पड़े और वह मनचाही कीमतों पर खाद्य उत्पाद अनाज, दलहन, तिलहन आदि कुछ भी खरीद सके।
किसान नेता रमेशचंद गोड़ौता व राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 29 नवंबर को होने वाले ट्रैक्टर मार्च को स्थगित करके स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अगर सरकार किसानों की मांगों पर सकारात्मक रुख रखती है तो किसान भी अपना सहयोग देने को तैयार रहेगा। धरने को किसान नेता सोहनपाल चौहान, मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, उदयसिंह सरपंच, नरेंद्र सहरावत, श्रीचंद महाशय, जियाराम सूबेदार, रोशनलाल, गोपी हवलदार, अच्छेलाल, रामसिंह चौहान, जयदेव, मुखराम और चंद्रमुनि आर्य ने भी संबोधित किया।
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धरने में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतनसिंह सौरौत व ताराचंद ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में किसानों को एक तय दाम से कम कीमत पर अपनी फसल को बेचने की मजबूरी नहीं होती। सरकार को निर्धारित दाम पर किसान की फसल खरीदनी पड़ती है। कृषि कानूनों के जरिये एमएसपी खत्म करने की साजिश हो रही थी। कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद भी किसान आंदोलन खत्म नहीं हो रहा। जिस तरह दुनिया भर में आबादी बढ़ रही है, उसे देखते हुए अगले कुछ सालों बाद सबसे ज्यादा मांग खाद्य पदार्थों की होगी और इसकी पूर्ति के लिए खेती किसानी पहले नंबर पर रहेगी। इसीलिए पूंजीपति पूरी दुनिया बड़े पैमाने पर खेती की जमीनें खरीद रहे हैं, जिनमें भारत भी पीछे नहीं है। उस समय जिसके पास जितनी जमीन होगी बादशाहत भी उसी के पास रहेगी। यह रुझान भारत में भी बढ़ रहा है। देश के पूंजीपति घराने इस कोशिश में हैं कि उन्हें खुली मार्केट मिले, उनके ऊपर कोई नियंत्रण न हो, उन्हें कोई मंडी टैक्स न देना पड़े और वह मनचाही कीमतों पर खाद्य उत्पाद अनाज, दलहन, तिलहन आदि कुछ भी खरीद सके।
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किसान नेता रमेशचंद गोड़ौता व राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 29 नवंबर को होने वाले ट्रैक्टर मार्च को स्थगित करके स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अगर सरकार किसानों की मांगों पर सकारात्मक रुख रखती है तो किसान भी अपना सहयोग देने को तैयार रहेगा। धरने को किसान नेता सोहनपाल चौहान, मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, उदयसिंह सरपंच, नरेंद्र सहरावत, श्रीचंद महाशय, जियाराम सूबेदार, रोशनलाल, गोपी हवलदार, अच्छेलाल, रामसिंह चौहान, जयदेव, मुखराम और चंद्रमुनि आर्य ने भी संबोधित किया।
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