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Palwal News: खेतों में बोआई की बेला, खाद-बीज का टोटा बना झमेला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 11:23 PM IST
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Sowing season in the fields, yet a shortage of fertilizers and seeds creates a major hurdle.
जिले में एक माह से डीएपी, यूरिया और एनपीके की कमी, गेहूं का बीज भी नहीं मिल रहा
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अनंत भारद्वाज

पलवल। धान की कटाई के बाद रबी फसलों की बीजाई का सीजन शुरू हो चुका है। किसान गेहूं एवं सरसों की फसल खेतों में बोने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन जिलेभर में खाद की कमी का संकट खड़ा हो गया है। जिले की सरकारी एवं निजी खाद की दुकानों पर खाद न मिल पाने के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
किसान बताते हैं कि एक माह से पूरे जिलेभर में खाद-बीज की निजी व सरकारी दुकानों में डीएपी, यूरिया व एनपीके खाद उपलब्ध नहीं हैं। इससे रबी सीजन की प्रमुख फसलें गेहूं व सरसों की बीजाई में देरी हो रही है। इससे इन फसलों की उत्पादन दर प्रभावित होगी। कुछ किसानों का कहना है कि सरसों की बीजाई से पहले भी खेत तैयार करने के लिए खाद लगाना पड़ता है। वहीं, जो किसान सरसों की बीजाई कर चुके हैं, दोबारा खाद न लग पाने की वजह से भी उनकी फसलें भी प्रभावित हो रही हैं।
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किसानों का कहना है कि पलवल अनाज मंडी स्थित इफ्को केंद्र पर गेहूं का बीज भी नहीं मिल रहा है। हालांकि, हरियाणा बीज विकास निगम की दुकान पर गेहूं की डीबीडब्ल्यू 327 वैरायटी के बीज लगभग 1050 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध हैं। किसानों के मुताबिक जिलेभर में गेहूं की डीबीडब्ल्यू 322, डीबीडब्ल्यू 327 और डीबीडब्ल्यू 386 वैरायटी के बीजों की मांग है। इन किस्मों के गेंहू की उत्पादन दर औसतन 30 से 50 क्विंटल प्रति एकड़ तक रहती है।
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नैनो यूरिया और जैविक खाद बने बोझ
किसानों का आरोप है कि इफ्को केंद्र पर पांच बोरी खाद खरीदने पर 600 रुपये की तरल नैनो यूरिया की शीशी अनिवार्य तौर पर खरीदनी पड़ती है। वहीं, निजी दुकान संचालक प्रत्येक खाद की बोरी पर जैविक खाद के नाम पर अज्ञात कंपनियों के तरल रसायन बेचते हैं। यह रसायन किसानों को 600 रुपये प्रति बोरी की दर से अतिरिक्त आर्थिक बोझ के रूप में खरीदना पड़ता है। उनका कहना है कि तरल नैनो यूरिया तो फिर भी उपयोग में आ जाता है, लेकिन निजी दुकानदारों से जैविक खाद के नाम पर मिलने वाले रसायन तो अनुपयोगी रहते हैं। वहीं, इफ्को अधिकारियों का कहना है कि तरल खाद के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को नैनो यूरिया की शीशी दी जाती है।
किसानों से बातचीत

खाद लेने के लिए दुकानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। डीएपी, यूरिया और एनपीके नहीं मिलने से खेत तैयार करने और फसल की बुवाई में देरी हो रही है। - विजेंद्र


निजी दुकानों से खाद खरीदने पर जैविक खाद के नाम पर तरल रसायन दिए जाते हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है। किसान बहुत परेशान हैं। - राजवीर

खाद के साथ बीज मिलने में भी बहुत परेशानी हो रही है। डीबीडब्ल्यू-322 और डीबीडब्ल्यू-386 किस्मों के बीज उपलब्ध कराना चाहिए। - ललित कुमार

समय पर डीएपी खाद नहीं मिलने से खेती के काम में देरी हो रही है। किसानों को खाद के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है, जिससे बिजाई प्रभावित होगी। - सुंदर
वर्जन

किसी कारणवश खाद की रैक आने में देरी हुई है। दो दिन में पहुंचने की उम्मीद है, जिससे किसानों को हो रही परेशानी दूर हो जाएगी। विभाग की ओर से सोमवार को होडल और हसनपुर खंड के थोक एवं खुदरा खाद विक्रेताओं बैठक कर उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों पर खाद के साथ कोई अन्य सामान खरीदने का दबाव न बनाएं। ऐसी कोई शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। खाद वितरण में मेरी फसल-मेरा ब्योरा के नियमों का पालन करना होगा। - डॉ. जगिर सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग
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