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Palwal News: मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज में संसाधनों की कमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 12:32 AM IST
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Shortage of resources at Mewat Engineering College
करीब 270 विद्यार्थियों ने लिया दाखिला, लेकिन पर्याप्त शिक्षकों की कमी बनी चुनौती
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पानी, साफ-सफाई, प्रयोगशालाओं और हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत
28 एकड़ परिसर को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की उठ रही मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कभी हरियाणा के साथ-साथ बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर तक के विद्यार्थी यहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पहुंचते थे, लेकिन वर्तमान में शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति और प्रबंधन से जुड़ी समस्याएं इसकी शैक्षणिक व्यवस्था के सामने चुनौती बन रही हैं।

इस सत्र में करीब 270 विद्यार्थियों ने कॉलेज में दाखिला लिया है, लेकिन विद्यार्थियों के अनुपात में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ने की आशंका है। तकनीकी शिक्षा में नियमित कक्षाओं के साथ प्रयोगशाला, प्रैक्टिकल और विशेषज्ञ शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में शिक्षकों की कमी को दूर करना कॉलेज के भविष्य के लिए सबसे जरूरी कदम माना जा रहा है।
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सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत
कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए पेयजल, साफ-सफाई, शौचालय, बिजली, खेल मैदान और हॉस्टल जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत है। विद्यार्थियों के अनुसार कॉलेज परिसर और खेल मैदान के रखरखाव पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए। हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भोजन और अन्य सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता है। तकनीकी शिक्षा के लिहाज से प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाना भी प्राथमिकता होनी चाहिए। इंजीनियरिंग की पढ़ाई केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होती। विद्यार्थियों को आधुनिक उपकरणों, सॉफ्टवेयर और इंडस्ट्री आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो वे रोजगार के बदलते बाजार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकते हैं।
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शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी चुनौती
कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं का असर भी विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। लंबे समय से वेतन में देरी, शिक्षकों के पद खाली होने और नियमित फैकल्टी की कमी जैसी शिकायतों को गंभीरता से देखने की जरूरत है। कॉलेज से अनुभवी शिक्षकों का जाना विद्यार्थियों के लिए भी नुकसानदायक है। सरकार और कॉलेज की उच्च प्रबंधन व्यवस्था को चाहिए कि खाली पदों को जल्द भरा जाए। स्थायी और योग्य फैकल्टी के साथ विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति हो, ताकि विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।


कोट

बुनियादी सुविधाएं बहाल करने का प्रयास किया जाएगा। इस संदर्भ में हमारी कोशिश जारी है। अभी कुछ समय लग रहा है। - जाकिर हुसैन, प्रशासक, हरियाणा वक्फ बोर्ड
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